सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को लेकर दायर नई याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट जाने को कहा है. जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने यह निर्देश दिया है. इसे ‘एनिमल्स आर पीपल टू’ नामक एनजीओ ने दायर किया था. एनजीओ का कहना है कि कई राज्यों और स्थानीय अधिकारी सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल ही में दिए गए फैसले की गलत व्याख्या कर रहे हैं.
दायर याचिका में मांग की गई थी कि वह साफ तौर पर बताए कि उसके किसी भी निर्देश में आवारा कुत्तों की अंधाधुंध हत्या की अनुमति नहीं दी गई है. दायर अर्जी में मांग की गई थी कि कुत्तों को मारने की अनुमति देने वाला निर्देश अंधाधुंध तरीके से कुत्तों को मारने का आदेश नहीं है. पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के बयान और खालसा कॉलेज से कुत्तों को हटाए जाने की खबरों का हवाला देते हुए एनजीओ ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश को अधिकारियों द्वारा गलत समझा जा रहा है.
एनजीओ ने दायर याचिका पर स्पष्टीकरण मांगा था कि इच्छामृत्यु केवल सीमित परिस्थितियों में विशेषज्ञों द्वारा उचित सत्यापन के बाद एबीसी नियम 2023 के अनुसार की जा सकती है. एनजीओ ने सभी राज्यों के उपराज्यपालों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देने की मांग की थी कि किसी भी कुत्ते को गैरकानूनी रूप से न मारा जाए या जहर न दिया जाए.
जस्टिस विक्रमनाथ ने कहा कि कोर्ट से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह सिर्फ इसलिए अपना आदेश बदल दे, क्योंकि किसी मुख्यमंत्री ने कोई सार्वजनिक बयान दिया. सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक संस्थानों के परिसरों से कुत्तों को हटाने के निर्देश को वापस लेने से इनकार कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हमें हवाई अड्डों, रिहायशी इलाकों, शहरी केंद्रों आदि में कुत्तों के काटने की घटनाओं से अवगत कराया गया है. देश के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों (आईजीआई) पर बार-बार कुत्तों के काटने की घटनाएं होना ही गंभीर अक्षमता को दर्शाता है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सूरत में एक जर्मन यात्री को कुत्ते ने काट लिया. ऐसी घटनाएं शहरी प्रशासन में जनता के विश्वास को बुरी तरह प्रभावित करती हैं. कोर्ट ने कहा था रिपोर्टों से पता चलता है कि समस्या ने बेहद चिंताजनक रूप ले लिया है. अकेले राजस्थान के श्री गंगानगर शहर में एक महीने में 1084 कुत्ते के काटने की घटनाएं दर्ज की गईं. रिपोर्टों के अनुसार, छोटे बच्चों को गंभीर चोटें आईं, जिनमें उनके चेहरे पर गंभीर घाव आदि शामिल हैं. तमिलनाडु में वर्ष के पहले चार महीनों में लगभग 2 लाख मामले दर्ज किए गए.
ये भी पढ़ें: ‘इसे इतनी भावुकता से मत लें’, कॉकरोच जनता पार्टी मामले में जल्द सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो राज्यों के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू की जाएगी. सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को निर्देश दिया था कि राज्य सरकार, AWBI फ्रेमवर्क नियमों को सुदृढ़ और कार्यान्वित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी. राज्य प्रत्येक जिले में कम से कम एक ABC केंद्र की स्थापना सुनिश्चित करेंगे. प्रत्येक राज्य जिले की जनसंख्या घनत्व को ध्यान में रखते हुए अधिकारी ABC केंद्रों के विस्तार हेतु आवश्यक कदम उठाएंगे. रेबीज रोधी दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी.
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन के बीच इंटरनेट पर…
Katrina Kaif Maniesh Paul News: मनीष पॉल ने खुलासा किया कि एक टीवी चैनल उनसे…
Poompuhar Archaeology: तमिलनाडु के तट से करीब 2 किलोमीटर दूर समुद्र के भीतर ऐसी खोज…
UP Election 2027: यूपी में पिछले 12 साल में राजनीति में आए 14 IAS-IPS अधिकारियों…
MAHARASHTRA'S QUANTUM AMBITIONS IN LONDON: महाराष्ट्र को देश की क्वांटम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) राजधानी…
मुजफ्फरनगर में पुरानी रंजिश के चलते एक व्यक्ति को लाठी-डंडों से बेरहमी से पीटने का…