पश्चिम बंगाल में चुनावी पारा अपने चरम पर है और इसी गहमागहमी के बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो ने सनसनी मचा दी है. इस वीडियो में कुछ लोगों की भीड़ सुरक्षा बलों की गाड़ी पर दनादन पत्थर बरसाती नजर आ रही है. चारों तरफ चीख-पुकार और अफरातफरी का माहौल है. वीडियो को शेयर करने वाले दावा कर रहे हैं कि ये घटना पश्चिम बंगाल के मालदा या मुर्शिदाबाद जिले की है, जहां भीड़ ने सुरक्षा बलों को निशाना बनाया है. फेसबुक और एक्स पर लोग इसे सांप्रदायिक रंग देते हुए साझा कर रहे हैं. लेकिन जब हमने इस वीडियो की तहकीकात की, तो जो हकीकत सामने आई वो चौंकाने वाली है.
दरअसल, फेसबुक पर एक यूजर ने इस वीडियो को पोस्ट करते हुए लिखा कि पश्चिम बंगाल में सेना की गाड़ी पर हमला हुआ है. पोस्ट में ये भी आरोप लगाया गया कि मालदा और मुर्शिदाबाद में अप्रैल 2026 में सुरक्षा बलों को बंधक बनाने और उनके वाहनों को तोड़ने की घटनाएं हुई हैं.
वीडियो में बैकग्राउंड में एक शख्स को ये कहते हुए भी सुना जा सकता है कि हमला करने वाले एक खास समुदाय के लोग हैं. चुनाव के समय इस तरह के वीडियो न केवल गलतफहमी पैदा करते हैं, बल्कि शांति व्यवस्था के लिए भी खतरा बन सकते हैं. इसीलिए इसकी बारीकी से जांच करना बेहद जरूरी था.
जब हमने इस वीडियो को फ्रेम-दर-फ्रेम देखना शुरू किया, तो कुछ ऐसी चीजें नजर आईं जो भारत की नहीं लग रही थीं. वीडियो में जिस गाड़ी पर पथराव हो रहा है, उस पर बड़े अक्षरों में ‘RMP’ लिखा हुआ है. इंटरनेट पर सर्च करने पर पता चला कि RMP का मतलब ‘Riot Management Police’ है, जो कि पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की एक विशेष पुलिस इकाई है. भारत में दंगों को काबू करने के लिए आमतौर पर रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) या स्थानीय पुलिस की वज्र गाड़ियों का इस्तेमाल होता है, लेकिन RMP नाम की कोई फोर्स भारतीय सुरक्षा तंत्र का हिस्सा नहीं है.
इतना ही नहीं, वीडियो में सड़क किनारे एक दुकान का बोर्ड भी दिखाई दिया, जिस पर ‘लवली कोल्ड कॉर्नर’ लिखा था. जब इस नाम को गूगल मैप्स और अन्य सर्च इंजन पर ढूंढा गया, तो इसकी लोकेशन पाकिस्तान के लाहौर स्थित समानाबाद इलाके में मिली. गूगल स्ट्रीट व्यू की मदद से जब हमने उस जगह की तुलना की, तो वहां मौजूद फ्लाईओवर, सड़क की बनावट और आसपास की इमारतें हूबहू वैसी ही थीं जैसी वीडियो में दिख रही हैं.
इस जांच से ये भी साफ हुआ कि ये वीडियो हाल-फिलहाल का नहीं है. डिजिटल फुटप्रिंट्स खंगालने पर पता चला कि ये वीडियो इंटरनेट पर अक्टूबर 2025 से ही मौजूद है. हालांकि ये स्पष्ट नहीं है कि उस वक्त लाहौर में किस बात को लेकर प्रदर्शन हो रहा था, लेकिन ये सौ फीसदी तय है कि इसका भारत या पश्चिम बंगाल के मौजूदा चुनावों से कोई लेना-देना नहीं है.
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-भारत एक्सप्रेस
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