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मदुरै तिरुपरमकुंडम ‘दीपथुन’ विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास HC के आदेश पर तमिलनाडु सरकार की याचिका पर मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने मदुरै स्थित तिरुपरमकुंडम पहाड़ी के दीपथुन पर कार्तिकेय दीप प्रज्वलित करने के मद्रास हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ तमिलनाडु सरकार की याचिका पर नोटिस जारी किया है.

तमिलनाडु के प्रसिद्ध मदुरै स्थित तिरुपरमकुंडम पहाड़ी पर मौजूद ‘दीपथुन’ (प्राचीन दीप स्तंभ) पर कार्तिकेय दीप जलाने को लेकर चल रहे कानूनी विवाद में एक नया मोड़ आया है. सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने मद्रास हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ तमिलनाडु राज्य सरकार की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए संबंधित पक्षों को आधिकारिक नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है. सुप्रीम कोर्ट के माननीय न्यायाधीश जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की दो सदस्यीय खंडपीठ तमिलनाडु सरकार द्वारा दायर इस विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर सुनवाई कर रही है.

सुनवाई के दौरान तमिलनाडु सरकार ने शीर्ष अदालत में तर्क दिया कि मद्रास हाई कोर्ट ने अपने फैसले से मंदिर की एक बिल्कुल नई धार्मिक रस्म ‘गढ़ी’ है. राज्य सरकार का कहना है कि न्यायपालिकाओं को सदियों से स्थापित धार्मिक रीति-रिवाजों, परंपराओं और मंदिर के स्थापित अनुष्ठानों में इस तरह से हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए.

कार्तिक माह में दीप प्रज्वलित करने का पूरा मामला

मूल याचिका में मदुरै स्थित तिरुपरमकुंडम पहाड़ी पर मौजूद ऐतिहासिक दीपथुन पर 24 घंटे स्थायी रूप से और वार्षिक आधार पर कार्तिक माह के विशिष्ट दिन व महीने में दीप प्रज्वलित करने का निर्देश देने की मांग की गई थी.

इससे पहले, मद्रास हाई कोर्ट की एकल पीठ ने याचिकाकर्ता को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की सुरक्षा घेरे में पहाड़ी के प्राचीन स्तंभ पर दीप जलाने की अनुमति व निर्देश दिया था. 1 दिसंबर को हाई कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर प्रबंधन को 3 दिसंबर को ‘कार्तिकई दीपम’ (Karthigai Deepam) के अवसर पर दीप प्रज्वलित करने की समुचित सुविधा प्रदान करनी चाहिए. मद्रास हाई कोर्ट ने अपनी मौखिक टिप्पणी में कहा था कि

“दीपक तो पूरे घर भर में जलाए जाते हैं, केवल पूजा घर (गर्भगृह) तक सीमित नहीं रहते. इस साल से दीपथुन पर दीप जलना चाहिए और कोर्ट के आदेश का कड़ाई से अनुपालन कराना स्थानीय पुलिस का कर्तव्य है.”

हाई कोर्ट ने चेतावनी दी थी कि यदि तय तिथि को शाम 6:00 बजे तक दीप नहीं जलाया गया, तो शाम 6:05 बजे संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सीधे अदालत की अवमानना (Contempt of Court) की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी.

3 दिसंबर की घटना

‘कार्तिकई दीपम’ तमिलनाडु का एक अत्यंत प्राचीन और पवित्र हिंदू त्योहार है, जो तमिल पंचांग के अनुसार कार्तिक माह की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है. इस दिन को भगवान मुरुगन (कार्तिकेय) की पावन जयंती के रूप में जाना जाता है. थिरुप्परनकुन्द्रम का प्रसिद्ध सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर, जो भगवान मुरुगन के छह अति-पवित्र मंदिरों (आरुपदाइवीडु) में से एक है, सदियों से इस पावन त्योहार का मुख्य केंद्र रहा है.

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इसी प्रकार, हिंदू माइनॉरिटी कम्युनिटी को डिंडीगुल के पेरुमल कोविलपट्टी स्थित मांडू कोविल में भी यह त्योहार मनाने का पारंपरिक अधिकार प्राप्त है. हालांकि, याचिकाकर्ता का आरोप है कि 3 दिसंबर को जब तय समय पर दीप प्रज्वलन का अवसर आया, तो वहां न केवल दीप बुझा रहा, बल्कि पुलिस द्वारा शांतिपूर्ण भक्तों पर लाठीचार्ज करने की घटनाएं सामने आईं. अब सुप्रीम कोर्ट नोटिस का जवाब मिलने के बाद इस संवेदनशील मामले पर अगली सुनवाई करेगा.



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