मोदी सरकार के 11 साल.
11 Years of Modi Government: भारतीय महिलाओं को पीढ़ियों से व्यवस्थागत बाधाओं का सामना करना पड़ा है – खासकर ग्रामीण और हाशिए के समुदायों में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, रोजगार और निर्णय लेने के सीमित अधिकार रहे हैं. लेकिन 2014 से, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, एक ऐतिहासिक बदलाव हुआ है. महिलाओं को अब निष्क्रिय लाभार्थियों के रूप में नहीं बल्कि भारत की विकास कहानी के केंद्र में बदलाव के सशक्त एजेंट के रूप में देखा जाता है.
एक साहसिक, समावेशी और जीवनचक्र-आधारित दृष्टिकोण से प्रेरित होकर, सरकार ने स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास, डिजिटल पहुँच, स्वच्छता और वित्तीय समावेशन में लक्षित हस्तक्षेप शुरू किए हैं. “नारी शक्ति” अब एक राष्ट्रीय मिशन है, जो हर महिला को – शहरी या ग्रामीण, युवा या बुजुर्ग – सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के साथ जीने के लिए सशक्त बनाता है.
आज, महिलाएं स्वयं सहायता समूहों का नेतृत्व कर रही हैं, व्यवसाय शुरू कर रही हैं, विज्ञान, रक्षा और खेल में बाधाओं को तोड़ रही हैं और देश के भविष्य को आकार दे रही हैं. भारत की आबादी में महिलाओं और बच्चों की हिस्सेदारी करीब 67.7% है, इसलिए उनका सशक्तिकरण (Women Empowerment) सिर्फ़ सामाजिक सुधार नहीं है – यह एक रणनीतिक अनिवार्यता है. जैसे-जैसे भारत अमृत काल में प्रवेश कर रहा है, नारी शक्ति एक अजेय शक्ति के रूप में खड़ी है जो एक मजबूत, अधिक समावेशी राष्ट्र को आगे बढ़ा रही है.
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment) भारत के विकास के लिए महत्वपूर्ण है. महिलाओं को ‘गृहिणी’ के रूप में देखने के दिन लद गए, हमें महिलाओं को राष्ट्र निर्माता के रूप में देखना होगा!”
सशक्तिकरण कोई एकाकी घटना न होकर एक यात्रा है. मोदी सरकार की नीतियां जीवन के हर चरण में महिलाओं का समर्थन करने के लिए बनाए गए कार्यक्रमों के माध्यम से इस वास्तविकता को दर्शाती हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बार-बार दोहराया है कि एक राष्ट्र तभी प्रगति कर सकता है जब उसकी महिलाएं समान रूप से सशक्त (Women Empowerment) हों. पिछले 11 वर्षों में, भारत सरकार ने सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और कानूनी क्षेत्रों में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए एक व्यापक, जीवनकाल-आधारित नीतिगत ढांचा अपनाया है. संवैधानिक सुरक्षा उपायों और हिंसा एवं भेदभाव के खिलाफ ऐतिहासिक कानूनों से लेकर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, मिशन शक्ति जैसी परिवर्तनकारी योजनाओं और ऐतिहासिक नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसे आंदोलनों तक, महिलाओं के विकास से महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास पर ध्यान केंद्रित किया गया है.
शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है – विशेष रूप से एसटीईएम- कौशल, स्व-सहायता समूहों के माध्यम से उद्यमिता और सार्वजनिक सेवा. कानूनी सुधार और श्रम संहिता, सुरक्षित और समावेशी कार्यस्थलों को बढ़ावा देती है, जबकि पीएम आवास योजना, डीएवाई- एनआरएलएम और कृषि सहायता पहल जैसी योजनाओं ने महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाया है. जमीनी स्तर के शासन से लेकर रक्षा बलों और विमानन तक, महिलाएं अब सभी क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं तथा समावेशी और टिकाऊ राष्ट्रीय विकास को बढ़ावा दे रही हैं.
