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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को AGR डिमांड पर पुनर्विचार की दी अनुमति

सुप्रीम कोर्ट से वोडाफोन-आइडिया को बड़ी राहत मिल गई है. कोर्ट ने 9450 करोड़ के नए एजीआर डिमांड के मामले में यह राहत दी है. कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस मांग में छूट देने के मुद्दे पर पुनर्विचार की अनुमति दे दी है.

सरकार ने डिमांड में कुछ राशि को दोहराया

सीजेआई बी आर गवई और जस्टिस के विनोद चन्द्रन की पीठ ने कहा कि यह नीतिगत मामला है और केंद्र सरकार इस पर स्वतंत्र रूप से निर्णय ले सकती है. कोर्ट ने कहा कि इस मामले में केंद्र सरकार ने कंपनी में 49% हिस्सेदारी ली है और 20 करोड़ से अधिक ग्राहक इसकी सेवाएं ले रहे हैं. ऐसे में केंद्र सरकार को समीक्षा करने से नहीं रोका जा सकता है.

कोर्ट ने स्पष्ट किया गया यह आदेश मामले की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए पारित किया गया है. खासकर सरकार के इक्विटी निवेश और करोड़ों ग्राहकों के हित को ध्यान में रखते हुए किया गया है. 20 करोड़ ग्राहकों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने यह आदेश दिया है. वोडाफोन-आइडिया ने एजीआर (एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू) बकाया को चुनौती दी थी. कंपनी ने 9 450 करोड़ रुपये के अतिरिक्त एजीआर बकाया को गलत ठहराते हुए इसे अदालत में चुनौती दी थी. वोडाफोन आइडिया का कहना था कि सरकार ने इस डिमांड में कुछ राशि को दोहराया है. ऐसे में इसमें सुधार करना चाहिए.

एजीआर बकाया की हो जांच

याचिका में कंपनी ने अनुरोध किया था कि वह दूरसंचार विभाग को 3 फरवरी 2020 को पेश किए गए डिडक्शन वेरिफिकेशन गाइडलाइन का इस्तेमाल करके एजीआर बकाया की पूरी तरह से जांच करने के लिए कहें. दूरसंचार विभाग ने वोडाफोन आइडिया को 2018-19 के लिए एजीआर बकाया के रूप में 2774 करोड़ रुपये अतिरिक्त देने को कहा था. 9450 करोड़ रुपये की कुल मांग में से 2774 करोड़ रुपये विलय वाली कंपनी के लिए है, जबकि 5675 करोड़ रुपए विलय से पहले वोडाफोन समूह के बकाया के लिए है.

वोडाफोन आइडिया का दावा है कि कुछ रकम दो बार जोड़ा गया है, जिसके लिए उसने वित्त वर्ष 2016-17 से पहले की अवधि के बकाए का मिलान करने की मांग की है. इसके जवाब में DoT ने कोर्ट को बताया है कि यह मांग पुनर्मूल्यांकन या पुनर्गणना के कारण नहीं है, बल्कि लंबित खातों को अंतिम रूप देने से उत्पन्न हुई है. विभाग ने वित्तीय खातों के बंद होने के बाद पाई गई असंगतियों को इसका कारण बताया है.

ये भी पढ़ें: डिजिटल आरेस्ट मामले में स्वतः संज्ञान लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी कर मांगा जवाब

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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