सुप्रीम कोर्ट ने संविदा (Contractual) आधार पर नियुक्त पब्लिक प्रॉसिक्यूटर द्वारा नियमित करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है. जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने कोलकाता हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए याचिका को खारिज कर दिया है.
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि याचिकाकर्ता खुद जिला मजिस्ट्रेट, पुरुलिया से संविदा आधार पर काम जारी रखने की अनुमति मांगता रहा था, ताकि वह अपना जीवन यापन कर सके. इस परिस्थिति में अदालत ने माना कि जब याचिकाकर्ता ने स्वयं अनुबंध आधारित नियुक्ति स्वीकार की थी, तो उसे नियमित नियुक्ति का दावा करने का अधिकार नही है.
बता दें कि याचिकाकर्ता को 20 जून 2014 को जिला मजिस्ट्रेट पुरुलिया ने असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के रूप में अनुबंध पर नियुक्त किया ताकि खाली पड़े एक पद को भरा जा सके. उसे प्रत्येक पेशी पर 459 रुपये फीस मिलती थी. इसमें अलावा वह अधिकतम दो मामलों में ही पेश हो सकता था. बाद में रघुनाथपुर के न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में भी मामले सौंपे गए. बाद में उसने फीस बढ़ोतरी की मांग को लेकर राज्य प्रशासनिक न्यायाधिकरण में याचिका दाखिल की.
न्यायाधिकरण ने उसकी याचिका को 2022 में स्वीकार कर लिया. लेकिन 2023 में न्याय विभाग ने उसकी मांग को खारिज कर दिया. जिसके बाद यह मामला कोलकाता हाई कोर्ट पहुचा और हाई कोर्ट ने सभी पक्षों की जिरह में बाद याचिका को खारिज करते हुए कहा कि अगर याचिकाकर्ता चाहे तो सक्षम प्राधिकरण के समक्ष अपनी मांग को लेकर याचिका दाखिल कर सकता है. जिसके बाद याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए याचिका को खारिज कर दिया है.
– भारत एक्सप्रेस
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