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दिल्ली दंगे: पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन की 5वीं जमानत याचिका भी खारिज; हाईकोर्ट ने कहा- ‘अंकित शर्मा हत्याकांड’ की साजिश में आरोपी की भूमिका गंभीर

कड़कड़डूमा कोर्ट ने वर्ष 2020 दिल्ली दंगा मामले में आरोपी आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन की ओर से दायर अंतरिम जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. ताहिर हुसैन ने मेडिकल ग्राउंड पर जमानत की मांग की है. इससे पहले कोर्ट ने ताहिर हुसैन की पिछली जमानत याचिका को खारिज कर दिया था.

ताहिर हुसैन को हाई कोर्ट से नहीं मिली जमानत

ताहिर हुसैन 2020 के दिल्ली दंगों के पीछे बड़ी साज़िश के मामले में आरोपी है. वहीं, इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने ताहिर हुसैन को जमानत देने से इनकार कर दिया था. जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने ताहिर हुसैन की ओर से दायर पांचवी जमानत याचिका को भी खारिज कर दिया था.

पूर्व पाषर्द के वकील तारा नरूला के माध्यम से दाखिल याचिका में कहा गया था कि वह पांच साल से अधिक का समय जेल में है. मुकदमे में तेजी लाने के लिए निचली अदालत के अथक प्रयासों के बावजूद सुनवाई पूरा होने में समय लग सकता है.

उकसाने का आरोप

निचली अदालत ने 12 मार्च को बिना आधार के उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जबकि इस घटना में उसके संलिप्त होने की कोई सबूत नहीं है. इस मामले में उसके खिलाफ उकसाने का आरोप है. इस मामले के तीन गवाहों में से तीन ने उसके बारे में घटना स्थल पर मौजूद होने की बात नहीं कही है, जबकि दो ने दोषमुक्त कर दिया है.

इस तरह से कहा जा सकता है कि गवाहोंने बयानों में विरोधभास है. बयानों का विसनीय नहीं माना जा सकता है. आरोपी को जमानत पर रिहा कर दिया जाए.

क्या था मामला?

पुलिस के अनुसार 26 फरवरी, 2020 को शिकायतकर्ता रविंदर कुमार ने दयालपुर थाने के अधिकारियों को सूचित किया कि उनका बेटा अंकित शर्मा 25 फरवरी, 2020 से लापता है. बाद में कुछ लोगों से पता चला कि एक व्यक्ति की हत्या करने के बाद उसे चांद बाग पुलिया स्थित मस्जिद से खजूरी खास नाले में फेंक दिया गया था.

पुलिस ने कहा कि शर्मा का शव खजूरी खास नाले से बरामद किया गया था. उनके शरीर पर 51 चोटों के निशान थे. हुसैन इस मामले में आरोपियों में से एक है. अभियोजन पक्ष ने कहा है कि चार आरोपी व्यक्ति भी हिंसक भीड़ का हिस्सा थे, जो दंगा और आगजनी की घटनाओं में शामिल था. उसमें शर्मा की मौत हो गई थी.

नागरिकता कानून समर्थकों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसा के नियंतण से बाहर होने के बाद 24 फरवरी, 2020 को पूर्वोत्तर दिल्ली में सांप्रदायिक झड़पें हुई थी. उसमें कम से कम 53 लोग मारे गए और कई अन्य घायल हो गए थे.

ये भी पढ़ें: आइपैक मामले को संविधान पीठ में भेजने की पश्चिम बंगाल सरकार ने की मांग

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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