Trump Syria Energy Corridor: इस हफ्ते तुर्की में नाटो समिट के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल-शरा से मुलाकात की. ट्रंप का मूड अच्छा नहीं था क्योंकि कुछ ही घंटे पहले ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल जहाजों पर गोलीबारी की थी. इस घटना से तेल और गैस की सप्लाई पर संकट खड़ा हो गया और ट्रंप ने ईरानियों को नीच तक कह दिया.
सीरिया को मिला बड़ा तोहफा
ट्रंप ने सीरिया को कूटनीतिक तोहफा देते हुए उसे आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देशों की लिस्ट से बाहर कर दिया. इससे अमेरिकी कंपनियों के लिए वहां निवेश का रास्ता खुल गया. तेल, गैस, बिजली और बैंकिंग सेक्टर में निवेश के लिए अमेरिकी सरकार ने गाइडलाइन भी जारी की है. ट्रंप ने साफ कहा कि अमेरिकी कंपनियां सीरिया को समृद्ध बनाने के लिए तैयार हैं.
होर्मुज को बायपास करने की योजना
सीरिया की भौगोलिक स्थिति बेहद खास है. भूमध्य सागर के तट और मिडिल ईस्ट के तेल समृद्ध देशों से जुड़ाव इसे रणनीतिक बनाता है. रिपोर्टों के मुताबिक अगर खाड़ी देशों का तेल पाइपलाइन से सीरिया के बंदरगाहों तक पहुंचाया जाए तो जहाज सीधे यूरोप जा सकते हैं. इससे होर्मुज स्ट्रेट की अहमियत घट जाएगी और ईरान की ताकत कमजोर होगी.
तेल का नया हब बनने की संभावना
सीरिया के पास करीब 2.5 बिलियन बैरल का प्रमाणित तेल भंडार है. कुछ अनुमानों के अनुसार तटीय इलाकों को मिलाकर यह 27 बिलियन बैरल तक हो सकता है. युद्ध से पहले इराक रोजाना लाखों बैरल तेल जहाजों से भेजता था, अब वह ट्रकों से सीरिया के रास्ते तेल ले जा रहा है. अमेरिकी और सऊदी कंपनियां भी यहां निवेश में दिलचस्पी दिखा रही हैं. फरवरी में अमेरिकी कंपनी शेवरॉन ने सीरिया की सरकारी कंपनी के साथ ऑफशोर तेल और गैस क्षेत्र विकसित करने का समझौता किया.
चुनौतियां भी कम नहीं
सीरिया में आतंकवाद का खतरा अभी भी बना हुआ है. हाल ही में उत्तरी सीरिया में ईंधन टैंकर पर हमला हुआ और दमिश्क में धमाके हुए. बैंकिंग सिस्टम दशकों के प्रतिबंधों से कमजोर है, जिससे अंतरराष्ट्रीय लेन-देन मुश्किल है. रूस की मौजूदगी भी बड़ी चुनौती है क्योंकि उसका सैन्य और व्यावसायिक दबदबा सीरिया में मजबूत है.
खाड़ी देशों की चिंता
खाड़ी देश शायद ही चाहेंगे कि सीरिया उनके तेल सप्लाई पर इतना नियंत्रण पाए. तेल उनकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. इसके अलावा सीरिया की सीमाएं इजराइल से जुड़ी हैं और तुर्की-इजराइल तथा इजराइल-ईरान के बीच तनाव पहले से ही मौजूद है. ऐसे में दुनिया को तय करना होगा कि सीरिया व्यापार के लिए सुरक्षित रास्ता बन पाएगा या नहीं.
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-भारत एक्सप्रेस
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