गुवाहाटी: असम में शुक्रवार को मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 साल और राज्य के विकास में उनके योगदान पर चर्चा की गई. करीब 90 मिनट तक चली इस विशेष बैठक में मंत्रिमंडल ने कुल 75 प्रस्ताव पारित किए. इनमें सड़क और रेल संपर्क, औद्योगिक निवेश, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, सुरक्षा और बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता दी गई.
बैठक का मकसद मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के दौर से लेकर प्रधानमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल तक के सफर के दौरान असम और पूर्वोत्तर में हुए बदलावों को सामने रखना था. बैठक के बाद मुख्यमंत्री सरमा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि शांति, बेहतर संपर्क और निवेश ने असम में विकास के नए रास्ते खोले हैं.
मुख्यमंत्री के मुताबिक, राज्य में सुरक्षा की स्थिति में सुधार और शांति समझौतों ने विकास के लिए बेहतर माहौल तैयार करने में मदद की है. वहीं, सड़क और अन्य परिवहन सुविधाओं के विस्तार से लोगों के लिए आवाजाही आसान हुई है और कारोबार के नए अवसर भी बने हैं.
सरमा ने कहा कि उद्योगों में निवेश से राज्य की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने की संभावनाएं बनी हैं. इसके साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा के क्षेत्र में विकास से लोगों की क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर दिया गया है.
कैबिनेट के प्रस्तावों में असम को एक ऐसे राज्य के रूप में पेश किया गया, जहां निवेश की संभावनाएं बढ़ रही हैं. साथ ही, पूर्वोत्तर के प्रवेश द्वार के तौर पर असम की भूमिका और केंद्र सरकार के ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य में उसके योगदान का भी जिक्र किया गया.
बैठक में राज्य में चल रही और प्रस्तावित कई बड़ी परियोजनाओं को भी प्रमुखता से रखा गया. इनमें जगीरोड में करीब 27,000 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग सुविधा शामिल है. इसके अलावा, नुमालीगढ़ रिफाइनरी के 28,000 करोड़ रुपये के विस्तार का भी उल्लेख किया गया.
एक और अहम परियोजना गोहपुर-नुमालीगढ़ ट्विन-ट्यूब सड़क सुरंग है, जिसकी अनुमानित लागत 18,662 करोड़ रुपये बताई गई है. इस सुरंग के बनने से ब्रह्मपुत्र के दोनों किनारों के बीच संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है.
गुवाहाटी रिंग रोड, काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर और सिलचर-सौराष्ट्र हाई-स्पीड कॉरिडोर का भी प्रस्तावों में जिक्र किया गया. इन परियोजनाओं को सड़क संपर्क मजबूत करने और यात्रा को अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में अहम माना गया है.
औद्योगिक विकास के साथ-साथ ऊर्जा और उर्वरक उत्पादन से जुड़ी योजनाओं को भी बैठक में जगह मिली. इनमें नामरूप-IV अमोनिया-यूरिया परिसर, नुमालीगढ़ में बांस से बायोएथेनॉल बनाने वाला दूसरी पीढ़ी का संयंत्र और 718 किलोमीटर लंबी बरौनी-गुवाहाटी प्राकृतिक गैस पाइपलाइन शामिल हैं.
कैबिनेट ने एडवांटेज असम 2.0 निवेश शिखर सम्मेलन का भी उल्लेख किया. इस तरह की पहल के जरिए राज्य में उद्योगों और निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ाने की कोशिश की जा रही है.
असम के विकास की चर्चा में शांति प्रक्रिया को भी अहम स्थान दिया गया. प्रस्तावों में बोडो, कार्बी, आदिवासी संगठनों और यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) से जुड़े समूहों के साथ हुए शांति समझौतों का उल्लेख किया गया. इन समझौतों को लंबे समय से चले आ रहे संघर्षों को सुलझाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया.
स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में एम्स गुवाहाटी और आईआईएम गुवाहाटी जैसे संस्थानों का भी जिक्र हुआ. इनके अलावा, असम की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी दो उपलब्धियों को भी प्रस्तावों में शामिल किया गया. इनमें चराइदेव के मोइदम को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा मिलना और वर्ष 2024 में असमिया भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया जाना शामिल है.
कैबिनेट के प्रस्तावों में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी की असम की 36 यात्राओं का उल्लेख किया गया. सरकार ने इन दौरों को राज्य में विकास परियोजनाओं और विभिन्न पहलों से जोड़कर देखा.
-भारत एक्सप्रेस
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