मिशन पोषण के द्वारा भारत की कुपोषण के खिलाफ लड़ाई ने एक साहसिक, एकीकृत छलांग लगाई है – एक परिवर्तनकारी पहल जो पोषण, स्वास्थ्य और समुदाय को एक साथ जोड़कर एक स्वस्थ भविष्य का निर्माण करती है. एक एकीकृत पोषण सहायता कार्यक्रम के रूप में डिजाइन किया गया, मिशन पोषण, पोषण सेवाओं की सामग्री और वितरण दोनों को नया रूप देकर सबसे कमजोर लोगों – बच्चों, किशोरियों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को लक्षित करता है.
1.81 लाख करोड़ रुपए से अधिक के दूरदर्शी निवेश के साथ, पोषण 2.0 को 15वें वित्त आयोग के दौरान (2021-22 से 2025-26) बेहतर प्रथाओं, मजबूत प्रतिरक्षा और समग्र कल्याण के माध्यम से स्वास्थ्य की संस्कृति बनाने के लिए शुरू किया जा रहा है. यह विभिन्न क्षेत्रों के प्रयासों को एकजुट करता है, एक अभिसरण पारिस्थितिकी तंत्र बनाता है जो पोषण को राष्ट्रीय विकास के साझा मिशन में बदल देता है. इस आंदोलन के केंद्र में 2018 में शुरू किया गया पोषण अभियान है – एक ऐसा प्रमुख कार्यक्रम जो अत्याधुनिक डिजिटल उपकरणों को जमीनी स्तर की कार्रवाई के साथ जोड़ता है. पोषण संकेतकों की वास्तविक समय की ट्रैकिंग से लेकर समुदाय द्वारा संचालित अभियानों तक, इसने भोजन, स्वास्थ्य और स्वच्छता के बारे में व्यवहारिक बदलाव को प्रेरित किया है. यह मिशन केवल लोगों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए नहीं है – एक स्वस्थ, सशक्त भारत को बढ़ावा देने के लिए है.
सरकार ने मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के तहत 15वें वित्त आयोग (प्रति वर्ष 40,000 आंगनवाड़ी केंद्रों की दर से) के दौरान देश भर में 2 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों (एडब्ल्यूसी) को अपग्रेड करने का लक्ष्य रखा है. इन अपग्रेड किए गए केंद्रों का उद्देश्य छह साल से कम उम्र के बच्चों के समग्र विकास में सहायता करते हुए बेहतर पोषण और प्रारंभिक बचपन देखभाल और शिक्षा (ईसीसीई) प्रदान करना है.
● वित्त वर्ष 2024-25 में 2 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों के उन्नयन के लिए पूर्ण स्वीकृति दी गई.
● अब तक 24,533 आंगनवाड़ी केंद्रों को सक्षम आंगनवाड़ी में बदल दिया गया है.
प्रारंभिक शिक्षा को पोषण के साथ एकीकृत करने के लिए शुरू की गई यह पहल गुणवत्तापूर्ण प्री-स्कूल शिक्षा प्रदान करने के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की क्षमता निर्माण पर केंद्रित है.
31 मार्च 2025 तक, 36,463 राज्य-स्तरीय मास्टर ट्रेनर (एसएलएमटी) और 4,65,719 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को देश भर में प्रशिक्षित किया जा चुका है.
पोषण ट्रैकर एप्लिकेशन को सिविल सेवा दिवस पर लोक प्रशासन में उत्कृष्टता के लिए प्रधानमंत्री पुरस्कार 2024 (नवाचार श्रेणी – केंद्र) मिला.
● सितंबर 2024 में 27वें राष्ट्रीय सम्मेलन में ई-गवर्नेंस (स्वर्ण) के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार जीता.
● 99.02% लाभार्थी अब आधार-सत्यापित हैं (मार्च 2025 तक).
● टेक-होम राशन (टीएचआर) के लिए एक फेस ऑथेंटिकेशन मॉड्यूल पेश किया गया है, जो दो-कारक प्रमाणीकरण प्रणाली के माध्यम से पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करता है.
