दिल्ली हाई कोर्ट से 2020 के दिल्ली दंगों से संबंधित यूएपीए मामले में आरोपी शरजील ईमाम, उमर खालिद सहित अन्य को झटका लगा है. जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस शालिन्दर कौर की पीठ ने यह फैसला सुनाया है.
कोर्ट ने सभी पक्षों की जिरह के बाद 9 जुलाई को फैसला सुरक्षित रख लिया था. यह जमानत याचिका शरजील ईमाम, उमर खालिद, मोहम्मद सलीम खान, शिफा उर रहमान, अतहर खान, मीरान हैदर, खालिद सैफी और गुलफिशा फातिमा ने दायर की थी. इसके अलावे केस में कुल 17 लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें ताहिर हुसैन, इशरत जहां, आसिफ इकबाल तन्हा, सैफुरा जरगर, फैजान खान, नताशा नारवाल और अन्य नाम शामिल है.
मामले की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी थी कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े यूएपीए मामलों में मुकदमे में देरी के आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती है. वही याचिककर्ताओ की ओर से पेश वकीलों ने कहा था कि मुकदमा लंबा खींच गया है और अभी तक आरोप भी तय नहीं हुए हैं.
जमानत याचिकाओं पर सुनवाई का सामना करने वालों में शरजील इमाम, उमर खालिद, मोहम्मद सलीम खान, शिफा उर रहमान, अतहर खान, मीरान हैदर, खालिद सैफी और गुलफिशा फातिमा शामिल हैं. ये सभी लंबे समय से जेल में बंद है.
एसजी मेहता ने कहा कि यह कोई सामान्य जमानत याचिका नहीं है, बल्कि सुनियोजित और संगठित दंगे का मामला है, जिसका उद्देश्य भारत की वैश्विक छवि को नुकसान पहुचाना था. उन्होंने आरोप लगाया जो इमाम और खालिद ने जानबूझकर उस दिन को चुना जिससे अशांति फैले और भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर बदनाम किया जा सके.
एसजी मेहता ने यह भी कहा कि अगर कोई राष्ट्रविरोधी स्तर पर ऐसी हरकत करता है, तो उसे जमानत का कोई अधिकार नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली दंगों की जांच अब तक कि सबसे बेहतरीन जांचों में भी एक है और धारा 164 के तहत 58 गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं. एसजी मेहता ने कहा कि उमर खालिद गुलफिशा और अन्य आरोपी व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए लगातार संपर्क में थे और साजिश रच रहे थे.
उन्होंने कहा कि दंगे पूर्व नियोजित और संगठित थे, जिनका उद्देश्य बेहद खतरनाक था, इसलिए आरोपी किसी भी तरह की राहत के हकदार नहीं है. एसजी मेहता ने आरोप लगाया जा इन लोगों का मकसद देश को धर्म के आधार पर बांटना और अस्थिरता फैलाना था.
उन्होंने आगे कहा कि इनका उद्देश्य था कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया इसपर ध्यान दे और भारत की छवि को बदनाम किया जाए. इसके लिए एक समाचार पत्र में छपे हेडलाइन का हवाला दिया गया. मेहता ने जोर देकर कहा कि ये दंगे अचानक नहीं हुए थे-ये पूरी तरह से सोची-समझी और योजनाबद्ध साजिश का हिस्सा थे, जिसमें पुलिसकर्मी और निर्दोष नागरिक मारे गए.
यह मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों से जुड़ा है, जिसमें 53 लोगों की मौत हुई और 700 से अधिक घायल हुए थे. दंगों में मारे गए लोगों में 38 मुस्लिम और 15 हिंदू थे.
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-भारत एक्सप्रेस
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