मोदी सरकार की ओर से लगातार किए जा रहे आर्थिक सुधारों का असर जमीनी स्तर पर दिखने लगा रहा है. देश में नए बिजनेस की संख्या में 27 प्रतिशत का बड़ा इजाफा देखने को मिला है.
सरकार द्वारा गुरुवार को जारी फैक्टशीट के मुताबिक, भारत में चालू वित्त वर्ष (वित्त वर्ष 2025-26) के पहले 10 महीनों (3 फरवरी 2026 तक) में 1.98 लाख नए बिजनेस पंजीकृत हुए हैं, जिनकी संख्या 2020-21 में 1.55 लाख थी.
आधिकारिक बयान में कहा गया कि सरकार ने केंद्रीय बजट 2026-27 में डिजिटल ट्रेड सुविधा,कर निश्चितता, अनुपालन और मुकदमेबाजी में कमी, विश्वास आधारित सीमा शुल्क प्रणाली और निवेश-अनुकूल कर व्यवस्था के जरिए व्यापार में आसानी बढ़ाने पर फोकस किया है.
बयान में आगे कहा गया कि स्टार्ट-अप इंडिया, क्रेडिट गारंटी योजना, डिजिटल क्रेडिट मूल्यांकन मॉडल आदि जैसे संस्थागत सुधार एक पारदर्शी, प्रौद्योगिकी-सक्षम और निवेशक-अनुकूल वातावरण का निर्माण कर रहे हैं. इस प्रयास को जन विश्वास अधिनियम, आईबीसी, एमएटी आदि जैसे समानांतर नियामक सुधारों का समर्थन प्राप्त है, जो क्षमता निर्माण, नियामक सामंजस्य और विश्वास एवं जवाबदेही पर आधारित शासन मॉडल को प्राथमिकता दे रहे हैं.
फरवरी 2026 तक 2.16 लाख से अधिक डीपीआईआईटी-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स के साथ, भारत विश्व के सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम में से एक के रूप में मजबूती से खड़ा है.
2016 से शुरू किए गए स्टार्टअप्स के लिए नियामक सुधारों का उद्देश्य स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए व्यापार करने में आसानी, पूंजी जुटाने में आसानी और अनुपालन बोझ को कम करना है.
स्टार्टअप इंडिया के अलावा, मोदी सरकार की कई पहलों ने तकनीकी नवाचार, ग्रामीण उद्यमिता, अकादमिक अनुसंधान और क्षेत्रीय समावेशन को बढ़ावा देकर भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम को और मजबूत किया है. ये पहलें सुनिश्चित करती हैं कि स्टार्टअप समर्थन व्यापक, विकेंद्रीकृत और राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं के साथ निकटता से जुड़ा रहे.
पिछले कुछ वर्षों में, भारत न केवल निवेश के लिए बल्कि कारोबार करने के लिए भी सबसे आकर्षक गंतव्यों में से एक बनकर उभरा है. देश की सुधार-आधारित विकास रणनीति उद्यमिता को मजबूत करने, वित्त तक पहुंच बढ़ाने, नियामक ढांचे का आधुनिकीकरण करने और व्यापार सुविधा को बढ़ाने पर केंद्रित है.
बयान में आगे कहा गया है कि ये सभी उपाय न केवल कारोबार करने में आसानी बढ़ाते हैं बल्कि वित्तीय समावेशन को भी गहरा करते हैं, नवाचार को बढ़ावा देते हैं, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के विकास में तेजी लाते हैं और भारत को एक प्रतिस्पर्धी वैश्विक व्यापार और निवेश केंद्र के रूप में स्थापित करते हैं.
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