प्रधानमंत्री द्वारा 26 दिसंबर 2024 को शुरू किया गया यह अभियान पोषण और स्वास्थ्य परिणामों में सुधार के लिए असाधारण जमीनी स्तर पर काम करने वाली शीर्ष 1000 ग्राम पंचायतों की पहचान कर उन्हें पुरस्कृत करता है. ये “सुपोषित ग्राम पंचायतें” बाल और मातृ पोषण में समुदाय के नेतृत्व वाली प्रगति के मॉडल के रूप में काम करती हैं.
सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (यूआईपी) दुनिया के सबसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयासों में से एक है, जो सालाना लगभग 2.9 करोड़ गर्भवती महिलाओं तक पहुँचता है, माताओं और उनके नवजात शिशुओं दोनों को टीके से रोके जा सकने वाली बीमारियों से बचाता है.
जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (जेएसएसके) का विस्तार 2014 में किया गया था, जिसमें प्रसवपूर्व और प्रसवोत्तर सभी जटिलताओं की देखभाल शामिल है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि माताओं और नवजात शिशुओं को आवश्यक सेवाएँ मिलें, खासकर प्रसव के बाद के महत्वपूर्ण पहले 48 घंटों के भीतर. 2014-15 से, इस कार्यक्रम ने 16.60 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को लाभान्वित किया है, जिससे परिवारों के लिए जेब से होने वाले खर्च में उल्लेखनीय कमी आई है.
जेएसएसके के पूरक के रूप में, जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) ने भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाला है, जिससे मार्च 2025 तक 11.07 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को सहायता मिलेगी. यह सशर्त नकद हस्तांतरण योजना गरीब गर्भवती महिलाओं, विशेष रूप से ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों में संस्थागत प्रसव को प्रोत्साहित करती है.
मातृ और नवजात शिशु देखभाल को और मजबूत करते हुए, सुरक्षित मातृत्व आश्वासन (एसयूएमएएन) पहल गर्भवती महिलाओं, बीमार नवजात शिशुओं और प्रसव के छह महीने बाद तक माताओं के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक शून्य-लागत पहुँच सुनिश्चित करती है. इस पहल के माध्यम से, लाभार्थियों को प्रमाणित सुविधाओं में प्रशिक्षित पेशेवरों से सम्मानजनक देखभाल मिलती है. मार्च 2025 तक, देश भर में 90,015 एसयूएमएएन स्वास्थ्य सुविधाएँ अधिसूचित की गई हैं.
इसने पहली तिमाही के दौरान चार व्यापक प्रसवपूर्व जांच की पेशकश करके मातृ स्वास्थ्य सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है ताकि उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था का समय पर पता लगाया जा सके.
इस योजना का उद्देश्य संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना और मातृ स्वास्थ्य सुनिश्चित करना है, यह योजना गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को 5,000 रुपये का सीधा नकद लाभ प्रदान करती है. इसने गर्भावस्था के दौरान बेहतर पोषण और स्वास्थ्य निगरानी सुनिश्चित की है.
सच्चा सशक्तिकरण गरिमा से शुरू होता है – एक सुरक्षित घर, स्वच्छ ईंधन, निजी शौचालय और घर के दरवाजे पर पानी. मोदी सरकार ने महिलाओं को भारत की विकास यात्रा के केंद्र में रखा है, जिससे रोजमर्रा के संघर्षों को स्वास्थ्य, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के अवसरों में बदला जा रहा है. आवास से लेकर स्वच्छता तक, प्रत्येक पहल ने जीवन को ऊपर उठाया है और ग्रामीण भारत में नारी शक्ति की नींव को मजबूत किया है.
2016 में शुरू की गई, प्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) ने सपनों को पक्के घरों में बदल दिया. लगभग 2.75 करोड़ पीएम आवास-ग्रामीण लाभार्थियों में से 73 प्रतिशत महिलाएं हैं. घर का मालिक होने से महिलाओं को न केवल आश्रय मिला है – बल्कि उन्हें सम्मान, सुरक्षा और निर्णय लेने की क्षमता भी दी है.
