सुप्रीम कोर्ट ने इंदौर के बहुचर्चित राजा रघुवंशी हत्या मामले में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. हालांकि, कोर्ट ने मेघालय हाई कोर्ट से सोनम रघुवंशी को मिली जमानत पर रिहाई के आदेश पर फिलहाल तुरंत रोक लगाने से इनकार कर दिया है. मेघालय सरकार ने हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. जस्टिस एम. एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की पीठ ने यह निर्देश जारी किया है. अब सर्वोच्च अदालत 10 जुलाई को इस मामले में अगली सुनवाई करेगी.
मेघालय सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने अदालत में दलील देते हुए कहा कि यह बेहद चौंकाने वाली घटना है. हत्या जैसे गंभीर मामले में हाई कोर्ट द्वारा तकनीकी आधार पर जमानत दिया जाना पूरी तरह गलत है. उन्होंने कहा कि हत्या की यह साजिश पहले से ही रची गई थी. पत्नी अपने पति को पहाड़ी इलाके में ले जाती है, हमले में खुद शामिल होती है, उसकी हत्या कर दी जाती है और फिर लाश को गहरी खाई में फेंक दिया जाता है. महिला अपने साथ तीन हमलावरों को ले गई थी और उसने खुद भी हत्या की वारदात को अंजाम दिया और वहां से भाग गई, जिसके बाद उसे उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया गया.
इस पर जस्टिस सुंदरेश ने पूछा कि क्या उसे फेंका गया था या उसने धक्का दिया था? एसजी मेहता ने बताया कि राजा की बेरहमी से हत्या कर दी गई और लाश को खाई में फेंक दिया गया, जिसके 3 दिन बाद लाश बरामद हुई. कोर्ट ने जब एसजी से पूछा कि केस अभी किस स्टेज पर है, तो उन्होंने बताया कि मामला अभी ट्रायल (मुकदमे) की स्टेज पर है, लेकिन ऐसे फैसले से समाज में एक गलत मिसाल कायम होती है. इस मामले में अभी 94 गवाहों से पूछताछ होनी बाकी है. कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट के आदेश को लेकर कुछ शुरुआती आपत्तियां हैं; हम आदेश पर गौर करेंगे और देखेंगे कि ट्रायल कैसे आगे बढ़ता है.
मेघालय सरकार का मुख्य तर्क है कि गिरफ्तारी के कागजात में केवल एक मामूली टाइपिंग की गलती (Typographical Error) के कारण सोनम रघुवंशी को अदालत से जमानत मिल गई. गिरफ्तारी के दौरान कागजात पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत हत्या की धारा 103 (1) बीएनएस लिखना था, लेकिन लिपिकीय चूक के कारण वहां 403 (1) बीएनएस दर्ज हो गया.
सरकार का कहना है कि गिरफ्तारी के समय जांच और पुख्ता सबूतों के आधार पर कई कानूनी दस्तावेज बनाए गए थे, जिन पर सोनम रघुवंशी समेत अन्य आरोपियों के बाकायदा हस्ताक्षर थे. कुल 6 दस्तावेजों में गिरफ्तारी के कारण बिल्कुल सही धाराओं में दर्ज किए गए थे, लेकिन महज एक दस्तावेज में टाइपो की गलती के कारण 103 (1) बीएनएस की जगह 403 (1) बीएनएस दर्ज हो गया था.
राज्य सरकार का यह भी कहना है कि सोनम के वकील इससे पहले तीन बार अदालत से जमानत की गुहार लगा चुके थे, लेकिन उन्होंने कभी भी शुरुआती सुनवाइयों में इस तकनीकी चूक का जिक्र नहीं किया. चौथी बार रणनीति के तहत उन्होंने कोर्ट में इस गलती का जिक्र किया और सोनम रघुवंशी को जमानत मिल गई.
इससे पहले निचली अदालत ने सोनम रघुवंशी को 27 अप्रैल को जमानत दे दी थी, जिसके खिलाफ मेघालय सरकार ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. लेकिन मेघालय हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से दायर याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने अनिवार्य कानूनी प्रक्रिया का सही ढंग से पालन नहीं किया और सोनम को प्रभावी तरीके से उसकी गिरफ्तारी के ठोस आधार नहीं बताए गए. हाई कोर्ट ने इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 22(1) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 47 (1) का सीधा उल्लंघन माना था.
बता दें कि इंदौर के रहने वाले राजा रघुवंशी और उनकी पत्नी सोनम रघुवंशी 22 मई 2025 को हनीमून मनाने के लिए मेघालय के शिलांग पहुंचे थे. 26 मई को दोनों सोहरा (चेरापूंजी) घूमने निकले थे, जिसके बाद से ही राजा रघुवंशी अचानक लापता हो गए. स्थानीय प्रशासन और पुलिस की काफी खोजबीन के बाद, आखिरकार 2 जून 2025 को राजा रघुवंशी का शव सोहरा स्थित प्रसिद्ध ‘वेई सदोंग फॉल्स’ के पास एक गहरी खाई से बरामद किया गया था.
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