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डिजिटल आरेस्ट मामले में स्वतः संज्ञान लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी कर मांगा जवाब

कोर्ट ने कहा कि हमारे हिसाब से पैन इंडिया सीबीआई डिजिटल अरेस्ट के मामलों में मंजिल तक पहुच सकती हैं. सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार की ओर से पेश वकील ने स्पष्ट किया कि अपराध की गंभीरता और प्रकृति को देखते हुए, उन्हें जांच किसी केंद्रीय एजेंसी को सौंपने पर कोई आपत्ति नहीं है.

Edited by Vaibhav Gupta

डिजिटल आरेस्ट को लेकर लिए गए स्वतः संज्ञान पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. कोर्ट ने राज्यों से पूछा कि इस मामले में कितनी शिकायतें मिली है और कितने मामलों में एफआईआर दर्ज किया गया है. कोर्ट 3 नवंबर को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि पूरे देश में पीड़ित परेशान हैं. कुछ नही हो रहा हैं.

डिजिटल अरेस्ट मामलों की जांच में CBI सक्षम

कोर्ट ने कहा कि हमारे हिसाब से पैन इंडिया सीबीआई डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) के मामलों में मंजिल तक पहुच सकती हैं. मामले की सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार की ओर से पेश वकील ने स्पष्ट किया कि अपराध की गंभीरता और प्रकृति को देखते हुए, उन्हें जांच किसी केंद्रीय एजेंसी को सौंपने पर कोई आपत्ति नहीं है. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि डिजिटल अरेस्ट के मामलों की तादाद के हिसाब से जांच करने में सीबीआई सक्षम है.

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने सीबीआई, केंद्र सरकार साइबर क्राइम अंबाला, हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. कोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए कहा था कि लोगों की जीवन भर की बचत से ठगी करने वाले बड़े सिंडिकेट का पता लगाने की जरूरत बताई है. कोर्ट ने कहा था कि बॉम्बे हाईकोर्ट में विभिन्न फर्जी कार्यवाहियों और सीबीआई, ईडी जांच के झूठे दावे सामने आए है. दस्तावेजों की जालसाजी और इस अदालत तथा हाई कोर्ट के नाम, मुहर और न्यायिक प्राधिकरण का बेशर्मी से आपराधिक दुरुपयोग गंभीर चिंता का विषय है.

कोर्ट ने कहा था कि न्यायाधीशों के फर्जी हस्ताक्षरों वाले न्यायिक आदेश न्यायपालिका पर जन विश्वास प्रणाली की नींव पर प्रहार करते हैं. कोर्ट ने कहा था कि यह मामला कोई अकेला मामला नहीं है. उन्होंने कहा था कि मीडिया में इस तरह की खबरे कई बार छपी है. सुप्रीम कोर्ट ने अंबाला में बुजुर्ग महिला से फर्जी आदेश दिखाकर 1करोड़ 5 लाख रुपये की ठगी की बात सामने आने के बाद स्वतः संज्ञान लिया था.

13 दिनों तक कर रखा था डिजिटल अरेस्ट

दरअसल सितंबर में हरियाणा रोडवेज विभाग की रिटायर्ड ऑडिटर शशिबाला सचदेवा और उनके पति से फर्जी सीबीआई अधिकारी बनकर साइबर ठगों ने करीब 1 करोड़ 5 लाख रुपये की ठगी कर ली थी. इतना ही नहीं पीड़ित महिला और उनके पति को 13 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखा गया था. उस दौरान मानसिक प्रताड़ना और जान से मारने तक कि धमकी दी गई. जिसकी शिकायत पीड़िता ने पुलिस से की थी, उन्होंने पुलिस को बताया था कि 3 सितंबर को उनके व्हाट्सएप नंबर पर एक महिला ने खुद को टेलीकॉम रेगुलेटरी ऑथोरिटी से बताते हुए संपर्क किया और कहा कि उनका नाम मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आ रहा है. जिसके बाद कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. सीबीआई ने भी कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल में सोशल मीडिया के जरिए ऑनलाइन निवेश योजनाओं के नाम पर लाखों लोगों से ठगी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की है.

बता दें कि साइबर ठगों ने हाल ही में सीजेआई बी आर गवई के नाम पर करोड़ों की ठगी की है. ठगों ने नासिक के दो बुजुर्गों से अलग-अलग घटनाओं में सीजेआई की अदालत में ऑनलाइन पेशी की धमकी देकर डिजिटल आरेस्ट करने और 6.72 करोड़ रुपये ठगने का मामला सामने आया है.

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-भारत एक्सप्रेस



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