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क्या कम अटेंडेंस वाले लॉ छात्र दे सकेंगे परीक्षा? सुप्रीम कोर्ट ने BCI को नोटिस जारी कर मांगा जवाब

क्या अब बिना क्लास गए भी लॉ स्टूडेंट्स दे सकेंगे परीक्षा? दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट में छिड़ी इस बड़ी बहस से कानून की पढ़ाई के नियमों में आ सकता है भारी बदलाव.

West Bengal, Supreme Court, TMC

सुप्रीम कोर्ट इस सवाल पर विचार करेगा कि क्या लॉ स्टूडेंट्स को कम अटेंडेंस के कारण परीक्षा देने से रोका जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि छात्रों को केवल कम अटेंडेंस के कारण परीक्षा देने से नहीं रोका जा सकता है.

बीसीआई को नोटिस और याचिकाकर्ता की दलील

जिसके खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. जस्टिस विक्रमनाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय विश्नोई की पीठ ने एनएमआईएमएस (NMIMS) की ओर से दायर याचिका पर यह नोटिस जारी किया है. साथ ही कोर्ट ने याचिका को मूल याचिका के साथ टैग कर दिया है. याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले ने उपस्थिति संबंधी आवश्यकताओं को प्रभावी रूप से अर्थहीन बना दिया है.

कोर्ट की टिप्पणी और NALSAR के छात्रों की याचिका

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि हम उस आदेश को निलंबित नहीं कर रहे हैं. हम मामले की सुनवाई करेंगे, फैसला करेंगे और कानून की सही स्थिति निर्धारित करेंगे. दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि कानून के छात्रों को केवल अपर्याप्त उपस्थिति के आधार पर परीक्षाओं में बैठने से रोका नहीं जा सकता है. इससे पहले NALSAR यूनिवर्सिटी के दो फाइनल ईयर के छात्रों द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट नोटिस जारी कर चुका है.

बीसीआई का सर्कुलर और हाई कोर्ट का फैसला

छात्रों ने सितंबर 2024 में बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा जारी सर्कुलर को चुनौती दी थी. इन सर्कुलर में कानूनी शिक्षा या प्रैक्टिस के लिए उम्मीदवारों का रजिस्ट्रेशन करने से पहले उनके आपराधिक बैकग्राउंड की जांच, एक साथ दो डिग्री या नौकरी करने की घोषणा और अटेंडेंस के नियमों का पालन करना अनिवार्य किया गया था. कोर्ट ने पूछा था कि क्या दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें कहा गया है कि छात्रों को कम अटेंडेंस के आधार पर रोका नहीं जा सकता.

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‘हाई कोर्ट के फैसले से पैदा हुई अराजकता’

कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि हाई कोर्ट के इस फैसले ने अराजकता पैदा कर दी है और नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है. बता दें कि नवंबर 2025 में दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा था कि भारत में किसी भी मान्यता प्राप्त लॉ कॉलेज, यूनिवर्सिटी या संस्थान में रजिस्टर्ड किसी भी छात्र को न्यूनतम अटेंडेंस की कमी के आधार पर परीक्षा देने से रोका नहीं जाएगा और न ही उसे आगे की पढ़ाई या करियर में प्रगति करने से वंचित किया जाएगा.



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