2016 में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूआई) के शुभारंभ के साथ, 10.33 करोड़ एलपीजी कनेक्शन वितरित किए गए हैं, जिससे महिलाओं को खतरनाक धुएं से मुक्ति मिली है. अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने इसे स्वास्थ्य और पर्यावरण सुधार में एक मील का पत्थर और लैंगिक असमानता को पाटने में एक महत्वपूर्ण कदम बताया.
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2014 से पहले, केवल 39% भारतीय घरों में शौचालय की सुविधा थी. महिलाओं और लड़कियों को स्वास्थ्य, उत्पीड़न और अपमान के जोखिम में डालकर इस अपमान का खामियाजा भुगतना पड़ता था. 2014 में शुरू किए गए स्वच्छ भारत मिशन ने इस कहानी को बदल दिया. एसबीएम-ग्रामीण के तहत 12 करोड़ से अधिक शौचालय बनाए गए हैं, जिससे महिलाओं में सुरक्षा और आत्म-सम्मान की गहरी भावना आई है. एक अध्ययन से पता चला है कि शौचालय निर्माण के बाद: 93 प्रतिशत महिलाओं को अब नुकसान या संक्रमण का डर नहीं रहा, 92 प्रतिशत रात में सुरक्षित महसूस करती हैं, और 93 प्रतिशत केवल शौच को नियंत्रित करने के लिए भोजन और पानी का सेवन सीमित करना बंद कर चुकी हैं.
अक्सर लंबी दूरी से पानी लाना ग्रामीण महिलाओं के लिए एक दैनिक बोझ था. 2019 में शुरू किए गए जल जीवन मिशन (जेजेएम) ने इस कठिन परिश्रम को समाप्त करने का प्रयास किया. 15.6 करोड़ से अधिक नल जल कनेक्शन ग्रामीण जीवन में बदलाव ला रहे हैं, जो 2019 में मात्र 3.23 करोड़ से एक आश्चर्यजनक छलांग है. जेजेएम ने महिलाओं को न केवल उनका समय बचाकर, बल्कि उन्हें जल आपूर्ति की योजना, निष्पादन और निगरानी में शामिल करके सशक्त बनाया है – जिससे वे अपने समुदाय के भविष्य में सच्ची हितधारक बन गई हैं.
सरकारी स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग से 9,79,610 शौचालय बनाए गए हैं. 2.99 लाख करोड़ नेट डिपॉजिट के साथ 4.2 करोड़ सुकन्या खाते खोले गए हैं. देश में एसटीईएम ग्रेजुएट में लगभग 50 प्रतिशत महिलाएं हैं – जो वैश्विक स्तर पर सर्वाधिक है. चंद्रयान-3 मिशन में 100 से भी ज्यादा महिलाओं ने अपना योगदान दिया है.
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (एचएमआईएस) के आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर जन्म के समय लिंगानुपात (एसआरबी) 918 (2014-15) से बढ़कर 930 (2023-24) हो गया है. शिक्षा मंत्रालय के यूडीआईएसई आंकड़ों के अनुसार, माध्यमिक तक के स्कूलों में लड़कियों का नामांकन (2014-15) में 75.51% से बढ़कर 2023-24 में 78% हो गया है.
22 जनवरी 2015 को शुरू की गई सुकन्या समृद्धि योजना (एसएसवाई) ने वित्तीय सुरक्षा के माध्यम से बालिकाओं को सशक्त बनाने का एक दशक पूरा कर लिया है. नवंबर 2024 तक, पूरे भारत में 4.1 करोड़ से अधिक खाते खोले जा चुके हैं, जो इस योजना में व्यापक सार्वजनिक भागीदारी और विश्वास को दर्शाता है. जनवरी 2025 में अपने 10 साल पूरे करने के अवसर पर, एसएसवाई परिवारों को अपनी बेटियों के भविष्य में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करना जारी रखता है – वित्तीय समावेशन, लैंगिक समानता और दीर्घकालिक सामाजिक प्रगति को बढ़ावा देता है.
