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कलकत्ता HC का ममता सरकार को झटका: स्पीकर के फैसले पर रोक से इनकार, ऋतब्रत बनर्जी की कुर्सी सुरक्षित

Calcutta High Court Order: कलकत्ता हाईकोर्ट से पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को झटका लगा है. कोर्ट ने बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता बनाए जाने के स्पीकर के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि अभी मामले में कई अंतरिम आदेश नहीं दिया जा सकता.

याचिका पर कोर्ट का बड़ा सवाल

दायर याचिका पर सवाल उठाते हुए हाई कोर्ट ने पूछा था कि यदि किसी एक राजनीतिक दल की ओर से नेता प्रतिपक्ष के लिए दो अलग-अलग प्रस्ताव विधानसभा अध्यक्ष को प्राप्त होता है, ऐसी स्थिति में उन्हें किस प्रक्रिया का पालन करना चाहिए. टीएमसी के तरफ से दो नाम विधानसभा अध्यक्ष को मिले, एक नाम पार्टी के बागी विधायकों ने भेजा, जबकि दूसरा नाम पार्टी नेतृत्व की तरफ से भेजा गया. जिसपर कोर्ट ने यह सवाल किया है.

कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

कोर्ट ने यह सवाल शोभनदेव चट्टोपाध्याय की ओर से दायर याचिका पर पूछा था. बागी विधायक रिताब्रत बनर्जी को विपक्ष के नेता नियुक्त करने के स्पीकर में फैसले को चुनौती दी गई थी. जिसपर सुनवाई के बाद 17 जून को कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था. हाई कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष रथीन्दर बोस से कई सवाल पूछा था कि क्या अध्यक्ष बहुमत वाले दल के प्रस्ताव को नजरअंदाज कर सकते हैं और क्या वह दोनों पक्षों को सुने बगैर नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति कर सकते है.

मामले की सुनवाई के दौरान कलकत्ता हाईकोर्ट ने जस्टिस कृष्णा राव ने यह भी पूछा था कि विधायक के सिग्नेचर जाली होने का आरोप क्या पार्टी के भेजे गए ओरिजनल प्रस्ताव को नजरअंदाज करने के लिए काफी था? ओरिजनल प्रस्ताव में विधायक शोभन देव चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष बनाने का प्रस्ताव भेजा गया था. लेकिन बाद में पार्टी से निष्कासित किए गए ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष बना दिया गया.

207 सीटे जीतकर सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा हासिल

कोर्ट ने स्पीकर की ओर से पेश वकील से पूछा कि सिर्फ एफआईआर के आरोप पर, क्या आप कह सकते हैं कि जालसाजी हुई हैं, जब तक कि इस पर सही ऑथोरिटी या सही कोर्ट फैसला न कर दे? क्या आपके स्पीकर ने इस बात पर गौर किया कि जालसाजी का आरोप और एफआईआर है तो दूसरी पार्टी को सुनने की कोई जरूरत नहीं है? 4 मई को हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 207 सीटे जीतकर सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा हासिल किया था.

जबकि टीएमसी को सिर्फ 80 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा था.

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-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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