मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव की रणभेरी बज चुकी है. जिसके बाद सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी तैयारियों में जुटे हुए हैं. बीजेपी-कांग्रेस ने ज्यादातर सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है. जिसके बाद प्रत्याशी अपने चुनाव प्रचार में जुट गए हैं. उम्मीदवारों की लिस्ट जारी होने के बाद सियासी हलचल और तेज हो गई है.
बीजेपी-कांग्रेस ने उम्मीदवारों का चयन बहुत ही सोच-समझकर किया है. लिस्ट देखकर जाहिर होता है कि जातीय समीकरण, स्थानीय मुद्दे और महिला वोटर्स को ध्यान में रखकर ये फैसले लिए गए हैं. इसके साथ ही उन सीटों पर ज्यादा फोकस किया गया है, जहां पर पार्टियां कमजोर हैं. इसके लिए नई रणनीति के साथ चुनावी मैदान में उतरी हैं. कांग्रेस की लिस्ट में एक नाम काफी चर्चा में आ गया है. कांग्रेस ने केपी सिंह को शिवपुरी से टिकट दिया है. केपी सिंह 6 बार से एक ही सीट पिछोर से विधायक रह चुके हैं.
केपी सिंह की सीट बदलने के पीछे कांग्रेस की बड़ी रणनीति मानी जा रही है. कांग्रेस ने ऐसा इसलिए किया है क्योंकि बीते दिनों ऐसी खबरें उड़ी थीं कि बीजेपी शिवपुरी से ज्योतिरादित्य सिंधिया को मैदान में उतार सकती है. इसी को ध्यान में रखकर कांग्रेस ने केपी सिंह को शिवपुरी से टिकट दिया है.
ज्योतिरादित्य सिंधिया के शिवपुरी से चुनाव लड़ने की अटकलें इसलिए भी तेज हो गई हैं क्योंकि शिवपुरी से यशोधरा राजे सिंधिया विधायक हैं और उन्होंने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है. ऐसे में माना जा रहा है कि बीजेपी सिंधिया परिवार से की किसी चेहरे को चुनाव लड़ाएगी. इसलिए कांग्रेस का मानना है कि अगर ज्योतिरादित्य सिंधिया चुनाव लड़ते हैं तो उन्हें हराने के लिए किसी बड़े नेता की जरूरत होगी. यही वजह है कि कांग्रेस ने केपी सिंह को यहां से टिकट दिया है.
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वहीं ये भी माना जा रहा है कि बीजेपी ने पिछोर से प्रीतम लोधी को टिकट दिया है. प्रीतम लोधी ने पिछले दो चुनावों में केपी सिंह को कड़ी टक्कर देते हुए काफी कम अंतर से हार गए थे. इसके साथ ही पिछोर लोधी बाहुल्य सीट है. जहां पर करीब 40 हजार वोटर्स लोधी समाज से आते हैं. जिसे देखते हुए बीजेपी ने प्रीतम लोधी पर दांव लगाया है. इसके अलावा पिछोर में केपी सिंह के खिलाफ भी लहर चल रही है. यही वजह है कि कांग्रेस ने उनकी सीट को बदल दिया है.
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