पाकिस्तान के सक्रिय समर्थन से भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने और देश की संप्रभुता को गंभीर नुकसान पहुंचाने के मामले में दोषी ठहराई गई प्रतिबंधित अलगाववादी संगठन ‘दुख्तरान-ए-मिल्लत’ की प्रमुख आसिया अंद्राबी और उनकी सहयोगियों को बड़ी कानूनी राहत नहीं मिली है. दिल्ली हाई कोर्ट ने आसिया अंद्राबी और उनकी दो अन्य सहयोगियों द्वारा निचली अदालत के सजा के फैसले के खिलाफ दायर अपीलों पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत ने स्पष्ट किया है कि अपीलों पर अगली औपचारिक सुनवाई आगामी अक्टूबर 2026 में की जाएगी.
हाई कोर्ट ने आसिया अंद्राबी के साथ-साथ मामले में दोषी करार दी गईं उनकी दो मुख्य सहयोगियों सूफी फहमीदा और नाहिदा नसरीन की ओर से दायर अपीलों पर भी एनआईए से जवाब तलब किया है. इसके अलावा, याचिकाकर्ताओं ने अपील लंबित रहने तक निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा के क्रियान्वयन पर रोक (Suspension of Sentence) लगाने की मांग की है, जिस पर भी अदालत ने एनआईए को अपना रुख स्पष्ट करने का निर्देश दिया है.
उल्लेखनीय है कि दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट (विशेष एनआईए अदालत) ने गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत आसिया अंद्राबी को देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने और आतंकवादी साजिशों के लिए उम्रकैद (आजीवन कारावास) की सजा सुनाई है. वहीं, इसी मामले में सह-आरोपी सूफी फहमीदा और नाहिदा नसरीन को 30-30 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई गई है.
कड़कड़डूमा कोर्ट ने आसिया अंद्राबी को गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून (UAPA) की अत्यंत गंभीर धाराओं के तहत दोषी करार दिया था. अदालत ने उन्हें:
एनआईए के अनुसार, अंद्राबी ने अपनी दोनों सहयोगियों के साथ मिलकर भड़काऊ और नफरत भरे भाषणों के जरिए भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने, युवाओं को बरगलाने और आपराधिक साजिश रचने जैसे गंभीर अपराध किए हैं.
सर्व-महिला अलगाववादी समूह ‘दुख्तरान-ए-मिल्लत’ (Dukhtaran-e-Millat) की स्थापना आसिया अंद्राबी ने वर्ष 1987 में की थी. इस संगठन द्वारा घाटी में अलगाववाद और भारत-विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देने के कारण केंद्र सरकार ने बाद में इसे पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया था. एनआईए ने गहन जांच के बाद आसिया अंद्राबी को अप्रैल 2018 में गिरफ्तार किया था, तब से वे लगातार जेल में बंद हैं.
ये भी पढ़ें: मदुरै तिरुपरमकुंडम ‘दीपथुन’ विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास HC के आदेश पर तमिलनाडु सरकार की याचिका पर मांगा जवाब
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने एनआईए को निर्देश दिया था कि वह चार्जशीट और उसके साथ संलग्न सभी इलेक्ट्रॉनिक व भौतिक साक्ष्यों की कॉपी आरोपियों को उपलब्ध कराए. इसमें आरोपियों द्वारा दिए गए भारत-विरोधी भाषणों, वीडियो और सोशल मीडिया लिंक्स की सीडी/पेनड्राइव शामिल थीं. ऐसे कई आपत्तिजनक वीडियो रिकॉर्ड में आए थे, जिनमें आसिया अंद्राबी को खुलेआम भारत विरोधी और पाकिस्तान के समर्थन में नारेबाजी करते हुए देखा जा सकता है.
एनआईए द्वारा दाखिल की गई विस्तृत चार्जशीट में आधिकारिक दावा किया गया था कि गिरफ्तार आरोपी पड़ोसी देश (पाकिस्तान) का सीधा सहयोग और फंडिंग हासिल करने के लिए एक संगठित देशविरोधी अभियान चला रही थीं. एनआईए ने अंद्राबी पर जम्मू-कश्मीर में सीमा पार से संचालित होने वाले आतंकवादियों को रसद, शरण और वैचारिक मदद पहुंचाने का भी संगीन आरोप लगाया है. एनआईए ने कहा है कि आसिया की गतिविधियां भारत की अखंडता और संप्रभुता को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाने के लिए रची गई थीं. अब अक्टूबर में होने वाली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं.
AIIA 10th foundation day Kaumaracon 2026: AIIA नई दिल्ली का 10वां स्थापना दिवस. राष्ट्रीय आयुर्वेद…
कोलकाता पूजा पंडाल हादसे पर पीएम मोदी और अमित शाह ने जताया दुख. PMNRF से…
AIIA foundation day decade achievements 37 lakh patients: अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) के 10…
मोरबी की राजमाता विजयकुंवरबा के निधन पर पीएम मोदी ने गहरा दुख जताया. कहा- उनका…
ग्रेटर नोएडा में एनसीबी ने दो गुप्त ड्रग लैब का भंडाफोड़ कर 45 करोड़ की…
Kolkata Durga Puja pandal stampede Chorbagan: कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल का हिस्सा ढहने…