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राजनीतिक दलों को आरटीआई के दायरे में लाने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट आगामी 21 अप्रैल से शुरू हो रहे सप्ताह में उन याचिकाओं पर सुनवाई करेगा, जिनमें राजनीतिक दलों को सूचना के अधिकार (RTI) के तहत लाने की मांग की गई है. अदालत ने इस संबंध में केंद्र सरकार, चुनाव आयोग और अन्य संबंधित पक्षों को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.

क्या है याचिका?

यह याचिका एनजीओ एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR), वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय और अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर की गई है. इसमें कहा गया है कि केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने 2013 और 2015 में अपने आदेशों में कहा था कि राजनीतिक दलों को कर छूट, सरकारी भूमि और अन्य लाभ मिलते हैं, इसलिए पारदर्शिता के लिए उन्हें RTI के तहत लाया जाना चाहिए.

याचिका में कहा गया है कि जन प्रतिनिधि कानून की धारा 29 सी के अनुसार राजनीतिक दलों को मिलने वाले दान की जानकारी भारत के निर्वाचन आयोग को दी जानी चाहिए. यह दायित्व उनकी सार्वजनिक प्रकृति की ओर इंगित करता है. इसमें कहा गया है कि इसलिए, यह कोर्ट घोषित कर सकती है कि राजनीतिक दल आरटीआई कानून 2005 की धारा 2 (H)के तहत सार्वजनिक ऑथोरिटी है. याचिका में कहा गया है कि राजनीतिक दलों को चुनाव चिन्ह आवंटित करने और आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन में उन्हें निलंबित करने या वापस लेने की चुनाव आयोग की शक्ति भी उसकी सार्वजनिक प्रकृति को दिखाता है.

केंद्र सरकार का विरोध

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर राजनीतिक पार्टियों को आरटीआई के दायरे में लाए जाने का विरोध किया है. केंद्र सरकार द्वारा दायर हलफनामे में कहा गया है कि राजनीतिक पार्टियां पब्लिक अथॉरिटी नहीं है और ना ही उनका गठत संविधान या संसद के बनाए किसी कानून के तहत हुआ है. इनका गठत जनप्रतिनिधि एक्ट 1951के तहत हुआ है.

बता दें कि आरटीआई कार्यकर्ता सुभाष चंद्र अग्रवाल और अनिल बैरवाल ने सूचना आयोग के समक्ष अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराकर राजनीतिक दलों को सूचना के अधिकार के तहत लाने की मांग की थी. सूचना आयोग ने दोनों शिकायतों पर सुनवाई करते हुए राजनीतिक दलों को खर्च और चंदे का ब्यौरा सूचना के अधिकार के तहत उपलब्ध कराने का आदेश दिया है. 6 सितंबर 2011 को सूचना आयोग के समक्ष दायर अपनी शिकायत में सुभाष चंद्र अग्रवाल ने कहा था कि कांग्रेस पार्टी और भारतीय जनता पार्टी को राष्ट्रीय पार्टी होने के कारण दिल्ली में बेशकीमती सरकारी जमीनें रियायती किराए पर मुहैया कराई गई है.


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-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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