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सुप्रीम कोर्ट के सिविल जज भर्ती फैसले पर पुनर्विचार याचिका दायर, तीन साल की प्रैक्टिस अनिवार्यता पर सवाल

निचली अदालतों में सिविल जजों की नियुक्ति को लेकर दिए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर पुनर्विचार याचिका दायर की गई है. सुप्रीम कोर्ट ने 20 मई को यह फैसला दिया था. सिविल जजों की भर्ती के लिए तीन साल की प्रैक्टिस का नियम बहाल करने के फैसले पर दोबारा विचार करने की मांग की गई है. यह पुनर्विचार याचिका चंद्रशेखर यादव ने दाखिल की है.

दायर पुनर्विचार याचिका में लॉ ग्रेजुएट की सीधी भर्ती का नियम रद्द करने पर पुनर्विचार करने की मांग की गई है. अधिवक्ता कुणाल यादव के माध्यम से दायर पुनर्विचार याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट कई पहलुओं पर गौर नहीं किया है.

सुप्रीम कोर्ट का आदेश: सेवा नियमों में व्यापक बदलाव

बता दें कि सीजेआई बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने सभी हाई कोर्ट को नियमों में संशोधन करने को कहा है, ताकि सिविल जज सीनियर डिवीजन के लिए विभागीय परीक्षा के जरिए 10 फीसदी पद्दोन्नति को बढ़ाकर 25 फीसदी किया जाए. इसके अलावे सुप्रीम कोर्ट ने सिविल जज जूनियर डिवीजन परीक्षा में बैठने के लिए तीन साल की नियुन्तम प्रैक्टिस की आवश्यकता को बहाल कर दिया है.

कोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकारें सिविल जज सीनियर डिवीजन के लिए सेवा नियमों में संशोधन करके इसे 25 फीसदी तक बढ़ाएगी. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सभी राज्य सरकारें नियमों में संशोधन करके यह सुनिश्चित करेगी कि सिविल जज जूनियर डिवीजन के लिए परीक्षा में शामिल होने वाले किसी भी उम्मीदवार के पास कम से कम तीन साल की प्रैक्टिस का अनुभव होना चाहिए. इसे बार मे 10 साल का अनुभव रखने वाले वकील द्वारा प्रमाणिक किया जाना चाहिए.

चयन के बाद अनिवार्य एक वर्ष का प्रशिक्षण

कोर्ट ने कहा कि तीन साल की अवधि को नामांकन की तारीख से माना जा सकता है. ये शर्ते उन परीक्षाओं पर लागू नहीं होगी, जिनकी प्रक्रिया हाईकोर्ट्स ने शुरू कर दी है. फिलहाल इन परीक्षाओं में शामिल होने वाले उम्मीदवारों पर सुप्रीम कोर्ट का यह नियम लागू नही होगा. लेकिन आगे होने.वाली परीक्षाओं में यह शर्ते उम्मीदवारों को पूरी करनी होगी.

साथ ही कोर्ट ने जजों के लिए लॉ क्लर्क के रूप में किए गए काम के समय को भी जोड़ा जाएगा. जज चुने जाने के बाद अदालत में सुनवाई से पहले उन्हें एक साल का प्रशिक्षण लेना होगा. नियुन्तम प्रैक्टिस की आवश्यकता वहां लागू नही होगी. जहां हाईकोर्ट्स ने सिविल जज जूनियर डिवीजन की नियुक्ति प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी है. इसके साथ ही ऐसी भर्ती प्रक्रियाएं, जो इस मामले के लंबित रहने के कारण स्थगित रखी गई थी. सब संशोधित नियमों के अनुसार होगी.

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-भारत एक्सप्रेस 

गोपाल कृष्ण

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