भारतीय नृत्य जगत की मशहूर डांसर अमला शंकर (Amla Shankar) ने भारतीय फ्यूजन डांस को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई. अपने पति और महान डांसर उदय शंकर के साथ मिलकर उन्होंने भारतीय नृत्य को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया. 101 वर्ष की आयु में 24 जुलाई 2020 को कोलकाता में उनका निधन हो गया था, लेकिन उनकी कला और विरासत आज भी जीवित है.
अमला शंकर का जन्म 27 जून 1919 को जेस्सोर (अब बांग्लादेश) में हुआ था. उनके पिता अक्षय कुमार नंदी सोने के व्यापारी थे. वह चाहते थे कि बेटी खूब पढ़े. इसके लिए उन्होंने बेटी को रवींद्रनाथ टैगोर और माइकल मधुसूदन दत्त जैसे साहित्यकारों से परिचित कराया. 11 वर्ष की आयु में 1931 में अमला अपने पिता के साथ पेरिस में अंतर्राष्ट्रीय औपनिवेशिक प्रदर्शनी में पहुंची थीं, जहां उनकी मुलाकात उदय शंकर और उनके परिवार से हुई.
उदय उस समय 30 वर्ष के थे जब उन्होंने अमला की प्रतिभा को पहचाना और उन्हें नृत्य के लिए प्रोत्साहित किया. उनकी पहली प्रस्तुति 1931 में बेल्जियम में ‘कालिया दमन’ में कालिया के रूप में थी. साल 1930 के दशक में जब महिलाओं का सार्वजनिक मंच पर नृत्य करना सामान्य नहीं माना जाता था, अमला ने उदय शंकर के साथ मिलकर नृत्य की दुनिया में कदम रखा.
साल 1942 में उदय से उनकी शादी हुई और दोनों ने मिलकर कई यादगार प्रस्तुतियां दीं. उनके दो बच्चे, संगीतकार आनंद शंकर और एक्टर-डांसर ममता शंकर (Mamta Shankar) ने भी कला जगत में अपनी पहचान बनाई.
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अमला शंकर वैश्विक मंच पर प्रस्तुति देने के साथ ही फिल्म में भी काम कर चुकी हैं. उन्होंने पति उदय शंकर की साल 1948 में आई फिल्म ‘कल्पना’ में काम किया था, जिसमें उनके किरदार का नाम उमा था. फिल्म की कहानी एक नर्तक की रहती है, जो हिमालय में नृत्य अकादमी स्थापित करने के लिए संघर्ष करती है. इस फिल्म की साल 2012 में कान्स फिल्म फेस्टिवल में स्क्रीनिंग भी हुई थी, जहां 92 वर्ष की आयु में अमला ने रेड कार्पेट पर गरिमामय उपस्थिति दर्ज कराई थी.
अमला ने उदय शंकर की नृत्य शैली, जिसमें भरतनाट्यम, कथकली, कथक, मणिपुरी और लोक नृत्यों का मिश्रण था, को जीवित रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया. उदय शंकर के निधन (1977) के बाद उन्होंने अपनी बेटी ममता और बहू तनुश्री शंकर के साथ ‘शंकर घराना’ को आगे बढ़ाया. वह 90 वर्ष की आयु तक सक्रिय रहीं और आखिरी प्रस्तुति ‘सीता स्वयंवर’ में दी थी.
अमला ने न केवल भारतीय नृत्य को वैश्विक मंच पर ले जाने में मदद की, बल्कि महिलाओं के लिए नृत्य को एक सम्मानजनक पेशे के रूप में स्थापित करने में भी योगदान दिया. अमला की बहुमुखी प्रतिभा नृत्य तक सीमित नहीं थी. वह चित्रकला में भी निपुण थीं. उनकी कला का उपयोग ‘लाइफ ऑफ बुद्ध’ और ‘रामलीला’ जैसे नृत्य नाटकों में हुआ.
अमला शंकर की उपलब्धियों के लिए, पश्चिम बंगाल सरकार ने साल 2011 में उन्हें ‘बंगा विभूषण’ पुरस्कार से सम्मानित किया. यह पुरस्कार उनकी कला के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान के लिए था.
-भारत एक्सप्रेस
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