CJI Surya Kant Cambridge Speech: कैंब्रिज में आयोजित 43वें ‘इंटरनेशनल सिम्पोजियम ऑन इकोनॉमिक क्राइम’ (International Symposium on Economic Crime) के समापन संबोधन में भारत की न्यायपालिका का बुलंद इकबाल गूंजा.दरअसल दरअसल कार्यक्रम में शामिल हुए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने पूरी दुनिया के सामने आर्थिक अपराधों से निपटने के लिए भारत के मजबूत कानूनी और संस्थागत ढांचे को सामने रखा.
उन्होंने साफ कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग और धोखाधड़ी कोई आधुनिक समस्या नहीं बल्कि सदियों पुराना नासूर है. केवल भाषणों और रिपोर्टों से काम नहीं चलेगा, अब विदेश में छिपे भगोड़ों की संपत्ति जब्त करने और ब्लैक मनी की पाई-पाई वसूलने के लिए वैश्विक स्तर पर हंटर चलाना होगा.
जस्टिस सूर्यकांत ने भारत की प्राचीन विरासत का जिक्र करते हुए कौटिल्य (चाणक्य) के ‘अर्थशास्त्र’ का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व में ही कौटिल्य ने सरकारी खजाने से धन की हेराफेरी के 40 अलग-अलग तरीकों का पर्दाफाश कर दिया था. कौटिल्य ने उस दौर में ही ऑडिट, गुप्तचरों/मुखबिरों, रिकॉर्ड्स के क्रॉस-वेरिफिकेशन और अफसरों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय करने जैसे सख्त नियम बनाए थे, जो आज भी प्रासंगिक हैं.
भारत के मौजूदा कानूनी तंत्र का खाका खींचते हुए उन्होंने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 और भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 को केंद्रीय हथियार बताया. उन्होंने कहा कि 100 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला करके देश से रफूचक्कर होने वाले भगोड़ों को विशेष अदालत द्वारा ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी’ घोषित किया जाता है, जिसके बाद भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में जमा उनकी संपत्तियों को भी ज़ब्त करने का पूरा अधिकार है.
संबोधन के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली और न्यायपालिका के संतुलन पर भी खरी-खरी बात रखी. उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना लिखित आधार के गिरफ्तारी या अनिश्चितकाल तक जेल में रखने (Pre-trial Custody) को सजा नहीं बनने दिया जाएगा. इसके लिए उन्होंने पंकज बंसल और केजरीवाल मामलों में आए सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि संविधान में व्यक्तिगत आजादी और प्रक्रिया की निष्पक्षता सबसे ऊपर है.
आजकल धड़ल्ले से चल रहे ‘डिजिटल अरेस्ट’ घोटालों पर चिंता जताते हुए उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने इस पर स्वतः संज्ञान लिया है. फर्जी पुलिस अफसर या जज बनकर वीडियो कॉल के जरिए लोगों को डराने और उगाही करने वाले इस नए किस्म के अपराध से निपटने के लिए एक अलग अपराध श्रेणी और सख्त सजा तय करने की सिफारिश की गई है. वहीं पीड़ितों की जल्द पाई-पाई वापस दिलाने के लिए IBC (Insolvency and Bankruptcy Code) को एक बेहतरीन सिविल रिकवरी हथियार बताया.
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भाषण के अंत में उन्होंने वैश्विक बिरादरी को साफ संदेश दिया कि अवैध धन किसी एक देश की सीमा में कैद नहीं रहता. भगोड़ों और मनी लॉन्ड्रिंग पर लगाम कसने के लिए देशों के बीच आपसी कानूनी सहायता संधि (MLAT, इंटेलिजेंस शेयरिंग और रियल ओनरशिप (Beneficial Ownership Registries) को उजागर करना ही एकमात्र रास्ता है. सतर्कता और कड़ा कानून ही आर्थिक अपराध का काल बनेगा.
-भारत एक्सप्रेस
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