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जेफरी एपस्टीन विवाद: हिमायनी पुरी के पक्ष में आए आदेश के खिलाफ अपील, जल्द सुनवाई को दिल्ली हाई कोर्ट राजी

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की बेटी हिमायनी पुरी से जुड़े जेफरी एपस्टीन विवाद और मानहानि मामले में सामाजिक कार्यकर्ता कुणाल शुक्ला की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट 23 अप्रैल को सुनवाई करेगा.

Delhi High Court Mother Daughter Relationship Attempt to Murder Case

रायपुर के सामाजिक कार्यकर्ता कुणाल शुक्ला की ओर से दायर याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट जल्द सुनवाई को तैयार हो गया है. कोर्ट 23 अप्रैल को सुनवाई करेगा. जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस रेणु भटनागर की पीठ ने यह आदेश दिया है. इसके साथ ही कोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि हिमायनी पुरी की ओर से दायर अर्जी पर अपना जवाब दाखिल कर सकते हैं.

कुणाल शुक्ला की याचिका में अंतरिम आदेश को चुनौती

दायर याचिका में कुणाल शुक्ला ने केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी की बेटी हिमायनी पुरी को जेफरी एपस्टीन से जोड़ने वाले मानहानिकारक आरोपों के प्रकाशन पर रोक लगाने वाले अंतरिम आदेश को रद्द करने की मांग की थी. हिमायनी पुरी ने 10 करोड़ रुपए के मानहानि में दावा किया कि उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर एक सुनियोजित अभियान चलाया जा रहा है.

इसमें उन्हें एपस्टीन और उनकी आपराधिक गतिविधियों से जोड़कर गलत जानकारी फैलाई जा रही है, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच रहा है. 17 मार्च 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट के सिंगल जज जस्टिस मिनी पुष्करना ने अंतरिम आदेश जारी किया. इसमें एक्स, गूगल, यूट्यूब, मेटा सहित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अज्ञात संस्थाओं को भारत में ऐसी सामग्री हटाने का निर्देश दिया है.

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और खोजी पत्रकारिता का तर्क

सामाजिक कार्यकर्ता कुणाल शुक्ला का कहना है कि विवादित सामग्री न तो झूठी है और न ही दुर्भाग्यपूर्ण. यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और खोजी पत्रकारिता के दायरे में आता है. उन्होंने दलील दी कि यह आदेश संविधान के अनुच्छेद 19 (1)(a) के तहत मिले अधिकार पर पूर्व प्रतिबंध लगाता है और खोजी रिपोर्टिंग पर ठंडा प्रभाव डालता है. दायर अपील में यह भी कहा गया था कि अदालत ने बिना यह देखे कि क्या कोई कम सख्त उपाय पर्याप्त होगा सीधे व्यापक हटाने का आदेश दे दिया.

महेश जेठमलानी की दलील

पिछली सुनवाई के दौरान पुरी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने कहा था कि उन्हें बहुत ही घटिया पोस्ट से टारगेट किया जा रहा है. वह अनजान लोगों के खिलाफ जॉन डो (John Doe) ऑर्डर की मांग कर रहे हैं. जेठमलानी ने कहा था कि यह कंटेंट एक सोचे-समझे हमले का हिस्सा लगता है, जो पर्सनल और संभावित पॉलिटिकल द्वेष की ओर इशारा करता है.

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जुड़े विवाद पर उनका नाम घसीटने पर आपत्ति जताई है. पुरी ने मानहानि का मुकदमा दायर कर उन सभी ऑनलाइन समाचार रिपोर्टों, पोस्टों, वीडियो और अन्य सामग्री को हटाने की मांग की है. साथ ही हिमायनी ने सोशल मीडिया संस्थाओं और अज्ञात व्यक्तियों (जॉन डो) पर 10 करोड़ रुपए मानहानि का दावा किया है.

केंद्रीय मंत्री की बेटी को टारगेट करने का आरोप

पुरी का दावा है कि ये आरोप और हमले इसलिए किए जा रहे हैं, क्योंकि वह केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की बेटी हैं. जो पहले इंडियन फॉरेन सर्विस में काम कर चुके हैं और अभी केंद्रीय कैबिनेट में एक सीनियर पद पर हैं.



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