लीगल

सबरीमाला मंदिर में सभी आयु वर्ग के महिलाओं को प्रवेश के मामले में दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर 9 अप्रैल को भी सुनवाई रहेगी जारी

सबरीमाला मंदिर में सभी आयु वर्ग के महिलाओं को प्रवेश के मामले में दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर 9 अप्रैल को भी सुनवाई जारी रहेगी. मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कोई धर्मनिरपेक्ष अदालत किसी धार्मिक प्रथा को सिर्फ अंधविश्वास नहीं कह सकती, क्योंकि उसके पास ऐसा तय करने की विशेषज्ञता नही होती.

एसजी मेहता ने कहा कि जो चीज नागालैंड के किसी समुदाय के लिए धार्मिक हो सकती है, वही मेरे लिए अंधविश्वास लग सकती है. उन्होंने कहा कि हमारा समाज बहुत विविधतापूर्ण है, यहां पर अलग-अलग धर्म के लोग, धर्म और मान्यताएं है. ऐसे में अदालत के लिए ऐसा फैसला देना खतरनाक हो सकता है. इसपर जस्टिस अमानुल्लाह ने कहा कि मिस्टर मेहता आपने बात को बहुत आसान बना दिया है.

कानून बनाना या कार्रवाई करना संसद या विधानसभा का काम

अदालत के पास न्यायिक समीक्षा का अधिकार है कि वह यह तय कर सके कि क्या अंधविश्वास है. उसके बाद उस पर कानून बनाया या कार्रवाई करना संसद या विधानसभा का काम हो सकता है, लेकिन यह नहीं कहा जा सकता कि अंतिम फैसला सिर्फ विधानमंडल ही करेगा. केंद्र सरकार का कहना है कि अदालतों को यह तय करने का अधिकार नही है कि कोई आवश्यक धार्मिक प्रथा अंधविश्वास है या नही. एसजी मेहता ने कहा कि अदालतों को चाहे न्यायाधीश कितने भी विद्वान क्यों न हो, यह तय करने का कोई अधिकार या क्षेत्राधिकार नहीं है कि कोई आवश्यक धार्मिक प्रथा अंधविश्वास है या नही. एसजी ने जस्टिस बागची से कहा कि अदालत को किसी प्रस्ताव का परीक्षण अतिवादी आधार पर नहीं करना चाहिए. इसपर जस्टिस बागची ने जवाब दिया कि तार्किक समझ का आकलन करने के लिए रिडक्टियो एड एब्सर्डम के सिद्धांत का प्रयोग किया जाता है.

एसजी मेहता ने 2018 के सबरीमाला फैसले को गलत बताया

एसजी मेहता ने कहा कि 2018 का सबरीमाला मामले में पांच जजों द्वारा दिया गया फैसला, जिसमें सभी वर्गों की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी गई, वह गलत था. इसपर कोर्ट ने कहा कि चूंकि मौजूदा मामले का दायरा अनुच्छेद 25 (अंतरात्मा की स्वतंत्रता और धर्म को मानने, उसका आचरण करने और उसका प्रचार करने की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 26 (धार्मिक मामलों के प्रबंधन की स्वतंत्रता) की व्याख्या से जुड़ा है. इसलिए सबरीमाला फैसले के गुण-दोष की जांच नहीं कि जाएगी. जस्टिस सुंदरेश ने कहा कि कोर्ट को सबरीमाला फैसले पर विस्तार से जाने की जरूरत नही है, क्योंकि वह इस मामले की समीक्षा नहीं कर रहा है.

उन्होंने कहा कि एकमात्र अंतर यह है कि विज्ञान तर्क पर आधारित है. इसलिए यह तर्क दिया जा सकता है कि धर्म की ऐसी कोई निश्चित सीमाएं नहीं होती, क्योंकि धर्म आस्था पर आधारित होता है. जबकि जस्टिस बी. वी नागरत्ना ने कहा कि सामाजिक सुधार के नाम पर किसी धर्म की पहचान खत्म नहीं हो सकती.

ये भी पढ़ें: अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाला मामले में कथित बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल जेम्स को दिल्ली हाई कोर्ट से झटका

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

Recent Posts

लाखों कटे वोटों पर आयोग का यू-टर्न, 7 राज्यों में फिर मिलेगा मौका; जानें क्या है प्लान?

ECI SIR Update: SIR के दौरान ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से बाहर हुए मतदाताओं के लिए…

47 minutes ago

दिवाली पर कारोबार का महाधमाका, देशभर में 5 लाख करोड़, दिल्ली में 80 हजार करोड़ के व्यापार का अनुमान

दिवाली 2026 पर देशभर में 5 लाख करोड़ रुपये और दिल्ली में 80 हजार करोड़…

1 hour ago

महंगाई का डबल अटैक! अक्टूबर में 5.93% तक पहुंच सकती है खुदरा महंगाई, 8.20% हो सकती है खाद्य महंगाई; बढ़ेगा रसोई का बजट

Inflation Alert: Reuters के सर्वे के मुताबिक, अक्टूबर में भारत की खुदरा महंगाई दर सितंबर…

2 hours ago

विक्रोली स्टेशन पर मौत को मात, युवक ने दिखाई ऐसी बहादुरी, दौड़कर बचाई दूसरी जान, वायरल हुआ दिल दहला देने वाला वीडियो

मुंबई के विक्रोली रेलवे स्टेशन पर एक युवक को लोकल ट्रेन के सामने से बचाने…

2 hours ago

पीएम मोदी से सुलझा दशकों पुराना विवाद, हिमाचल बीजेपी अध्यक्ष ने BBMB मामले में क्या कहा?

हिमाचल प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष राजीव बिंदल ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) के बिजली बकाये…

2 hours ago

पीएम मोदी ने देशवासियों को दी दीपावली की शुभकामनाएं, किस सिलसिले को जारी रखने की कही बात?

पीएम मोदी ने देशवासियों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए एक वीडियो संदेश जारी…

2 hours ago