दिल्ली के मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर हमले के मामले में आरोपी राजेश भाई खेमजी और तहसीन रजा उर्फ बापू ने निचली अदालत में आरोप तय किए जाने के फैसले के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में अपील दायर की है. दायर याचिका पर कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. कोर्ट 15 अप्रैल को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. साथ ही कोर्ट ने सभी पक्षकारों से 15 अप्रैल तक लिखित जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से पेश वकील ने कहा कि घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण थी, लेकिन इसे बढ़ा चढ़ाकर पेश किया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि यह सच है कि घटना से गंभीर चोट लग सकती थी, लेकिन मौजूदा तथ्यों के आधार पर यह कहना सही नहीं है कि गला घोंटने की कोशिश की गई थी. यह सिर्फ हमला था, हत्या की कोशिश कहना ठीक नहीं है.
उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली जैसे शहर में रोजाना रोडरेज की घटनाएं सामने देखने को मिलती रहती है. लेकिन हर घटना को हत्या की कोशिश नहीं कहा जा सकता है. दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट ने आरोप तय करते हुए कहा था कि प्रथम दृष्टया बीएनएस की धारा 61 (2) (आपराधिक षड्यंत्र), बीएनएस की धारा 221 (लोक सेवक को उनके लोक कार्यों के निर्वहन में बाधा डालना), बीएनएस की धारा 132 (लोक सेवक पर उनके कर्तव्य का पालन करते समय आपराधिक बल का प्रयोग करना), बीएनएस की धारा 109(1) (हत्या का प्रयास) के तहत दंडनीय अपराध के सभी तत्व दोनों आरोपियों के खिलाफ आरोप सिद्ध होते है.
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एकता गौबा मान की कोर्ट ने कहा था कि चूंकि पीड़ित एक सार्वजनिक हस्ती है, इसलिए मामले की कार्यवाही बंद कमरे में होगी. कोर्ट में फिजीकली पेश किए जाने के बाद न्यायाधीश ने साकरिया राजेशभाई खीमजी और तहसीन रजा रफीउल्लाह शेख के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय किए, जिन्होंने आरोपों से इनकार कर दिया. इससे पहले 20 दिसंबर को कोर्ट ने दोनों के खिलाफ हत्या की कोशिश सहित अन्य धाराओं के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया था, यह कहते हुए कि उनके खिलाफ पहली नजर में मामला बनता है.
400 पन्नों के इस चार्जशीट में 40 गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं. चार्जशीट में कहा गया था कि आरोपी सकरिया राजेश भाई खिमजीभाई और उसके दोस्त सैयद तहसीन रजा पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत विभिन्न अपराधों के लिए चार्जशीट दाखिल किया गया है. इसमें हत्या का प्रयास, हमला करना और एक लोक सेवक को उसके कर्तव्य निर्वहन से रोकना तथा आपराधिक साजिश शामिल है.
पुलिस ने शुरू में बीएनएस कई तीन धाराओं के तहत हत्या के प्रयास, सरकारी कर्मचारी को चोट पहुचाने और सरकारी काम में बाधा डालने का मामला दर्ज किया था. बाद में आपराधिक साजिश रचने, साक्ष्य मिटाने और आर्म्स एक्ट की धाराएं भी जोड़ दी. गत 20 अगस्त को मुख्यमंत्री के सिविल लाइंस स्थित कैप कार्यालय में जनसुनवाई चल रही थी.
-भारत एक्सप्रेस
Written By: Shubhra Rai (Intern)
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