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment) की यात्रा मजबूत सामाजिक कल्याण पर आधारित रही है और अब यह नेतृत्व और एजेंसी के आंदोलन में विकसित हो गई है. कल्याण से लेकर नेतृत्व तक, भारतीय महिलाएं अब राष्ट्र के भाग्य को आकार दे रही हैं. प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में, महिलाओं को निष्क्रिय लाभार्थियों के रूप में देखने से लेकर उन्हें बदलाव के सक्रिय एजेंट के रूप में पहचानने तक की कहानी बदल गई है.
आज, महिलाएं पुलिस सेवाओं और सशस्त्र बलों के सभी विंगों में गर्व से वर्दी पहनती हैं, स्थायी कमीशन अब एक वास्तविकता है. सैनिक स्कूलों और राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में लड़कियों के प्रवेश जैसे ऐतिहासिक मील के पत्थर अवसर और समावेश के एक नए युग का प्रतीक हैं. 29 मई, 2025 को राष्ट्रीय रक्षा अकादमी से महिला कैडेटों का पहला बैच स्नातक हुआ.
विज्ञान और अंतरिक्ष के क्षेत्र में, भारतीय महिलाएं सचमुच सितारों तक पहुंच रही हैं. उन्होंने चंद्रयान-3 की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो भारत की वैज्ञानिक उत्कृष्टता और लैंगिक समावेशिता का प्रतीक है. विश्व में सबसे अधिक महिला पायलट आज देश में हैं तथा एसटीईएम (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) में स्नातक करने वाली महिलाओं के अनुपात में यह विश्व स्तर पर अग्रणी है, जो एक आत्मविश्वासी, सक्षम और महत्वाकांक्षी नारी शक्ति के उदय को दर्शाता है.
इस परिवर्तन को संस्थागत रूप देते हुए, ऐतिहासिक नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण के लिए एक संवैधानिक छलांग है. लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित करके – अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए समर्पित प्रतिनिधित्व के साथ – यह अधिनियम शासन में उनके उचित स्थान को सुनिश्चित करता है. यह दिखावटीपन से परे है, यह महिला नेताओं की एक पीढ़ी की नींव रखता है जो भारत की भविष्य की नीतियों और प्रगति को आकार देंगी.
प्रधानमंत्री मोदी के दृष्टिकोण में महिलाओं का बढ़ता भरोसा सार्थक सुधारों में निहित है जो उनके रोजमर्रा के जीवन को प्रभावित करते हैं.
● ट्रिपल तलाक के उन्मूलन ने मुस्लिम महिलाओं को वह सम्मान और कानूनी सुरक्षा प्रदान की गई है जिसकी वे लंबे समय से हकदार थीं.
● प्रस्तावित विवाह योग्य आयु 18 से बढ़ाकर 21 करने से युवा महिलाओं को विवाह से पहले शिक्षा और रोजगार प्राप्त करने का अधिकार मिलेगा.
● मातृत्व अवकाश को दोगुना करके 26 सप्ताह करने से भारत कामकाजी माताओं का समर्थन करने वाले सबसे प्रगतिशील देशों में शामिल हो गया है.
● और अतीत के अन्याय का एक ऐतिहासिक सुधार- अनुच्छेद 35A को खत्म करने के साथ, जम्मू और कश्मीर में महिलाओं को अब समान संपत्ति और कानूनी अधिकार प्राप्त हैं.
भारत में महिलाओं को सही अवसर मिलने पर बदलाव आने की अपार संभावनाएं हैं . जैसे-जैसे देश विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है, महिलाओं की महत्वाकांक्षाएं और अपेक्षाएं भी बढ़ रही हैं. इस शक्तिशाली बदलाव को पहचानते हुए, भारत सरकार ने महत्वाकांक्षी महिला उद्यमियों का समर्थन करने और संस्थागत ऋण तक पहुँचने में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए प्रमुख पहल शुरू की हैं. दो प्रमुख योजनाओं-प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) और स्टैंड-अप इंडिया- ने इस परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
यह योजना चार ऋण उत्पादों में 20 लाख रुपये तक का ऋण प्रदान करती है. मार्च 2025 तक, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) के शुभारंभ के बाद से, 52.77 करोड़ से अधिक ऋण खाते खोले गए हैं, जिनमें स्वीकृत राशि 34.11 लाख करोड़ रुपये और वितरित राशि 33.33 लाख करोड़ रुपये है. उल्लेखनीय रूप से, इनमें से लगभग 68% ऋण महिला उद्यमियों को दिए गए, जो महिलाओं के नेतृत्व वाले व्यवसायों को बढ़ावा देने में योजना की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है.
