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वोडाफोन-आइडिया की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 26 सितंबर को करेगा सुनवाई

वोडाफोन-आइडिया की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 26 सितंबर को सुनवाई करेगा.सीजेआई बी. आर गवई, जस्टिस के विनोद चंद्रन और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ वोडाफोन आइडिया की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है.

सरकार भी इस मामले में हितधारक

मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुनवाई को टालने की मांग की, जिसपर कोर्ट ने शुक्रवार तक के लिए सुनवाई को टाल दिया. एसजी मेहता ने कोर्ट को बताया कि सरकार भी इस मामले में हितधारक है, क्योंकि अब सरकार की कंपनी में 50 फीसदी हिस्सेदारी है. उन्होंने कहा कि कुछ समाधान निकलना होगा और इसके लिए कोर्ट की मदद की जरूरत होगी.

वही वोडाफोन आइडिया की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि मोबाइल कंपनियों को लाइसेंस शुल्क उनकी आय पर देना होता है. लेकिन विवाद इस बात को लेकर है कि अगले कंपनी होटल जैसे अन्य बिजनेस भी चलाती है तो उसकी आमदनी भी मोबाइल कंपनी के राजस्व में जोड़ दी जाती है.

वोडाफोन-आइडिया ने एजीआर बकाया को दी चुनौती

इसपर एसजी मेहता ने कहा कि इस केस में कुछ और मुद्दा है जो अगली सुनवाई में बताएंगे. वोडाफोन-आइडिया ने एजीआर (एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू) बकाया को चुनौती दी है. कंपनी ने 9 450 करोड़ रुपये के अतिरिक्त एजीआर बकाया को गलत ठहराते हुए इसे अदालत में चुनौती दी हैं. वोडाफोन आइडिया का कहना है कि सरकार ने इस डिमांड में कुछ राशि को दोहराया है.

ऐसे में इसमें सुधार करना चाहिए. याचिका में कंपनी ने अनुरोध किया है कि वह दूरसंचार विभाग को 3 फरवरी 2020 को पेश किए गए डिडक्शन वेरिफिकेशन गाइडलाइन का इस्तेमाल करके एजीआर बकाया की पूरी तरह से जांच करने के लिए कहें.

कुछ रकम दो बार जोड़ा गया

दूरसंचार विभाग ने वोडाफोन आइडिया को 2018-19 के लिए एजीआर बकाया के रूप में 2774 करोड़ रुपये अतिरिक्त देने को कहा है. 9450 करोड़ रुपये की कुल मांग में से 2774 करोड़ रुपये विलय वाली कंपनी के लिए है, जबकि 5675 करोड़ रुपए विलय से पहले वोडाफोन समूह के बकाया के लिए है.

वोडाफोन आइडिया का दावा है कि कुछ रकम दो बार जोड़ा गया है, जिसके लिए उसने वित्त वर्ष 2016-17 से पहले की अवधि के बकाए का मिलान करने की मांग की है. इसके जवाब में DoT ने कोर्ट को बताया है कि यह मांग पुनर्मूल्यांकन या पुनर्गणना के कारण नहीं है, बल्कि लंबित खातों को अंतिम रूप देने से उत्पन्न हुई है. विभाग ने वित्तीय खातों के बंद होने के बाद पाई गई असंगतियों को इसका कारण बताया है.

ये भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट ने AIFF को चार सप्ताह के भीतर आम सभा की बैठक आयोजित कर संशोधनों के साथ संविधान को लागू करने का दिया निर्देश

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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