Supreme Court Chhattisgarh Burial Case: छतीसगढ़ के एक गांव से आदिवासी ईसाइयों के शवों को कब्र से निकालकर दूसरे जगह दफनाने के मामले में दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. जस्टिस विक्रमनाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है.
कोर्ट ने शवों को कब्र से निकालने पर अंतरिम रोक लगा दिया है. कोर्ट ने अपने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि दफनाए गए शवों को कब्र से निकालने की अनुमति नहीं दी जा सकती. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंजाल्विस ने कहा कि शवों को बिना सहमति के कब्र से निकाला जा रहा है और अज्ञात स्थानों पर दफनाने के लिए ले जाया जा रहा है.
बता दें कि दायर याचिका में मांग की गई है कि सभी व्यक्तियों को, चाहे वे किसी भी धर्म के हों, अपने मृतकों को उसी गांव में दफनाने की अनुमति है, जहां वो रह रहे है. लेकिन अब उन कब्रो से शवों को हटाया जा रहा है, उन्होंने अदालत से आगे किसी भी तरह की जबरन खुदाई और शवों को हटाने पर रोक लगाने की मांग की है.
सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रमनाथ ने याचिकाकर्ता से पूछा कि मामले में प्रतिवादी कौन हैं. जवाब में गोंजाल्विस ने कहा कि इस मामले में केवल छत्तीसगढ़ राज्य को ही पक्षकार बनाया गया है और राज्य सरकार इस कार्रवाई का समर्थन कर रही है.
बता दें कि जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने अलग-अलग फैसला दिया था. जिसके बाद मामले को बड़ी बेंच के पास भेज दिया गया था. जस्टिस सतीश शर्मा ने कहा था कि राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई सार्वजनिक व्यवस्था संबंधी समस्या न हो.
जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा था कि छत्तीसगढ सरकार 2 महीने के भीतर राज्य भर में ईसाइयों के लिए बहिष्करण स्थलों का सीमांकन करें. जस्टिस नागरत्ना ने कहा था कि भाईचारा बढ़ाना सभी नागरिकों का दायित्व है. जस्टिस सतीश शर्मा ने कहा था कि छत्तीसगढ़ में धर्मांतरित ईसाई का अंतिम संस्कार निर्धारित स्थान पर ही किया जाना चाहिए. मृतक के बेटा रमेश बघेल की ओर से दायर याचिका कोर्ट ने यह फैसला सुनाया था.
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि इस मुद्दे को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाना बेहतर है. इसलिए बेहतर होगा कि शव को करकापाल गांव में ईसाइयों के लिए निदिष्ट स्थान पर दफनाया जाए.
याचिकाकर्ता ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. हाई कोर्ट ने उनके पिता, एक पादरी, को दफनाने के लिए निदिष्ट क्षेत्र में दफनाने की मांग को ठुकरा दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा था कि एक व्यक्ति को, जो उस गांव में रहा, उसे मौत के बाद गांव के कब्रिस्तान में दफनाने क्यों नहीं दिया जा रहा है.
कोर्ट ने कहा था कि यह कहते हुए दुख हो रहा है कि एक व्यक्ति को अपने पिता को दफनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट आना पड़ रहा है. न तो पंचायत न ही राज्य सरकार या हाई कोर्ट कोई भी इस समस्या को सुलझा नहीं सका.
-भारत एक्सप्रेस
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