सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर को दिल्ली हाई कोर्ट से झटका लगा है. हाई कोर्ट ने मेधा पाटकर की ओर से दायर याचिका को खारिज करते हुए, निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है. पाटकर ने दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना द्वारा 2001 में दर्ज किए गए आपराधिक मानहानि मामले में दोषी ठहराए जाने के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी.
जस्टिस शालिंदर कौर की बेंच ने यह फैसला दिया है. 15 जुलाई को कोर्ट ने दोनों पक्षों की जिरह के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. 2 अप्रैल को साकेत कोर्ट के सेशन कोर्ट ने मेधा पाटकर की सजा को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया था.
सक्सेना ने यह मामला 23 साल पहले दाखिल किया था जब वह गुजरात में एक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) के प्रमुख थे. नर्मदा बचाओ आंदोलन से जुड़ी 70 वर्षीय पाटकर ने सत्र अदालत के दो अप्रैल के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है. सत्र अदालत ने मजिस्ट्रेट की अदालत की ओर से उन्हें दी गई सजा को बरकरार रखा था. मजिस्ट्रेट ने 1 जुलाई, 2024 को पाटकर को आईपीसी की धारा 500 (मानहानि) के तहत दोषी करार देते हुए पांच महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई थी और उन पर 10 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया था.
साकेत कोर्ट ने पाटकर को 8 अप्रैल को 25 हजार रुपए का परिवीक्षा बांड भरने पर अच्छे आचरण की परिवीक्षा पर रिहा कर दिया था और उन पर एक लाख रुपए का जुर्माना भरने की पूर्व शर्त भी लागू की थी. हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश में पाटकर की सजा को निलंबित कर दिया था और उन्हें 25 हजार रुपए के निजी मुचलके पर जमानत दे दी थी.
भारत एक्सप्रेस
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