दिल्ली में लगातार बढ़ रहे वायु प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जाहिर की हैं. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अब वायु प्रदूषण से बचने के लिए मास्क भी पर्याप्त नहीं हैं. इससे लोगों की परेशानी बढ़ सकती हैं. जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने यह टिप्पणी की हैं. दिल्ली में लगातार खतरनाक स्तर तक पहुची हवा की गुणवत्ता को देखते हुए उन्होंने कहा कि वकीलों को अपनी सेहत का ध्यान रखना चाहिए. एक मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल सहित अन्य वरिष्ठ वकीलों की कोर्ट में पेशी पर यह टिप्पणी की है. जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि आप सब यहां क्यों आ रहें हैं. कोर्ट ने कहा कि हमारे पास वर्चुअल सुनवाई की सुविधा है, जो पर्याप्त है.
इसपर सिब्बल ने कहा कि मास्क का इस्तेमाल कर रहे हैं. तब जस्टिस नरसिम्हा ने चेतावनी देते हुए कहा कि सिर्फ मास्क पहनने से पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिलती. उन्होंने कहा कि यह जहरीली हवा शरीर को स्थायी नुकसान पहुच सकती हैं. कोर्ट ने वकीलों से आग्रह किया कि वे अदालत में शारीरिक रूप से उपस्थित होने के बजाए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा का लाभ उठाएं.
पराली जलाने की वजह से बढ़ा प्रदूषण
पर्यावरण मॉनिटरिंग केंद्रों की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली के बवाना में एक्यूआई 460, चांदनी चौक में 455, और आनंद विहार में 431 दर्ज किया गया है जबकि नोएडा में सेक्टर 125 में एक्यूआई 419 और गाजियाबाद के वसुंधरा में 413 एक्यूआई है. हाल ही में पराली जलाने की घटना को लेकर कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा सरकार से रिपोर्ट तलब किया हैं. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहें हैं. एमिकस क्यूरी अपराजिता सिंह ने कोर्ट को बताया कि यह एक बड़ी समस्या है. उन्होंने कहा कि अपलोड किया जा रहा डेटा गलत है. इससे पहले अपराजिता सिंह ने कोर्ट को बताया था कि पंजाब और हरियाणा में बड़े पैमाने पर पराली जलाना शुरू हो गया है.
सही डेटा के बिना प्रदूषण नियंत्रण असंभव- सुप्रीम कोर्ट
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने एयर मैनेजमेंट कमीशन से प्रदूषण के बढ़ते स्तर को रोकने के लिए उठाए गए कदमों से संबंधित जानकारी मांगी हैं. कोर्ट ने पूछा है कि फिलहाल कौन-कौन से एयर क़्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन कार्यरत हैं और उनकी स्थिति क्या है. सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी ने कोर्ट को बताया था कि दीवाली के दौरान दिल्ली के कई एयर व्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन काम नही कर रहे थे. उन्होंने बताया कि 37 में से सिर्फ नौ स्टेशन ही लगातार सक्रिय थे. उन्होंने कहा कि अगर मॉनिटरिंग स्टेशन सही तरह से काम नही करेंगे, तो यह तय करना मुश्किल होगा कि कब ग्रेडेड रेस्पॉन्स एक्शन प्लान यानी ग्रैप लागू करना है.
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-भारत एक्सप्रेस
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