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“गलती कानून में नहीं, उसके दुरुपयोग में है,” सुप्रीम कोर्ट ने भूपेश बघेल की PMLA के प्रावधानों को चुनौती वाली याचिका की खारिज

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की ओर से दायर याचिका में सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है. पूर्व सीएम बघेल ने पीएमलए के कुछ प्रावधानों को चुनौती दी थी. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की अध्यक्षता वाली पीठ पर बघेल की ओर से दायर याचिका को खारिज करते हुए कहा इस प्रावधान में कोई खामी नजर नहीं आ रही है.

कोर्ट ने कहा कि अगर पीड़ित व्यक्ति को यह लगता है कि इस कानून का दुरुपयोग हो रहा है तो वह हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है. जस्टिस बागची ने कहा कि गलती कानून में नहीं, उसके दुरुपयोग में है. मामले की सुनवाई के दौरान बघेल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि पीएमलए की धारा 50 और 63 असंवैधानिक हैं.

वकील सिब्बल ने कहा कि हर कुछ महीने में ईडी पूरक शिकायत दर्ज करती है, जिससे ट्रायल में देरी होती है. पूर्व सीएम बघेल का आरोप था कि ये ईडी को व्यक्तियों को तलब करने और उनसे जवाब मांगने का अधिकार देकर मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है. जिसका इस्तेमाल उनके खिलाफ किया जा सकता है.

भूपेश बघेल ने गिरफ्तार न किए जाने की मांग की थी

भूपेश बघेल ने दायर याचिका में कहा था कि उन्हें इन मामलों में गिरफ्तार न किया जाए और जांच में सहयोग करने का अवसर दिया जाए.  उन्होंने अपनी याचिका में कहा था कि जिस तरह उनके बेटे को गिरफ्तार किया गया था, उसी तरह उन्हें भी गिरफ्तार किया जा सकता है. उनका आरोप है कि एजेंसियां राजनीतिक प्रतिशोध के तहत  गिरफ्तार कर रही है.

बता दें कि भूपेश बघेल और उनके बेटे चैतन्य बघेल के खिलाफ 2161करोड़ के कथित शराब घोटाले के मामले में जांच चल रही है. दरअसल सीबीआई ने महादेव बेटिंग एप मामले में भूपेश बघेल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर रखा है.

सीबीआई द्वारा दर्ज इस एफआईआर में बघेल का नाम छठें नंबर पर है. एफआईआर में बेटिंग एप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल समेत 21 आरोपियों के.नाम शामिल है. इस मामले में सीबीआई 60 जगहों पर छापेमारी कर चुकी है.

इसमें ऐप के प्रमोटर रवि उप्पल, सौरभ चंद्राकर, शुभम सोनी और अनिल अग्रवाल के अलावा छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल का नाम शामिल है. रवि उप्पल को भी पिछले साल दुबई से गिरफ्तार किया गया था.


ये भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट ने मुसलमानों में प्रचलित तलाक-ए-हसन, तलाक-ए-अहसन और तलाक-ए-किनाया पर NHRC, NCW और NCPCR से मांगी राय


-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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