पटियाला हाउस कोर्ट ने दिल्ली लाल किला ब्लास्ट मामले में मारे गए 11 लोगों के शवों का अंतिम संस्कार करने की अनुमति दे दी है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि यह प्रक्रिया पूरी मानव गरिमा और संबंधित धर्म की परंपराओं का सम्मान करते हुए दिया है. कोर्ट ने एनआईए को निर्देश दिया है कि कार्रवाई पूरी होने के बाद अगली सुनवाई में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करें.
एजेंसी ने कोर्ट को बताया कि इन जैविक अवशेषों से जरूरी फॉरेंसिक जांच पूरी हो चुकी है और सभी जरूरी साक्ष्य सुरक्षित कर लिए गए है. अब इन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखने की जरूरत नही है, क्योंकि समय के साथ ये खराब हो रहे है. एनआईए ने मृतक लोगों के शरीर के अंगों से जुड़ी फॉरेंसिक रिपोर्ट दायर किया है. इससे पहले एनआईए ने डॉक्टर शाहीन सईद और अन्य समेत 13 आरोपियों के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल किया था. इनमें एक फरार पीडियाट्रिशियन (बच्चों के डॉक्टर) भी शामिल है, जिसकी पहचान एक आतंकी मॉड्यूल के संस्थापक सदस्य के रूप में हुई.
एनआईए द्वारा दाखिल सप्लीमेंट्री चार्जशीट में जमीर अहमद अहंगर, तुफैल अहमद भट्ट और फरार मुजफ्फर अहमद (उर्फ फरार उर्फ जफर) को बनाया है. ये सभी जम्मू कश्मीर के रहने वाले हैं. इनमें मुख्य आरोपी डॉक्टर उमर उन नबी भी शामिल है, जो विस्फोटक से भरी कार का ड्राइवर था और धमाके में मारा गया था. एनआईए के मुताबिक पीडियाट्रिशियन मुजफ्फर अहमद सह आरोपी डॉक्टर अदिल अहमद राथर का बड़ा भाई और अंसार गजवत-उल-हिंद (एजीयूएच) का संस्थापक सदस्य है. यह संगठन अल कायदा से जुड़ा है. जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि जून 2022 में श्रीनगर के ईदगाह इलाके में हुई एक गुप्त बैठक में AGuH Interim नाम के आतंकी मॉड्यूल की नींव रखी गई थी.
इस बैहक मे मुजफ्फर अल-फलाह यूनिवर्सिटी, फरीदाबाद में चल रही एक सीक्रेट आईईडी बनाने वाली जगह से भी जुड़ा हुआ था. यहां डॉक्टर उमर और मुज्जमिल की मदद से TATP आधारित विस्फोटक तैयार करने, उसकी टेस्टिंग करने और उससे सुरक्षित रखने का काम किया जा रहा था. करीब 7500 पेजों की चार्जशीट में एनआईए ने बम ब्लास्ट करने वाले उमर उन नबी (मृतक) को भी आरोपी बनाया है. एनआईए के मुताबिक 10 नवंबर 2025 को लाल किले के बाहर हुए कार बम विस्फोट की योजना उमर उन नबी ने बनाई थी. उमर उन नबी की मौके पर ही मौत हो गई थी. एनआईए ने आरोपी दानिश को श्रीनगर से गिरफ्तार किया था.
एनआईए के मुताबिक दानिश ने डोन में तकनीकी बदलाव किए थे और कार बम विस्फोट से पहले रॉकेट तैयार करने की कोशिश की. तुफैल प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर ए – तैयबा (LeT) का पूर्व OGW था, इस मॉड्यूल के लिए हथियार सप्लाई करता था. उसने एक हैंडलर के जरिए ‘डेड डॉप्स’ (गुप्त रूप से सामान छोड़ने की जगह) से एक AK-47, एक क्रींकोव राइफल, एक पिस्तौल, मैगजीन और जिंदा कारतूस हासिल किए थे और मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी (जो अब मर चुका है) को 3 लाख रुपए पहुचाएं थे. बता दें कि इस ब्लास्ट में 13 लोगो की मौत हो गई थी.
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-भारत एक्सप्रेस
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