किसानों के साथ मोहन यादव
MP Land Acquisition Rules: अजय भटनागर/भोपाल: उज्जैन लैंड और ग्रीन फील्ड कॉरिडोर सहित किसानों की निजी भूमि अधिग्रहण को लेकर हुए विवाद के बाद अब मध्यप्रदेश सरकार भू अर्जन के नियमों और मुआवजा को लेकर संशोधन करना चाहती है. मोहन यादव सरकार ने एक मंत्री मंडलीय समिति का गठन किया है. जिसमे प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह के अलावा एमएसएमई मिनिस्टर चेतन कश्यप और जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट है. समिति लोगों से बात कर रही है. इसके बाद वह मुख्यमंत्री को 30 जनवरी तक अपने सुझाव देंगे.
समिति प्रदेश में विकास कार्यों के लिए भू अर्जन में नए सिरे से मुआवजा निर्धारण को लेकर अपने सुझाव सरकार को देगी. समिति के द्वारा सरकार किसानों की भूमि लेने एक एवज में मिलने वाले मुआवजा राशि की गणना फैक्टर को बढ़ाने की मंशा को लेकर काम कर रही है.
समिति में शामिल मंत्री राकेश सिंह के मुताबिक जमीन मुआवजे को लेकर कोई विसंगति नहीं हो और किसानों को पर्याप्त मुआवजा मिले ताकि उनकी भी संतुष्टि हो जाए. इसको लेकर आम लोगों के साथ साथ किसानों, उद्योगपतियों, और जन प्रतिनिधियों से भी सुझाव लिए जा रहे हैं. यह सुझाव सीधे चर्चा के अलावा ऑन लाइन भी 30 जनवरी 2026 तक लिए जाएंगे. जिसके बाद मुआवजा गणना राशि के फैक्टर को लेकर सरकार को सुझाव दिए जाएंगे.
मोहन यादव सरकार निवेश को लेकर लागातार प्रयास कर रही है. क्योंकि उद्योगों के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए जमीन की आवश्यकता है. इसमें सबसे ज्यादा किसानों की जमीन और उससे मिलने वाले मुआवजा राशि को लेकर टकराव रहता है.
भारतीय किसान संघ के मुताबिक 2013 में केंद्र सरकार ने तय किया था कि भू अर्जन को लेकर शहरी क्षेत्र में गाइड लाइन का दो गुना और ग्रामीण क्षेत्र में चार गुना मुआवजा दिया जाएगा. कुछ राज्यों में यह नियम लागू भी है, लेकिन मध्यप्रदेश में मुआवजा राशि कम है. इसके अलावा, कलेक्टर गाइडलाइन भी बाजार मूल्य से काफी कम होने के कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है.
महेश चौधरी, क्षेत्रीय संगठन मंत्री, भारतीय किसान संघ ने कहा कि किसान संगठन ने समिति से मिलकर सुझाव दिया है कि विकास कार्यों के लिए सिंचित भूमि का अधिग्रहण न किया जाए और कलेक्टर गाइडलाइन की दरों को बढ़ाया जाए.
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इंडस्ट्री स्थापना, सड़कों के चौड़ीकरण और अन्य विकास परियोजनाओं के लिए अधिकतर मामलों में सिंचित भूमि के अधिग्रहण को लेकर ही विवाद सामने आते है. उज्जैन लैंड पुलिंग मामले में सरकार अब आपसी सहमति से मुआवजा बढ़ाने पर काम कर रही है, ताकि भविष्य में भू-अर्जन को लेकर किसानों और सरकार के बीच किसी भी तरह का कोई टकराव न हो.
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