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एल्विश यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत; अगली सुनवाई तक कार्यवाही पर रोक बरकरार, कोर्ट ने ‘जहरीले अजगर’ के दावे पर जताई हैरानी

सांपों के जहर मामले में घिरे यूट्यूबर एल्विश यादव को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान अजगर में विष ग्रंथियां होने के दावे पर आश्चर्य जताया और मामले की अगली सुनवाई मार्च 2026 के लिए तय की है.

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Edited by Radha Priya

मशहूर यूट्यूबर और बिग बॉस ओटीटी विजेता Elvish Yadav को Supreme Court से मिली राहत फिलहाल बरकरार रहेगी. कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई तक निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक के आदेश को जारी रखने का निर्देश दिया है. जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा और जस्टिस एन. के. सिंह की पीठ अब इस मामले पर मार्च में सुनवाई करेगी.

सांपों के जहर और ‘जहरीले अजगर’ पर हुई तीखी बहस

सुनवाई के दौरान एल्विश यादव के वकील ने तर्क दिया कि जिन सांपों का जिक्र किया जा रहा है, वे जहरीले नहीं होते. इस पर पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से सख्त लहजे में पूछा, “क्या आपने सांपों से व्यवहार किया है? क्या आप चिड़ियाघर में जाकर जानवरों के साथ खेल सकते हैं? क्या यह अपराध नहीं होगा?” कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत दर्ज शिकायत एक गंभीर चिंता का विषय है और कोई भी व्यक्ति जो चाहे वो नहीं कर सकता.

मामले में नया मोड़ तब आया जब मूल शिकायतकर्ता गौरव गुप्ता के वकील ने दावा किया कि पार्टी में मौजूद सांप एक अजगर था, जिसमें विष ग्रंथियां थीं. इस पर अदालत ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा, “आप क्या कह रहे हैं? अजगर में विष ग्रंथियां कैसे हो सकती हैं? वह तो अपने शिकार को जकड़कर मारता है.”

इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को दी गई है चुनौती

एल्विश यादव ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिसमें कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर और चार्जशीट पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था. मई 2024 में हाईकोर्ट की एकल पीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा था कि चार्जशीट में एल्विश के खिलाफ पर्याप्त बयान दर्ज हैं, जिनकी जांच ट्रायल के दौरान होनी चाहिए.

एल्विश यादव के वकील की दलीलें

यादव की ओर से पेश वकील ने कोर्ट में निम्नलिखित तर्क रखे:

एल्विश के पास से कोई सांप या मादक पदार्थ बरामद नहीं हुआ है.

अन्य आरोपियों से एल्विश का कोई सीधा संबंध स्थापित नहीं होता है.

शिकायतकर्ता वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत अधिकृत व्यक्ति नहीं है, वह झूठा दावा कर रहा है.

इन आधारों पर दाखिल चार्जशीट को रद्द किया जाना चाहिए.

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क्या है पूरा मामला?

एल्विश यादव पर नोएडा में रेव पार्टी आयोजित करने, सांप के जहर का दुरुपयोग करने और विदेशियों को आमंत्रित कर नशीले पदार्थों का सेवन कराने का आरोप है. गौतम बुद्ध नगर के सेक्टर 49 थाने में उनके खिलाफ वन्य जीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं सहित आईपीसी (IPC) और एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी.

पुलिस ने इस मामले में अप्रैल 2024 में 1200 पन्नों की एक विस्तृत चार्जशीट दाखिल की थी. फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट की रोक के चलते निचली अदालत में इस पर आगे की कार्यवाही मार्च तक थमी रहेगी.

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-भारत एक्सप्रेस



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