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चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में CJI की एंट्री पर नया दांव, सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन दाखिल

देश के मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में सीजेआई को शामिल किए जाने के मुद्दे पर विभाजित फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन दाखिल किया गया है. दायर याचिका में फैसले को वापस लेने की मांग की गई है. याचिका में कहा गया है कि जस्टिस शर्मा को इस मामले में सुनवाई नही करनी चाहिए थी. क्योंकि जस्टिस शर्मा के बेटे चुनाव आयोग के लिए स्टैंडिंग काउंसिल है.

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने विभाजित फैसला सुनाया था. जस्टिस दीपांकर दत्ता ने केंद्र सरकार के उस मांग को खारिज कर दिया था, जिसमें सरकार ने मामले को संवैधानिक पीठ के पास भेजे जाने की मांग की थी. जबकि जस्टिस चंद्र शर्मा का मानना था कि इन याचिकाओं को अनुच्छेद 145 (3) के तहत संविधान पीठ के पास भेजा जाना चाहिए. इसके बाद मामले को सीजेआई के पास भेज दिया गया था.

याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि जस्टिस शर्मा के बेटे सिद्धार्थ शर्मा 10 जुलाई 2024 से मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में चुनाव आयोग के लिए स्टैंडिंग काउंसिल है.मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने संविधान पीठ के पास भेजने की मांग की थी.. सुनवाई के दौरान सरकार ने कहा था कि कानून बनाना सरकार का काम है.

पिछली सुनवाई के दौरान पूर्व आईएएस अधिकारी एसएन शुक्ला ने कहा था कि विधानमंडल ने बिना सोचे समझे-समझे संशोधन को मंजूरी दे दी. मंत्री की अध्यक्षता वाली खोज समिति एकतरफा है, क्योंकि अन्य सदस्यों को भी मंत्री द्वारा ही मनोनीत किया जाता है. उन्होंने कहा था कि राजनीतिक निष्पक्षता से समझौता किया गया है. चयन समिति भी एक तरफा है.

याचिका में समिति की संरचना को दी गई चुनौती

विपक्ष ने नेता को शामिल करना मात्र निर्रथक है, क्योंकि उनकी राय को नजरअंदाज किया जा सकता है. यह केवल नाममात्र की समिति है. जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने कहा था कि एक कैबिनेट मंत्री प्रधानमंत्री के खिलाफ जा ही नही सकता है. ऐसे में सभी नियुक्तियों पर फैसला जाहिर तौर पर दो तिहाई के बहुमत से ही होगा. यह याचिका कांग्रेस नेता डॉक्टर जया ठाकुर सहित अन्य की ओर से दायर की गई है.

दायर याचिका में केंद्र सरकार के 2023 के उस कानून को चुनौती दी है, जिसमें चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करने वाली चयन समिति से भारत के मुख्य न्यायाधीश को बाहर कर दिया गया है. नए कानून के मुताबिक इस चयन समिति में प्रधानमंत्री, एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता शामिल होंगे.

यह भी पढ़ें: डिप्रेशन में देश के युवा! उच्च शिक्षा संस्थानों के 15% छात्र अत्यधिक तनाव में, सुप्रीम कोर्ट की रिपोर्ट में खुलासा

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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