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Bhojpur Police Action Case में स्वत: संज्ञान और सीबीआई जांच की मांग, भरत भूषण तिवारी की मौत पर विवाद गहराया

Bharat Tiwari Encounter: पटना उच्च न्यायालय एवं बिहार विधान सभा से जुड़े पैनल अधिवक्ता मनीभूषण प्रताप सेंगर ने एक महत्वपूर्ण कानूनी अभ्यावेदन माननीय मुख्य न्यायाधीश, पटना हाईकोर्ट को प्रेषित किया है. इस अभ्यावेदन में भोजपुर जिले के बिहटा थाना क्षेत्र में 17 जून 2026 को हुई पुलिस कार्रवाई के दौरान भारत भूषण तिवारी की मृत्यु के मामले में स्वतः संज्ञान लेने और स्वतंत्र जांच के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को निर्देशित करने की मांग की गई है.

निष्पक्ष, पारदर्शी एवं स्वतंत्र जांच की मांग हुई तेज

अधिवक्ता द्वारा प्रस्तुत पत्र में कहा गया है कि इस घटना को लेकर सामने आए आधिकारिक विवरण, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो फुटेज तथा विभिन्न सार्वजनिक दावों में गंभीर विरोधाभास दिखाई देते हैं. इन विरोधाभासों के कारण मामले को लेकर व्यापक जनचर्चा उत्पन्न हुई है और निष्पक्ष, पारदर्शी एवं स्वतंत्र जांच की मांग तेज हो गई है.

अभ्यावेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रत्येक नागरिक के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा राज्य का मौलिक दायित्व है. ऐसे में किसी भी पुलिस मुठभेड़ या कार्रवाई के दौरान हुई मृत्यु की जांच सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार निष्पक्ष एवं स्वतंत्र रूप से होना आवश्यक माना गया है, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता या संदेह की स्थिति को दूर किया जा सके.

साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ ना की जा सके

पत्र में माननीय न्यायालय से विशेष रूप से अनुरोध किया गया है कि इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए संपूर्ण प्रकरण की न्यायिक निगरानी में जांच सुनिश्चित की जाए. साथ ही यह भी आग्रह किया गया है कि घटना से जुड़े सभी डिजिटल साक्ष्य, वीडियो रिकॉर्डिंग, मोबाइल डेटा तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामग्री को तत्काल सुरक्षित रखने का निर्देश दिया जाए, जिससे किसी भी प्रकार के साक्ष्य के नष्ट या छेड़छाड़ की संभावना समाप्त हो सके.

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स्वतंत्र जांच ही न्याय सुनिश्चित करने का सर्वोत्तम माध्यम होगी

इसके अतिरिक्त पोस्टमार्टम रिपोर्ट, चिकित्सीय अभिलेख, बैलिस्टिक रिपोर्ट और अन्य संबंधित दस्तावेजों के संरक्षण का भी अनुरोध किया गया है. अभ्यावेदन में यह भी मांग की गई है कि जांच की प्रगति रिपोर्ट समय-समय पर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाए, ताकि प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे.मनीभूषण प्रताप सेंगर ने स्पष्ट किया कि यह अनुरोध किसी भी व्यक्ति के दोष या निर्दोष होने का पूर्व निर्णय नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य केवल सत्य की स्थापना, विधि के शासन की रक्षा और न्याय प्रणाली में जनता के विश्वास को मजबूत करना है. उन्होंने कहा कि इस संवेदनशील मामले में स्वतंत्र जांच ही न्याय सुनिश्चित करने का सर्वोत्तम माध्यम होगी.

भारत एक्सप्रेस

Swati Pandey

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