लीगल

क्या कम अटेंडेंस वाले लॉ छात्र दे सकेंगे परीक्षा? सुप्रीम कोर्ट ने BCI को नोटिस जारी कर मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट इस सवाल पर विचार करेगा कि क्या लॉ स्टूडेंट्स को कम अटेंडेंस के कारण परीक्षा देने से रोका जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि छात्रों को केवल कम अटेंडेंस के कारण परीक्षा देने से नहीं रोका जा सकता है.

बीसीआई को नोटिस और याचिकाकर्ता की दलील

जिसके खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. जस्टिस विक्रमनाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय विश्नोई की पीठ ने एनएमआईएमएस (NMIMS) की ओर से दायर याचिका पर यह नोटिस जारी किया है. साथ ही कोर्ट ने याचिका को मूल याचिका के साथ टैग कर दिया है. याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले ने उपस्थिति संबंधी आवश्यकताओं को प्रभावी रूप से अर्थहीन बना दिया है.

कोर्ट की टिप्पणी और NALSAR के छात्रों की याचिका

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि हम उस आदेश को निलंबित नहीं कर रहे हैं. हम मामले की सुनवाई करेंगे, फैसला करेंगे और कानून की सही स्थिति निर्धारित करेंगे. दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि कानून के छात्रों को केवल अपर्याप्त उपस्थिति के आधार पर परीक्षाओं में बैठने से रोका नहीं जा सकता है. इससे पहले NALSAR यूनिवर्सिटी के दो फाइनल ईयर के छात्रों द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट नोटिस जारी कर चुका है.

बीसीआई का सर्कुलर और हाई कोर्ट का फैसला

छात्रों ने सितंबर 2024 में बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा जारी सर्कुलर को चुनौती दी थी. इन सर्कुलर में कानूनी शिक्षा या प्रैक्टिस के लिए उम्मीदवारों का रजिस्ट्रेशन करने से पहले उनके आपराधिक बैकग्राउंड की जांच, एक साथ दो डिग्री या नौकरी करने की घोषणा और अटेंडेंस के नियमों का पालन करना अनिवार्य किया गया था. कोर्ट ने पूछा था कि क्या दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें कहा गया है कि छात्रों को कम अटेंडेंस के आधार पर रोका नहीं जा सकता.

ये भी पढ़ें: क्या बंगाल हिंसा के दोषियों को मिलेगी सजा? सुप्रीम कोर्ट में जुलाई में होगी सीबीआई जांच पर अहम सुनवाई

‘हाई कोर्ट के फैसले से पैदा हुई अराजकता’

कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि हाई कोर्ट के इस फैसले ने अराजकता पैदा कर दी है और नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है. बता दें कि नवंबर 2025 में दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा था कि भारत में किसी भी मान्यता प्राप्त लॉ कॉलेज, यूनिवर्सिटी या संस्थान में रजिस्टर्ड किसी भी छात्र को न्यूनतम अटेंडेंस की कमी के आधार पर परीक्षा देने से रोका नहीं जाएगा और न ही उसे आगे की पढ़ाई या करियर में प्रगति करने से वंचित किया जाएगा.

गोपाल कृष्ण

Recent Posts

अपना ही निकला गुनहगार! ठाणे में बिजनेसमैन के किडनैपिंग का मास्टरमाइंड निकला परिचित, 5 आरोपी गिरफ्तार

Ulhasnagar Kidnapping Case: महाराष्ट्र के ठाणे में एक कारोबारी के अपहरण और 50 लाख रुपये…

20 minutes ago

100 रुपये की रिश्वत ने छीनी वर्दी, वीडियो वायरल होते ही एक्शन में पुलिस

Kathua Police Bribery Video Viral: कठुआ जिले में ट्रक चालक से कथित तौर पर 100…

20 minutes ago

श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय) में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के उपलक्ष्य में भव्य छात्रा मिलन समारोह आयोजित

दिल्ली विश्वविद्यालय के श्यामा प्रसाद मुखर्जी महिला महाविद्यालय (एसपीएमसी) में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की…

20 minutes ago

AI और डीपफेक पर लगाम! विवेक ओबेरॉय, जाह्नवी और आराध्या के पर्सनैलिटी राइट्स पर दिल्ली हाई कोर्ट में एक साथ सुनवाई

दिल्ली हाई कोर्ट में फिल्मी हस्तियों द्वारा दायर पर्सनैलिटी राइट्स से जुड़ी याचिकाओं पर 30…

30 minutes ago

बंगाल दौरे पर BJP अध्यक्ष नितिन नवीन का दिखा अनूठा अंदाज; खुद बनाई झालमुरी, फिर लिया चटपटा स्वाद

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने बंगाल दौरे के दौरान सोमवार को कोलकाता में…

38 minutes ago

इंदौर में भारत-वेस्टइंडीज मैच के टिकट के नाम पर साइबर ठगी का अलर्ट, क्राइम ब्रांच ने लोगों को किया सतर्क

Indore Cricket Ticket Scam Alert: इंदौर में 11 अक्टूबर को भारत-वेस्टइंडीज मैच से पहले टिकट…

40 minutes ago