लीगल

जजों की रिटायरमेंट उम्र पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, राज्यों से 2 हफ्ते में मांगा फैसला

Supreme Court judges retirement age: सुप्रीम कोर्ट ने देश की निचली अदालतों के न्यायिक अधिकारियों (जजों) की सेवानिवृत्ति आयु को लेकर अहम अंतरिम आदेश में संशोधन करते हुए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को दो सप्ताह के भीतर अपना रुख स्पष्ट करने का निर्देश दिया है. अदालत ने कहा कि राज्य सरकारें अपने-अपने हाई कोर्ट से परामर्श कर यह तय करें कि न्यायिक अधिकारियों की रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाई जाए या नहीं.

राज्य और हाई कोर्ट की सहमति होगी जरूरी

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि किसी राज्य सरकार और संबंधित हाई कोर्ट के बीच सहमति बनती है, तो वहां के न्यायिक अधिकारियों को 1 अप्रैल 2026 से 61 वर्ष की आयु तक सेवा में बने रहने की अनुमति दी जा सकती है. हालांकि, यह व्यवस्था मामले में आने वाले अंतिम फैसले के अधीन रहेगी.

5 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 5 अगस्त 2026 तय की है. अदालत ने कहा कि इस मामले में मुख्य कानूनी प्रश्न यह है कि क्या पूरे देश में जिला न्यायालयों के अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष समान रूप से की जानी चाहिए. इस मुद्दे पर अंतिम फैसला सभी पक्षों की दलीलों और मेरिट के आधार पर लिया जाएगा.

हर राज्य में अलग हो सकता है फैसला

पीठ ने स्पष्ट किया कि 60 वर्ष के बाद सेवा जारी रखने का लाभ केवल उन्हीं राज्यों में मिलेगा, जहां राज्य सरकार और संबंधित हाई कोर्ट दोनों रिटायरमेंट आयु बढ़ाने की सिफारिश करेंगे. यदि ऐसी सहमति या सिफारिश नहीं होती है, तो न्यायिक अधिकारियों को वर्तमान नियमों के अनुसार 60 वर्ष की आयु पूरी होने पर सेवानिवृत्त किया जाएगा.

यह भी पढ़ें: ट्रंप की 200% टैरिफ वाली चाल, क्या भारत बचा पाएंगा अरबों का कारोबार?

राजस्थान समेत कई राज्यों ने जताया विरोध

सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने अदालत को बताया कि राज्य में सरकारी कर्मचारियों और जिला स्तर के न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष है और राज्य सरकार ने इसे बढ़ाने की कोई सिफारिश नहीं की है. उन्होंने बताया कि कई अन्य राज्यों ने भी सामान्य रूप से रिटायरमेंट आयु बढ़ाने का विरोध किया है.

पहले भी आ चुका है अंतरिम आदेश

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट उत्तर प्रदेश के एक न्यायिक अधिकारी की याचिका पर भी इसी तरह का अंतरिम आदेश दे चुका है. पिछली सुनवाई में सीजेआई सूर्यकांत ने कहा था कि मध्य प्रदेश से जुड़े एक मामले में अदालत पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 61 वर्ष करने में कोई कानूनी बाधा नहीं है. वहीं, जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने बताया कि बाद में एक नई रिट याचिका में इस आयु को 61 से बढ़ाकर 62 वर्ष करने की मांग भी उठाई गई है, जिस पर अब सुप्रीम कोर्ट विचार कर रहा है.

भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

Recent Posts

आज का पंचांग 7 नवंबर 2026: काली चौदस आज रात, जानें पूजा का मुहूर्त, राहुकाल और भद्रा

Aaj Ka Panchang 7 November 2026: आज 7 नवंबर को काली चौदस और मासिक शिवरात्रि…

9 minutes ago

मेरठ में मिठाइयों के नाम पर बड़ा खेल! गुप्त तहखाने में चल रही थी नकली चांदी के वर्क की फैक्टरी

Meerut Fake Silver Foil Factory: मेरठ के परतापुर थाना क्षेत्र के काशी गांव में खाद्य…

9 hours ago