सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के बावजूद देश के अलग-अलग हाईकोर्ट में जजों और चीफ जस्टिस की नियुक्ति नहीं किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट में 20 सितंबर को सुनवाई करेगा. हालांकि अटॉर्नी जनरल ने सीजेआई के समक्ष मेंशन कर सुनवाई को टालने की मांग की, लेकिन कोर्ट ने सुनवाई को टालने से इनकार कर दिया है. वही इस मामले को लेकर हाल ही में अटॉर्नी जनरल आर. वैंकटरमणी ने अपना जवाब दाखिल किया था. जिसके बाद कॉलेजियम ने जुलाई में की गई अपनी सिफारिशों पर पुनर्विचार किया है.
11 जुलाई को 7 हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की नियुक्ति के लिए केंद्र सरकार को सिफारिश भेजी थी. अब कॉलेजियम ने तीन बदलाव किए हैं. सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस बीआर गवई की सदस्यता वाली कॉलेजियम ने पहले के नामों पर फिर से विचार किया. कॉलेजियम ने पहले जस्टिस सुरेश कुमार कैथ जो जम्मू कश्मीर एंड लद्दाख हाई कोर्ट, जस्टिस जी एस संधवालिया को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट और जस्टिस ताशी रबस्तान को मेघायल हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की थी.
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कोर्ट अधिवक्ता हर्ष विभोर सिंघल की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा है. जिसमें केंद्र की तरफ से सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की ओर से अनुशंसित न्यायाधीशों की नियुक्तियों को अधिसूचित करने के लिए एक निश्चित समय सीमा की मांग की गई है. अटॉर्नी जनरल ने अदालत में कहा कि इन मुद्दों को सार्वजनिक करना न तो संस्थान के हित में होगा और न ही इसमें शामिल न्यायाधीशों के हित में. उन्होंने कहा कि मुझे कुछ जानकारी मिली है, जो गोपनीय और संवेदनशील है, और मैं इसे रिकॉर्ड में रखना चाहूंगा.
-भारत एक्सप्रेस
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