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नेशनल हेराल्ड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में सोनिया गांधी की ओर से जिरह पूरी, राहुल गांधी के तरफ से 5 जुलाई को रखा जाएगा पक्ष

नेशनल हेराल्ड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सोनिया गांधी के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट में दलील दी कि यह मामला सिर्फ स्वामित्व का है, मनी लॉन्ड्रिंग का नहीं. उन्होंने ईडी की चार्जशीट को कयासों और राजनीति से प्रेरित बताया.

Sonia-Rahul Gandhi

नेशनल हेराल्ड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में सोनिया गांधी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने जिरह पूरी कर ली है. राहुल गांधी के तरफ से 5 जुलाई को दलीलें रखी जाएगी. राऊज एवेन्यु कोर्ट ने न्यायाधीश डॉक्टर विशाल गोगने की बेंच इस मामले में सुनवाई कर रही है.

मामले की सुनवाई के दौरान सोनिया गांधी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाते हुए कहा कि कोर्ट को इस मामले की सुनवाई करने का अधिकार नही है. सिंघवी ने ईडी के दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग के तहत नही बनता है.

उन्होंने कहा कि ईडी की चार्जशीट कयासों और काल्पनिक स्थितियों पर आधारित है. यह महज एसोसिएट्स जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) के स्वामित्व का मामला है. उन्होंने कहा कि मान लीजिए कि यंग इंडियन एजेएल की सौ प्रतिशत मालिक हैं, तो भी यह पूरी तरह से एक स्वामित्व का मामला है, यह मनी लॉन्ड्रिंग कैसे हो गया. उन्होंने कहा कि यह संस्था 65 वर्षों से अधिक समय से काम कर रही हैं. इतने लंबे समय के बाद इसे मनी लॉन्ड्रिंग का मामला नहीं कहा जा सकता है.

सिंघवी ने अदालत से कहा कि नेशनल हेराल्ड कांग्रेस से जुड़ीं संस्था रही है. अगर यह किसी ऐसे समूह के हाथ में चला जाए जो कांग्रेस से जुड़ा न हो, तो यह वैसा ही होगा जैसे हैमलेट नाटक में डेनमार्क के राजकुमार का न होना.

11 साल बाद ईडी की सक्रियता पर सवाल

सिंघवी ने यह भी कहा कि ईडी ने 2010 से लेकर 2021 तक इस मामले में कोई कार्रवाई क्यों नहीं की? आखिर 11 साल तक क्या किया गया? ईडी द्वारा 11 साल बाद अचानक सक्रिय होने मनसा पर सवाल खड़ा करता है. उन्होंने कहा कि यह मामला अजीब और अभूतपूर्व है, जिसमें न कोई पैसा का लेन-देन हुआ, न संपत्ति का स्थानांतरण हुआ. सिंघवी ने.मामले को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा कि यह पूरा मामला सिर्फ.एक.स्वामित्व विवाद हैं, जिसे मनी लॉन्ड्रिंग का जामा पहनाने की कोशिश की जा रही हैं.

सिंघवी ने कोर्ट को बताया कि एसोसिएट्स जर्नल्स लिमिटेड के पास देशभर में वर्षों से संपत्तियां हैं, लेकिन इनमें से किसी की भी मालिकाना स्थिति नहीं बदली है. उन्होंने यह भी कहा कि एजेएल और यंग इंडियन दोनों ही गैर-लाभकारी संस्थाएं हैं, जहां लाभांश बांटना या निजी मुनाफा लेना संभव नहीं है. सिंघवी ने कहा कि नेशनल हेराल्ड का कांग्रेस से जुड़ा होना कोई गलत बात.नहीं, यह पार्टी की विरासत का हिस्सा है.

उन्होंने कहा कि यंग इंडिया को एक वित्तीय माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया गया था ताकि एजेएल को कर्ज से मुक्त किया जा सके. उन्होंने कहा कि हर कंपनी किसी न किसी तरीके से अपनी देनदारियां कम करने का काम करती है. हमने भी वही किया. उन्होंने कहा कि यंग इंडियन एक गैर-लाभकारी कंपनी है, जो न लाभांश दे सकती है, न वेतन, न बोनस कुछ भी नहीं.

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-भारत एक्सप्रेस 



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