दिल्ली के लाल किला ब्लास्ट मामले में दायर चार्जशीट पर एनआईए कोर्ट ने संज्ञान लिया है. राऊज एवेन्यु कोर्ट 9 सितंबर को मामले में अगली सुनवाई करेगा. एनआईए द्वारा दाखिल चार्जशीट में 13 लोगो को आरोपी बनाया गया है.
इनमें उमर-उन-नबी (मृतक), आमिर राशिद राथर, मुफ्ती इरफान अहमद, शाहीन, सोयाब, बिलाल और यासिर अहमद डार समेत अन्य आरोपी शामिल है. एनआईए जांच जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली-एनसीआर समेत कई राज्यों और क्षेत्रो में की गई.
जांच के दौरान एजेंसी ने बड़ी संख्या में सबूत जुटाए है. चार्जशीट में 588 गवाहों के बयान, 395 से अधिक दस्तावेज और 200 से ज्यादा जब्त किए गए सामान को सबूत के तौर पर शामिल किया गया है. एनआईए ने मृतक लोगों के शरीर के अंगों से जुड़ी फॉरेंसिक रिपोर्ट दायर किया है.
इससे पहले एनआईए ने डॉक्टर शाहीन सईद और अन्य.समेत 13 आरोपियों के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल किया था. इनमें एक फरार पीडियाट्रिशियन (बच्चों के डॉक्टर) भी शामिल है, जिसकी पहचान एक आतंकी मॉड्यूल के संस्थापक सदस्य के रूप में हुई.
एनआईए द्वारा दाखिल सप्लीमेंट्री चार्जशीट में जमीर अहमद अहंगर, तुफैल अहमद भट्ट और फरार मुजफ्फर अहमद (उर्फ फरार उर्फ जफर) को बनाया है. ये सभी जम्मू कश्मीर के रहने वाले हैं. इनमें मुख्य आरोपी डॉक्टर उमर उन नबी भी शामिल है, जो विस्फोटक से भरी कार का ड्राइवर था और धमाके में मारा गया था.
एनआईए के अनुसार पीडियाट्रिशियन मुजफ्फर अहमद सह आरोपी डॉक्टर अदिल अहमद राथर का बड़ा भाई और अंसार गजवत-उल-हिंद (एजीयूएच) का संस्थापक सदस्य है. यह संगठन अल कायदा से जुड़ा है. जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि जून 2022 में श्रीनगर के ईदगाह इलाके में हुई एक गुप्त बैठक में AGuH Interim नाम के आतंकी मॉड्यूल की नींव रखी गई थी.
बैठक मे मुजफ्फर अल-फलाह यूनिवर्सिटी, फरीदाबाद में चल रही एक सीक्रेट आईईडी बनाने वाली जगह से भी जुड़ा हुआ था. यहां डॉक्टर उमर और मुज्जमिल की मदद से TATP आधारित विस्फोटक तैयार करने, उसकी टेस्टिंग करने और उससे सुरक्षित रखने का काम किया जा रहा था. करीब 7500 पेजों की चार्जशीट में एनआईए ने बम ब्लास्ट करने वाले उमर उन नबी (मृतक) को भी आरोपी बनाया है.
एनआईए के मुताबिक 10 नवंबर 2025 को लाल किले के बाहर हुए कार बम विस्फोट की योजना उमर उन नबी ने बनाई थी. उमर उन नबी की मौके पर ही मौत हो गई थी. एनआईए ने आरोपी दानिश को श्रीनगर से गिरफ्तार किया था.
एनआईए के मुताबिक दानिश ने डोन में तकनीकी बदलाव किए थे और कार बम विस्फोट से पहले रॉकेट तैयार करने की कोशिश की. तुफैल प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर ए-तैयबा (LeT) का पूर्व OGW था, इस मॉड्यूल के लिए हथियार सप्लाई करता था. उसने एक हैंडलर के जरिए ‘डेड डॉप्स’ (गुप्त रूप से सामान छोड़ने की जगह) से एक AK-47, एक क्रींकोव राइफल, एक पिस्तौल, मैगजीन और जिंदा कारतूस हासिल किए थे और मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी (जो अब मर चुका है) को 3 लाख रुपए पहुचाएं थे. बता दें कि इस ब्लास्ट में 13 लोगो की मौत हो गई थी.
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-भारत एक्सप्रेस
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