दिल्ली हाईकोर्ट ने जी डी गोयनका स्कूल की ओर से दायर याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है. हाई कोर्ट ने एक स्कूल को ऑटिस्टिक ( सीखने में दिक्कत की समस्या से पीड़ित) बच्ची को दाखिला देने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि शिक्षा पर सभी छात्रों का समान रूप से अधिकार है.
गोयनका ने 1 जुलाई के हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील दायर की थी. जिसमें सिंगल जज के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें स्कूल को एक ऑटिस्टिक बच्ची को फीस लेकर दाखिला देने का निर्देश दिया था.
2019 में डॉक्टर को हुआ था संदेह
अधिवक्ता अशोक अग्रवाल द्वारा दायर याचिका में दावा किया गया है कि बच्ची का जन्म मई 2017 में हुआ था. नवंबर 2019 में एक डॉक्टर को संदेह हुआ कि वह ऑटिज्म से पीड़ित है. उसने थेरेपी शुरू की जिसे कोविड 19 ने बाधित कर दिया.
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि अपीलकर्ता के मन में व्याप्त आशंकाओं को दूर करने के लिए हम उसकी मां और स्कूल काउंसलर के साथ विशेषज्ञों की एक समिति गठित करने का प्रस्ताव रखते है., जो बच्ची की मूल्यांकन करेगी और अपनी राय देगी की क्या उसे जीडी गोयनका या खास जरूरतों वाले बच्चों के स्कूल में दाखिला दिया जा सकता है.
कोर्ट ने असेसमेंट करने का दिया था निर्देश
कोर्ट ने संबंधित डॉक्टर को बच्ची की जांच करने और नतीजे पर पहुचने के लिए जरूरी असेसमेंट करने का निर्देश दिया था. शैक्षणिक सत्र 2021-22 में उसे सिब्लिंग क्लॉज के तहत स्कूल में दाखिला मिला. स्कूल को उसके बोलने में दिक्कत के बारे में पहले ही बता दिया गया था. दिसंबर 2021 में बच्ची में हल्के ऑटिज्म की पुष्टि हुई और थेरेपी की.सिफारिश की गई.
अप्रैल 2022 में जब ऑफलाइन कक्षाए शुरू हुई तो.माता-पिता ने स्कूल से स्पेशल एजुकेटर की अनुमति मांगी.
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.
