देश

संसद से लेकर क्रिकेट के मैदान तक… न्यूजीलैंड में मुट्ठी भर भारतीयों ने कैसे गाड़े कामयाबी के झंडे

Indian Diaspora In New Zealand: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी तीन देशों की यात्रा के आखिरी पड़ाव पर न्यूजीलैंड पहुंचे हैं. पिछले 40 सालों में भारत के किसी प्रधानमंत्री का ये पहला दौरा है. इसके पहले 1986 में राजीव गांधी बतौर प्रधानमंत्री न्यूजीलैंड के आधिकारिक दौरे पर गए थे. दिलचस्प बात ये है कि न्यूजीलैंड की 54 लाख की कुल आबादी में केवल 5-6 प्रतिशत होने के बावजूद वहां भारतीयों का डंका बजता है.

कैसे बनी भारतीयों की साख

दरअसल, न्यूजीलैंड में रहने वाले ज्यादातर भारतीय आईटी, इंजीनियरिंग, फाइनेंस, मैनेजमेंट और हेल्थकेयर जैसे प्रोफेशनल सेक्टर्स में ऊंचे पदों पर हैं. भारतीय परिवारों में पढ़ाई-लिखाई को पहली प्राथमिकता दी जाती है, यही वजह है कि वहां के विश्वविद्यालयों और टेक कंपनियों में भारतीय युवा लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं.

इतना ही नहीं, वहां की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ ही भारतीय हैं. देश के बड़े अस्पतालों से लेकर दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों के क्लीनिकों और ओल्ड एज होम्स में भारतीय डॉक्टर, नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ अपनी सेवाएं दे रहे हैं. कोरोना महामारी के संकट के दौरान भी इन कोरोना वॉरियर्स ने जिस शिद्दत से काम किया, उसकी तारीफ आज भी वहां का स्थानीय समाज करता है.

देसी बिजनेस से न्यूजीलैंड इकनॉमी में रफ्तार

छोटे किराना स्टोर्स और रेस्टोरेंट्स से लेकर बड़े आयात-निर्यात, रियल एस्टेट और सॉफ्टवेयर स्टार्टअप्स तक, हर जगह भारतीय उद्यमियों का बोलबाला है. भारतीय रेस्टोरेंट्स ने न्यूजीलैंड के लोगों को समोसे, डोसा, बिरयानी और कड़क चाय का ऐसा चस्का लगाया है कि अब ये वहां की लाइफस्टाइल का हिस्सा बन चुके हैं.

इसके साथ ही, साइबर सिक्योरिटी, डेटा साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में भारतीय दिमाग का सिक्का चलता है.

संसद से लेकर क्रिकेट मैदान तक भारतीय गूंज

राजनीति की बात करें तो प्रियंका राधाकृष्णन और डॉ. परमजीत कौर जैसे चेहरों ने न्यूजीलैंड की संसद और सरकार में शामिल होकर प्रवासियों की आवाज को नीति-निर्धारण के मंच तक पहुंचाया है.

वहीं, न्यूजीलैंड की नेशनल टीम में रचिन रवींद्र, ईश सोढ़ी और आदित्य अशोक जैसे भारतीय मूल के खिलाड़ी आज वहां के खेल प्रेमियों के सबसे बड़े हीरो बने हुए हैं.

सांस्कृतिक तौर पर सामाजिक एकता की मिसाल

ऑकलैंड और वेलिंगटन जैसे बड़े शहरों में दिवाली, होली और गरबा के आयोजनों में सिर्फ भारतीय ही नहीं, बल्कि गोरे और माओरी समुदाय के लोग भी पारंपरिक कपड़ों में झूमते नजर आते हैं. गुरुद्वारों और मंदिरों के जरिए की जाने वाली लंगर और सामाजिक सेवा ने भी स्थानीय लोगों के दिलों में भारतीयों के लिए सम्मान बहुत बढ़ा दिया है.

इसलिए न्यूजीलैंड में भारतीयों का असर उनकी आबादी से नहीं, बल्कि उनकी अटूट मेहनत और समाज के प्रति उनके योगदान से मापा जाता है.

ये भी पढ़ें: कोर्ट मास्टर की बेटी, 14 करोड़ और 2 मौतें! 7 लाख में मां की सुपारी देने वाली आयुषी की कहानी में नया मोड़

-भारत एक्सप्रेस

Vaibhav Gupta

Recent Posts

बांग्लादेश में फिर सड़कों पर उतरे लोग, राजधानी ढाका समेत गाजीपुर में क्यों लगाई आग, क्या है वजह?

Bangladesh Protest: बांग्लादेश में गारमेंट कर्मचारियों का वेतन बढ़ाने को लेकर आंदोलन उग्र हो गया…

7 minutes ago

‘ज्ञानेश कुमार रात में सो नहीं पा रहे होंगे’, महारैली में राहुल गांधी का CEC पर हमला

INDIA Alliance Rally: रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की रैली में राहुल गांधी ने मुख्य…

51 minutes ago

‘मोहब्बत की दुकान में सिर्फ नफरत’, राहुल गांधी की ‘मॉक पार्लियामेंट’ पर बरसे अमित शाह

चंडीगढ़ पहुंचे गृह मंत्री अमित शाह ने राहुल गांधी की 'मॉक पार्लियामेंट' पर तंज कसते…

1 hour ago

रामलीला मैदान में विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन: अखिलेश बोले- ‘1.27 करोड़ वोट काटकर हार छुपाना चाहती है बीजेपी’

दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA ब्लॉक की महारैली में अखिलेश यादव ने बीजेपी पर…

1 hour ago

INDIA गठबंधन की महारैली से गरमाई सियासत: राहुल गांधी का आरोप- कनॉट प्लेस में जबरन बंद कराई गईं दुकानें

INDIA Alliance Rally: INDIA गठबंधन की महारैली के बीच राहुल गांधी ने बीजेपी पर कनॉट…

1 hour ago

उमर अब्दुल्ला-निधि राजदान की शादी से फिर उठा सवाल, अमीर-गरीब के लिए अलग क्यों है समाज का नजरिया?

Omar Abdullah Nidhi Razdan Marriage: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने वरिष्ठ पत्रकार निधि राजदान…

2 hours ago