दिल्ली दंगा मामले में यूएपीए के तहत जेल में बंद आरोपी शरजील इमाम, उमर खालिद, गुलफिशा फातिमा सहित अन्य की ओर से दायर जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन वी अंजारिया की पीठ ने 18 दिसंबर तक दोनों पक्षो को अपनी दलीलों के समर्थन में दस्तावेज जमा कराने को कहा है.
मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने अपनी दलीलों में कहा कि शरजील इमाम की करतूत यानी उसका भाषण बाकी आरोपियों पर भी एक सबूत के तौर पर लागू होता है. सुनवाई में कोर्ट ने पूछा था कि क्या इन भाषणों को उकसावे या यूएपीए के तहत आतंकी कृत्य की श्रेणी में रखा जा सकता है? इसपर याचिककर्ताओ की ओर से पेश वकील ने कहा कि सिर्फ भाषणों के आधार पर आतंकवाद का आरोप नही लगाया जा सकता है.
मामले की सुनवाई के दौरान शरजील इमाम की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने कहा, मैं कहना चाहूंगा कि मैं आतंकवादी नहीं हूं लेकिन, पुलिस ने मुझे ऐसा कहा. साथ ही कहा मैं राष्ट्र विरोधी नहीं हूं, लेकिन राज्य ने मुझे ऐसा कहा है. अदालत ने संकेत दिया है कि भाषणों की प्रकृति और उनके प्रभाव को लेकर गहन पड़ताल होगी. यह मामला न केवल कानूनी दृष्टि से बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और आतंकवाद कानून की व्याख्या के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण हो गया है.
वही उमर खालिद की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि जब दिल्ली में दंगे हुए थे तब खालिद दिल्ली में नही था और उसे इस तरह से कैद में नही रखा जा सकता है. उन्होंने कहा कि यह उसी तरह है कि जैसे कि कोई कहे मैं आपको आपके विरोध प्रदेर्शन के लिए दंडित करूंगा. सिब्बल ने यह भी कहा कि आप किसी और भाषण को उनके नाम से जोड़कर यह नहीं कह सकते कि मैं दंगों के लिए जिम्मेदार हूं. मैं खुद से यह सवाल करता हूं, मैं शोध का छात्र हूं, सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए मैं क्या कर सकता हूं?
मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कोर्ट को बताया था कि इस दंगे में 53 लोग मारे गए और 530 से अधिक लोग घायल हुए थे. साथ ही जमकर हिंसा हुई थी. एएसजी एसवी राजू ने कोर्ट को यह भी बताया कि हिंसा के दौरान पेट्रोल बम का इस्तेमाल किया गया था, साथ ही जमकर पत्थरबाजी हुई थी. इतना ही नही तेजाब जैसे रसायनों का इस्तेमाल किया गया था. पुलिसकर्मियों पर भी हमला किया गया था. दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा था कि 16 सितंबर की चार्जशीट पर 7 सितंबर 2020 को संज्ञान लिया गया था. इमाम और खालिद 22 नवंबर 2020 को दाखिल पहली चार्जशीट में इनका नाम था.
इससे पहले कोर्ट में चलाई गई वीडियो क्लिप में शरजील इमाम कहते दिखाई दे रहा है और कह रहा है कि, एक सरकार की मनमानी हम कभी कबूल नहीं करेंगे एक और हिस्से में उन्होंने कहा था, काम करने का एक ही तरीका है, सड़क बंद, मामला बंद. वही कोर्ट में चलाए गए अन्य वीडियो में शरजील इमाम कह रहा है कि दिल्ली में हम दूध, पानी बंद करना चाहते हैं, ये बयान उस समय के हैं जब नागरिकता से जुड़े कानूनों के खिलाफ देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन चल रहे थें.
-भारत एक्सप्रेस
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