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‘केरल मॉडल क्यों नहीं अपनाते?’, पुलिस थानों में CCTV पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को लगाई फटकार

देशभर के पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय सचिव को तलब किया है. कोर्ट ने 7 अप्रैल को होने वाली सुनवाई में व्यक्तिगत तौर पर पेश होने का आदेश दिया है. जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने यह निर्देश दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रमनाथ ने कहा कि अगर आप कहते है कि केरल में सबसे अच्छी व्यवस्था है, तो दूसरे राज्य उसका अनुसरण क्यों नही कर सकते? वही जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि वे बैठक करके केरल मॉडल के अनुसार विकास क्यों नहीं कर सकते?  वही इस मामले में पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने कहा कि इसमें शायद कुछ और राजनीतिक कारण भी है.

जस्टिस विक्रमनाथ ने कहा कि राज्यों को.वैसे भी 40%, 60% देना ही पड़ता है.कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार इसे गंभीरता से ले, उसके बाद कोर्ट इस मामले में आदेश पारित करेगा. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्यों द्वारा जवाब दाखिल नही करने पर वहां के मुख्य सचिव को तलब करने की बात कही थी. कोर्ट ने कहा था कि पुलिस थाने का पूछताछ कक्ष वह स्थान है, जहां सीसीटीवी कैमरे होने चाहिए. कोर्ट ने राजस्थान सरकार से पूछा था कि राज्य सरकार ने जो हकफनामा दिया है उसके मुताबिक पूछताछ कक्ष में सीसीटीवी कैमरा नही है. कोर्ट ने कहा था कि सीसीटीवी कैमरे लगाने में लागत तो आएगी, लेकिन यह मानवाधिकार का सवाल है.

कोर्ट ने जताई चिंता

पिछली सुनवाई में अदालत ने स्पष्ट किया था कि अब इस मामले में और देरी बर्दाश्त नही की जाएगी. इससे पहले इसको लेकर दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को चेतावनी देते हुए स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया था. मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने कहा था कि अब भी देश भर में पुलिस थानों और केंद्रीय जांच एजेंसियों के अधिकतर दफ्तरों में समुचित सीसीटीवी कैमरे नहीं है. जो कैमरे लगे भी है, वो या तो काम नहीं कर रहे है, उसकी गुणवत्ता भी घटिया है. कैमरे की क़्वालिटी इतनी खराब है कि उसकी ऑडियो अच्छी नही है. धुंधला दिखता है.

कोर्ट ने सभी जांच एजेंसियों को CCTV लगाने का दिया था आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने 2020 में सीबीआई, ईडी औरएनआईए सहित अन्य जांच एजेंसियों के दफ्तर में सीसीटीवी कैमरे और रिकॉर्डिंग उपकरण लगाने का निर्देश दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि देशभर के प्रत्येक थाने में, सभी प्रवेश और निकास बिंदुओं, मुख्य द्वार, लॉक-अप, कॉरिडोर, लॉबी और रिसेप्शन के अलावे कई अन्य जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने का आदेश दिया था, ताकि कोई कैमरे की नजर से बच न सके.

इसका उद्देश्य था कि हिरासत में होने वाली पूछताछ के दौरान पारदर्शिता बनी रहे और किसी भी प्रकार के मानवाधिकार उल्लंघन या पुलिस ज्यादती पर रोक लगाई जा सके. सीसीटीवी फुटेज का इस्तेमाल पुलिस जांच और अदालती कार्यवाही में किया जा सकता है.

सीसीटीवी फुटेज से कई ऐसे अहम सबूत मिलते है जो किसी मामले में अंतर पैदा कर सकता है.

ये भी पढ़ें: जेफरी एपस्टीन विवाद: हिमायनी पुरी के पक्ष में आए आदेश के खिलाफ अपील, जल्द सुनवाई को दिल्ली हाई कोर्ट राजी

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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