लीगल

कोविड टीकों के दुष्प्रभाव को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

कोविडशील्ड वैक्सीन के कथित दुष्प्रभावों से जुड़े मामले में दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. यह याचिका दुष्प्रभावों के कारण मरने वाली लड़कियों के माता-पिता की ओर से दायर याचिका पर जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सभी पक्षों की जिरह के बाद फैसला सुरक्षित रखा हैं.

कोर्ट वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंजाल्विस और प्रशांत भूषण से कहा कि हम तय करेंगे कि इस मामले में समिति बनाया जाए या दिशा निर्देश जारी किया जाएगा. कोर्ट ने कहा कि हम हर चीज की विस्तार से जांच करेंगे. इससे पहले केंद्र सरकार ने इस मामले में हलफनामा दायर किया था. जिसमें कहा गया था कि उसे कोविड 19 टीकों के कारण होने वाली मौतों के लिए मुआवजा देने के लिए उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता.

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंजाल्विस ने कहा कि जब हमने 2021 में यह मामला शुरू किया था, तो उन दो माता-पिता के संबंध में था, जिन्होंने 18 साल के बच्चों को खो दिया था. इससे पहले फार्मा कंपनी एस्ट्राजेनेका के स्वीकार के बाद सुप्रीम कोर्ट के वकील विशाल तिवारी ने भी याचिका दायर की है. याचिका में रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाकर जांच की मांग की गई है. कमेटी में एम्स के एक्सपर्ट को शामिल करने की मांग की गई है.

याचिका में कहा गया है कि कोविडशील्ड वैक्सीन के दुष्प्रभावो और इसके जोखिम कारकों की जांच करने और वैक्सीन से हुए नुकसान का निर्धारण करने के लिए केंद्र को निर्देश जारी करने की मांग की गई है. याचिका में यह भी मांग की गई है कि जो लोग इस वैक्सीन को लगाने की वजह से अक्षम हो गए हैं या जिनकी मौत हो गई है उन्हें मुआवजा देने की मांग की गई है.

एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन पर बहस

बता दें कि फार्मा कंपनी एस्ट्राजेनेका ने अदालत में स्वीकार किया है कि कोविडशील्ड वैक्सीन से थ्रोम्बोसिस विद थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम के रूप में जाना जाता है. टीटीएस को वजह से शरीर में खून के थक्के बन जाते है. यूके अदालत में चले एक मामले में कोर्ट में कंपनी ने अपने दस्तावेजों में यह माना है. फार्मास्युटिकल कंपनी एस्ट्राजेनेका ने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के साथ साझेदारी में वैक्सीन विकसित की है. कंपनी कोर्ट में एक मुकदमे का सामना कर रही थी, जिसमें आरोप लगाया गया है कि उनके टीके के दुष्प्रभाव है और और इससे मौत का खतरा है.

एक रिपोर्ट के मुताबिक कहा गया है कि दो बच्चों के पिता एमी स्कॉट ने पिछले साल कोर्ट में मुकदमा दायर किया था. उन्होंने आरोप लगाया था कि एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन लेने के बाद उनके शरीर में खून का थक्का जम गया था, जिससे वह काम करने में असमर्थ हो गए थे. अप्रैल 2021 में टीका लगने के बाद उन्हें मस्तिष्क में स्थायी चोट लग गई थी. दिमाग मे यह चोट खून का थक्का यानी ब्लड क्लॉट की वजह से हुई थी. रिपोर्ट के मुताबिक हाइकोर्ट में इस तरह के 51 मामले दर्ज किए गए है, जिनमे 100 मिलियन पाउंड तक कि अनुमानित शक्ति की मांग की गई है.

ये भी पढें: वायु प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जताई गंभीर चिंता, कहा- ‘मास्क नहीं देगा पूरी सुरक्षा’

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

Recent Posts

ब्रज की आध्यात्मिक विरासत और विकास पर केंद्रित: बरसाना में ‘ललिता कुंज’ टाउनशिप का शुभारंभ, सुनील शेट्टी ने की शिरकत

नई दिल्ली में आयोजित भव्य समारोह में बॉलीवुड अभिनेता ने ब्रज क्षेत्र की सांस्कृतिक और…

8 hours ago

दिल्ली-NCR सहित कांपी उत्तर भारत की धरती, महसूस हुए भूकंप के झटके

दिल्ली-NCR और पूरे उत्तर भारत में रात 10:23 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए.…

8 hours ago

काशी में ‘पाकिस्तानेश्वर’ महादेव मंदिर का बदला नाम, सिंधी समाज के विरोध के बाद अब कहलाएंगे ‘सिंधु गंगेश्वर’

वाराणसी के छोटी शीतला घाट स्थित शिव मंदिर का नाम 'पाकिस्तानेश्वर' से बदलकर 'सिंधु गंगेश्वर…

8 hours ago

आसमान में तैनात होगा भारत का स्वदेशी ‘जासूस’, DRDO ने HAPS एयरशिप का किया कामयाब ट्रायल

DRDO ने 21 किमी की ऊंचाई पर 'हाई एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म सिस्टम' (HAPS) का सफल परीक्षण…

9 hours ago

पूर्व ऑस्ट्रेलियाई पीएम केविन रुड बोले- वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति मजबूत, पीएम मोदी के हुए मुरीद

ऑस्ट्रेलिया के पूर्व पीएम केविन रुड ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप के मन में पीएम…

10 hours ago

योगी सरकार का सोलर कमाल: 2,942 मेगावाट पहुंची रूफटॉप क्षमता, ‘PM सूर्य घर योजना’ में उत्तर प्रदेश नंबर-1

उत्तर प्रदेश में 'प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना' से 2,942 मेगावाट क्षमता के रूफटॉप सोलर लग…

10 hours ago