5 अप्रैल 2016 को शुरू की गई स्टैंड-अप इंडिया योजना ग्रीनफील्ड उद्यम स्थापित करने के लिए प्रत्येक बैंक शाखा से कम से कम एक एससी/एसटी और एक महिला उधारकर्ता को 10 लाख रुपये से 1 करोड़ रुपये के बीच बैंक ऋण की सुविधा प्रदान करती है. इस योजना को 2019-20 में 15वें वित्त आयोग की अवधि 2020 से 2025 तक कवर करने के लिए बढ़ाया गया था. मार्च 2025 तक, इस योजना के तहत 2.73 लाख से अधिक खाते स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 2,04,058 ऋण, यानी लगभग 83% महिलाओं को स्वीकृत किए गए हैं, जिनकी राशि ₹47,704 करोड़ से अधिक है.
इस योजना का उद्देश्य आत्मनिर्भरता, कौशल विकास और स्थायी आजीविका को बढ़ावा देकर ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाना है. इसके तहत, 10.05 करोड़ से अधिक महिलाओं को 90.90 लाख स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) में संगठित किया गया है. इस सशक्तिकरण को एक कदम आगे बढ़ाते हुए, लखपति दीदी पहल एक गेम-चेंजर के रूप में उभरी है. मार्च 2025 तक, इसने 1.48 करोड़ एसएचजी सदस्यों को विविध और स्थायी आजीविका गतिविधियों के माध्यम से 1 लाख रुपये की न्यूनतम वार्षिक आय अर्जित करने में सक्षम बनाया है.
बचाव और सुरक्षा
देश में 819 वन स्टॉप सेंटर्स काम कर रहे हैं. 35 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में डब्ल्यूएचएल का ईआरएसएस के साथ एकीकरण 112 पूरा हो चुका है.
नारी अदालत पहल असम राज्य और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर में 50-50 ग्राम पंचायतों में चलाई जा रही है.
पिछले 11 वर्षों में शक्ति सदन के कार्यान्वयन से 2,92,681 महिलाओं को लाभ मिला है.
पिछले 11 वर्षों में ‘सखी निवास’ के कार्यान्वयन से 5,07,577 महिलाओं को लाभ मिला है.
मिशन मोड में शुरू की गई, मिशन शक्ति भारत सरकार द्वारा जीवन के सभी चरणों में महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षा और सशक्तिकरण (Women Empowerment) सुनिश्चित करने के लिए एक प्रमुख पहल है. टुकड़ों में किए जाने वाले उपायों से आगे बढ़ते हुए, यह राष्ट्र निर्माण प्रक्रिया में महिलाओं को समान हितधारकों में बदलने के लिए जीवन-काल आधारित रणनीति अपनाता है. यह योजनाओं में अभिसरण को भी बढ़ावा देता है और विशेष रूप से जमीनी स्तर की पहलों के माध्यम से सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करता है.
संबल – महिलाओं की सुरक्षा और संरक्षा पर ध्यान केंद्रित करता है, जिसमें निम्न उन्नत योजनाएं शामिल हैं:
वन स्टॉप सेंटर (ओएससी ): निजी या सार्वजनिक स्थानों पर हिंसा का सामना करने वाली महिलाओं का समर्थन करने के लिए डिज़ाइन किए गए ओएससी, में अब प्रति केंद्र 4.5 लाख रुपये के वार्षिक अनुदान के साथ एक समर्पित आपातकालीन बचाव वाहन का प्रावधान शामिल है. मिशन शक्ति डैशबोर्ड में एक नया डिजिटल फीचर, “ओएससी पर अपॉइंटमेंट बुक करें” जोड़ा गया है, जिससे परेशान महिलाएं समय पर सहायता के लिए ऑनलाइन अपॉइंटमेंट शेड्यूल कर सकती हैं.
