लीगल

सुप्रीम कोर्ट ने त्योहार और छुट्टियों के दौरान हवाई जहाज के टिकटों में भारी बढ़ोतरी के मामले में केंद्र सरकार को दिया निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने त्योहार और छुट्टियों के दौरान हवाई जहाज के टिकटों में भारी बढ़ोतरी के मामले में केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि हवाई किराए को रेगुलट करने के लिए बनाए गए नियमों की एक कॉपी दाखिल करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने सरकार से 2 हफ्ते में कॉपी दाखिल करने के निर्देश दिया है. जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने यह आदेश दिया है. कोर्ट 3 अगस्त को मामले में अगली सुनवाई करेगा.

मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि हवाई किराए को रेगुलेट करने के नियम तैयार कर लिए गए हैं. इन नियमों को 30 दिनों के भीतर संसद के दोनों सदनों के सामने प्रस्तुत किए जाने की उम्मीद है. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि नियमों की एक कॉपी दो हफ्ते के भीतर उसके सामने रखा जाए. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि हवाई किराए में होने वाले बेतहाशा उतार चढ़ाव में दखल दिया जाएगा. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल कौशिक से कहा था कि कुंभ और अन्य त्योहार के दौरान यात्रियों के शोषण को ही देख लीजिए.

त्योहारों के दौरान यात्रियों के शोषण पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

दिल्ली से प्रयागराज और जोधपुर के किराए पर नजर डालिए. दायर याचिका में प्राइवेट एयरलाइंस कंपनियों के हवाई किराए और बाकी फीस में अप्रत्याशित उतार चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए बाध्यकारी नियामक दिशानिदेशों का अनुरोध किया गया है. जस्टिस मेहता ने अदालत में मौजूद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि हो सकता है कि अहमदाबाद के हवाई किराए में वृद्धि नही हुई हो. लेकिन जोधपुर जैसे अन्य जगहों के लिए किराए में भारी बढ़ोतरी हुई है. सुप्रीम कोर्ट सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायण द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा है.

दायर याचिका में दावा किया गया था कि वर्तमान में किसी भी ऑथोरिटी के पास हवाई किराए या अतिरिक्त शुल्कों की समीक्षा करने या उनकी अधिकतम सीमा तय करने की शक्ति नहीं है. इसी का फायदा उठाकर एयरलाइंस गुप्त शुल्कों और कीमतों में मनमाने बदलाव के जरिए उपभोक्ताओं का शोषण कर रही है.

याचिका में यह भी कहा गया है कि एयरलाइंस के अनियंत्रित, अपारदर्शी और शोषणकारी व्यवहार जैसे कि मनमाना किराए बढ़ाना, सेवाओं में एकतरफा कटौती, जमीनी स्तर पर शिकायत निवारण की कमी और अनुचित डायनामिक प्राइसिंग एल्गोरिदम-नागरिकों के समानता, आवाजाही की स्वतंत्रता और सम्मान के साथ जीने के मौलिक अधिकारों का सीधे तौर पर उल्लंघन करता है.

ये भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: पश्चिम बंगाल के 390 मदरसा कर्मचारियों की याचिकाएं खारिज

गोपाल कृष्ण

Recent Posts

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी: पुलिस की विवेचना रिपोर्ट में CCTV से 105 घटनाएं उजागर, 8 आरोपियों पर शिकंजा; भारत एक्सप्रेस के पास चार्जशीट

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में 'भारत एक्सप्रेस' के पास पुलिस की आधिकारिक चार्जशीट…

2 hours ago

प्रेमानंद महाराज के शिष्य की रहस्यमयी मौत, चौथी मंजिल से लगाई छलांग, कटा मिला प्राइवेट पार्ट

Premanand Maharaj: वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज के एक शिष्य की रहस्यमयी मौत हो गई.…

2 hours ago

‘आप हमें लगातार गौरवान्वित कर रहे’, पीएम मोदी ने एशियन गेम्स में मेडल जीतने पर गुलवीर, मनप्रीत और बारानिका को दी बधाई

PM MODI HAILS ASIAN GAMES MEDALISTS: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एशियन गेम्स 2026 (आइची-नागोया) में…

3 hours ago

‘भाजपा में आने के बाद मुझे कुछ नहीं मिला’, कैप्टन अमरिंदर बोले- कांग्रेस भी शायद वापस न ले

Captain Amarinder Singh: पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपने…

3 hours ago

यूपी में मौसम का तांडव! भारी बारिश और रेड अलर्ट जारी, जानिए कैसा है आपके जिले का हाल?

उत्तर प्रदेश में 27 सितंबर तक भारी बारिश, आंधी-तूफान और बिजली गिरने की आशंका को…

3 hours ago