अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में PIL दायर कर चुनावी वादों के वित्तीय प्रभाव, मुफ्त की रेवड़ियों पर रोक और घोषणापत्रों के लिए एक निश्चित प्रारूप लागू करने की मांग की है. (PC: भारत एक्सप्रेस)
नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है. अदालत ने केंद्र सरकार को परीक्षा प्रणाली में सुधारों से जुड़ी प्रगति रिपोर्ट और हलफनामा दाखिल करने के लिए एक हफ्ते का अतिरिक्त समय दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि कामचलाऊ इंतजामों के बजाय ऐसे ठोस कदम उठाए जाने चाहिए, जिससे भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को हमेशा के लिए रोका जा सके.
सुप्रीम कोर्ट ने नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में दायर याचिका पर केंद्र सरकार को हलफनामा दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दे दिया है. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र सरकार और एनटीए को पेपर लीक के बाद सुधारों को लागू करने में हुई प्रगति पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था.
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने कहा था दाखिल हलफनामे में काम चलाऊ उपायों पर निर्भर रहने के बजाए सुधारों को संस्थागत बनाने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में बताया जाना चाहिए.
अदालत ने प्रस्तावित गवर्निंग बोर्ड, विशेषज्ञों के नेतृत्व वाली इकाइयों, स्टेकहोल्डर के नामांकन और दस क्षेत्रों में हार्ड-पावर्ड कमेटी की सिफारिशों को लागू करने के बारे में जानकारी देने को कहा था. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सुरक्षा, निगरानी और सतर्कता के लिए हाल ही में नियुक्त अतिरिक्त महानिदेशकों की भूमिका और प्रगति के बारे में भी बताने को कहा था.
साथ ही कोर्ट ने परीक्षा चक्र के हर चरण परीक्षा से पहले, परीक्षा के दौरान और परीक्षा के बाद में सुधारों पर स्टेटस रिपोर्ट भी मांगा था, अदालत ने केंद्र सरकार से राज्य और जिला अधिकारियों के साथ टेस्टिंग के तरीकों, कई सेशन में होने वाली परीक्षाओं, परीक्षा केंद्रों, प्रश्न पत्रो, प्रिंटिंग और ट्रांसपोटेशन पर हुई प्रगति के बारे में बताने को कहा था. अदालत ने कंप्यूटर बेस्ड टेस्टिंग में बदलने के प्रस्ताव और डेटा सुरक्षा के उपायों के बारे में भी जानकारी देने को कहा था.
जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने कहा था कि पेपर लीक के बाद भारतीय वायु सेना की तैनाती केवल एक कामचलाऊ उपाय था और यह कोई स्थायी समाधान नहीं हो सकता. कोर्ट ने केंद्र से उम्मीदवारों के वेरिफिकेशन के लिए डिजीयात्रा जैसी तकनीकों पर अपने प्रस्ताव के बारे में भी बताने को कहा था.
नीट यूजी को लेकर फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) की ओर से वकील तन्वी दुबे ने यह याचिका दायर की है. दायर याचिका में NTA को भंग कर दूसरी संस्था के गठन की मांग की गई है. इसके अलावे FAIMA ने नीट यूजी 2026 परीक्षा को दोबारा कराने की मांग की गई है.
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-भारत एक्सप्रेस
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