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28 फरवरी 2025 तक, 908 ओएससी स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 819 चालू हैं, जो 1 अप्रैल 2015 को अपनी स्थापना के बाद से 10.98 लाख से अधिक महिलाओं की सहायता कर रहे हैं.
महिला हेल्पलाइन (डब्ल्यूएचएल): 35 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों (पश्चिम बंगाल को छोड़कर) में ईआरएसएस 112 के साथ पूरी तरह से एकीकृत है. यह 33 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में चाइल्ड हेल्पलाइन और 536 ओएससी के साथ भी एकीकृत है.
स्थापना के बाद से, 214.78 लाख कॉल प्राप्त हुए हैं और देश भर में 85.32 लाख महिलाओं की सहायता की गई है.
शी-बॉक्स पोर्टल: 29 अगस्त 2024 को लॉन्च किया गया, यह यौन उत्पीड़न इलेक्ट्रॉनिक बॉक्स एसएच अधिनियम, 2013 के तहत एक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म है, जो महिलाओं को कार्यस्थल पर उत्पीड़न की रिपोर्ट करने और निवारण की मांग करने के लिए एक उपयोगकर्ता के अनुकूल तंत्र प्रदान करता है.
नारी अदालत: समुदाय आधारित महिला-नेतृत्व वाली न्याय व्यवस्था को बढ़ावा देने वाली एक जमीनी पहल, जो वर्तमान में असम और जम्मू-कश्मीर में 50-50 ग्राम पंचायतों में संचालित है. जल्द ही बिहार, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश में 10-10 ग्राम पंचायतों और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 5 ग्राम पंचायतों में इसका विस्तार किया जाएगा.
सामर्थ्य – शिक्षा, कौशल विकास और संस्थागत सहायता के माध्यम से सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता पर ध्यान केंद्रित करता है:
शक्ति सदन (पूर्व में स्वाधार गृह और उज्ज्वला गृह): 2014-15 से 31 दिसंबर 2024 तक, 2.92 लाख से अधिक महिलाओं को लाभ हुआ है, इसके कार्यान्वयन के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को 630.43 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं.
सखी निवास (पूर्व में कामकाजी महिला छात्रावास): इसी अवधि में, इस योजना के तहत 5.07 लाख महिलाओं को सहायता प्रदान की गई है, जिसमें राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को 196.05 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं.
केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी द्वारा 25 नवंबर 2024 को शुरू किया गया, लिंग आधारित हिंसा के खिलाफ यह राष्ट्रीय अभियान महिला एवं बाल विकास और ग्रामीण विकास मंत्रालयों द्वारा संयुक्त राष्ट्र महिला के समर्थन से एक संयुक्त पहल है.
पिछले 11 वर्षों में, मोदी सरकार की महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment) के प्रति अटूट प्रतिबद्धता ने सामाजिक कल्याण को सुरक्षा जाल से बदलकर नेतृत्व, सम्मान और अवसर के लिए एक स्प्रिंगबोर्ड में बदल दिया है. पिछले दशक में, भारत ने एक ऐसे भविष्य की नींव रखी है जहाँ महिलाएँ अब केवल भागीदार नहीं हैं – वे नेता, नवोन्मेषक, रक्षक और उद्यमी हैं. अंतरिक्ष मिशन से लेकर जमीनी स्तर के शासन तक, रसोई से लेकर बोर्डरूम तक, नारी शक्ति आगे बढ़ रही है – पहले से कहीं ज़्यादा मज़बूत, स्वतंत्र और दृढ़ निश्चयी. कल्याण से नेतृत्व तक की यात्रा अच्छी तरह से चल रही है. और भारत की कहानी का अगला अध्याय निस्संदेह इसकी सशक्त महिलाओं द्वारा लिखा जाएगा.
-भारत एक्सप्रेस
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