Karnataka High Court
कर्नाटक हाई कोर्ट ने एक व्यक्ति की गिरफ्तारी पर कर्नाटक पुलिस को आड़े हाथ लिया है. कोर्ट पुलिस द्वारा की गई गिरफ्तारी को अवैध बताया है. कोर्ट ने पुलिस के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि किसी नागरिक की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को इस तरह से हल्के में नही लिया जा सकता है.
कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस राज को बंद करो, वरना लोहे के हाथों से रोकना होगा. कोर्ट ने संबंधित पुलिस अधिकारी पर 3 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है. साथ ही कोर्ट ने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने का निर्देश दिया है. जस्टिस एम. नागप्रसन्न की सिंगल बेंच 3 सितंबर को मामले में अगली सुनवाई करेगी.
शिकायतकर्ता पर आपराधिक साजिश का आरोप
यह मामला के एन मोहन रेड्डी बनाम कर्नाटक सरकार से जुड़ा हुआ है. शिकायतकर्ता पर फर्जी वसीयत से जुड़े मामले में आपराधिक साजिश, दस्तावेज में जालसाजी और जाली दस्तावेज को असली बताकर इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया था.
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सामने सबसे महत्वपूर्ण और गंभीर मुद्दा गिरफ्तारी प्रक्रिया को लेकर था. पुलिस ने मोहन रेड्डी को बीएनएसएस की धारा 35 (3) के तहत 25 अगस्त को नोटिस जारी किया था.
नोटिस में उन्हें 27 अगस्त को सुबह 11 बजे जांच में शामिल होने के लिए बुलाया गया था. लेकिन पुलिस ने नोटिस के मुताबिक उनके जांच में शामिल होने से पहले ही 25 अगस्त को घर से गिरफ्तार कर लिया. इसके बाद रेड्डी ने पुलिस के इस कार्रवाई के खिलाफ कर्नाटक हाई कोर्ट में याचिका दायर की.
पुलिस राज बंद करो
कोर्ट ने मामले की तत्काल सुनवाई करते हुए उसी दिन रिहाई का आदेश दिया था. कोर्ट ने कहा कि जब पुलिस ने धारा 35(3) के जांच में शामिल होने के लिए नोटिस जारी किया था, तो सामान्य तौर पर गिरफ्तारी तभी की जा सकती थी, जब संबंधित व्यक्ति जांच में सहयोग करने में विफल रहता.
कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा कि ‘पुलिस राज बंद करो, वरना लोहे के हाथों से रोकना पड़ेगा’. कोर्ट ने कहा कि नागरिक की स्वतंत्रता को इस तरह से लेना केवल जांच अधिकारी की गलती नहीं है. पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ अधिकारियों की भी इस मामले में जिम्मेदारी बनती है.
कोर्ट ने कहा कि यह सिर्फ जांच अधिकारी की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि पूरी पुलिस व्यवस्था की निगरानी और जवाबदेही पर सवाल उठता है. जुर्माना पुलिस अधिकारियों की जेब से वसूला जाएगा.
मुआवजे के लिए सरकारी पैसे का इस्तेमाल नहीं
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में साफ किया है कि 3 लाख रुपए की लागत राज्य सरकार के खजाने से नहीं दिया जाएगा. कोर्ट ने कहा कि कानून के खिलाफ की गई गिरफ्तारी के लिए सरकारी पैसे का इस्तेमाल कर मुआवजा नहीं दिया जा सकता. यह रकम संबंधित पुलिस अधिकारियों के जेब से जाएगा.
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि जांच अधिकारी सुनील कुमार ने अनुभव की कमी के कारण गलती की. उन्होंने जुर्माना और विभागीय जांच का प्रस्ताव वापस लेने का कोर्ट से अनुरोध किया. लेकिन कोर्ट ने राज्य सरकार की इस दलील को खारिज कर दिया.
कोर्ट ने कहा कि अधिकारी को अपनी गलती की जिम्मेदारी लेनी होगी और इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए जवाबदेही जरूरी है. कोर्ट ने मोहन रेड्डी के खिलाफ चल रही जांच पर रोक लगा दिया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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