उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य
उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है. कोर्ट ने फर्जी डिग्री के आरोप लगाने से संबंधित मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है. जस्टिस सुधांशू धुलिया की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह आदेश दिया है. यह याचिका आरटीआई एक्टिविस्ट दिवाकर नाथ त्रिपाठी ने दायर की थी. दिवाकर नाथ त्रिपाठी का आरोप था कि केशव प्रसाद मौर्य की डिग्री फर्जी है.
याचिका में कहा गया था कि उन्होंने फर्जी डिग्री के आधार पर ही पेट्रोल पंप भी हासिल किया है. याचिका में दावा किया गया था कि केशव प्रसाद मौर्य ने जिस डिग्री को चुनावी नामांकन में प्रस्तुत किया वह अमान्य है और उस पर न केवल चुनाव लड़ा गया बल्कि पेट्रोल पंप भी आवंटित करा लिया गया. उन्होंने मांग की थी कि मौर्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर इस पूरे मामले की निष्पक्ष पुलिस जांच कराई जाए.
याचिका में यह भी कहा गया था कि यदि इस तरह के मामलों पर सख्ती से कार्रवाई नही की गई, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा. इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने त्रिपाठी की याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि शिकायतकर्ता दिवाकर नाथ त्रिपाठी, केशव प्रसाद मौर्य द्वारा धोखा दिए गए व्यक्ति नहीं है. सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत एफआईआर दर्ज करने के लिए आवेदन करने का उनके पास कोई अधिकार नही है.
धोखाधड़ी और जालसाजी जैसे अपराध सीआरपीसी की धारा 39 के अंतर्गत नहीं आते हैं. सुप्रीम कोर्ट में सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत एफआईआर दर्ज करने के आदेश देने की मांग की गई थी, जिसे हाई कोर्ट और निचली अदालत ने पहले ही खारिज कर दिया था.
भारत एक्सप्रेस
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