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तेलंगाना के कांचा गालीबोवली वन क्षेत्र में पेड़ों की कटाई के मामले में सुप्रीम कोर्ट 23 जुलाई को करेगा सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना के कांचा गालीबोवली वन क्षेत्र में पेड़ों की कटाई के मामले में तेलंगाना के अधिकारियों को जेल भेजने की चेतावनी दी थी. सीजेआई बी. आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अगर आप चाहते हैं कि मुख्य सचिव और आधा दर्जन अधिकारी अस्थाई जेल में चले जाएं तो हम ऐसा कर सकते हैं. कोर्ट ने कहा कि हम हमेशा से सतत विकास के पक्षधर रहे हैं. मामले की सुनवाई के दौरान तेलंगाना सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने मामले की सुनवाई टालने की मांग की, जिसपर कोर्ट ने कहा कि हम आपको सतर्क कर रहे हैं. आप ऐसी बात का बचाव करने की कोशिश कर रहे हैं.

कोर्ट ने सिंघवी से पूछा कि क्या आपने वो तस्वीरें देखी है? दर्जनों बुल्डोजर मंगवाए गए थे. प्रथम दृष्टया ये सब पहले से ही योजनाबद्ध है. कोर्ट 23 जुलाई को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. कोर्ट ने मामले में यथास्थिति बरकरार रखने का निर्देश दिया है. पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने पूछा था कि मुख्य सचिव यह बताए कि जल्दी क्यों की जा रही थी और क्या मजबूरी थी? क्या पेड़ों की कटाई से पहले इसका पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन किया गया था? क्या पेड़ों की कटाई से पहले जरूरी मंजूरी ली गई थी? क्या कुछ अधिकारियों का समिति में होना जरूरी था, जो कि जंगल से संबंधित नहीं थे? कोर्ट ने यह भी कहा था कि यदि इन आदेशों का पालन नहीं किया जाता है, तो मुख्य सचिव के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और उन्हें इसके परिणामों का जिम्मेदार ठहराया जाएगा.

यह इलाका हैदराबाद विश्वविद्यालय के पास है. कोर्ट ने कहा कि हम तेलंगाना के मुख्य सचिव को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देते हैं कि जब तक इस अदालत द्वारा अगला आदेश पारित नहीं किया जाता है, कांचा गाचीबोवलीवन क्षेत्र में पेड़ों की कटाई की अनुमति नहीं दी जाएगी. कोर्ट ने कहा कि अखबारों से पता चला कि कांचा गाचीबोवली जंगल में वनों की कटाई बड़े पैमाने पर की जा रही हैं. जिससे पता चलता है कि बड़ी संख्या में पेड़ों को काटा जा रहा है. कोर्ट को बताया गया है उस वन क्षेत्र में 8 प्रकार के अनुसूचित जानवर भी रहते हैं.

यह मामला तब सामने आया जब 30 मार्च से बड़ी संख्या में पेड़ काटे गए. इसपर छात्रों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने विरोध किया जिसके बाद मामला अदालत तक पहुचा था. दरअसल की कांग्रेस सरकार ने यहां आईटी पार्क के विकास के लिए 400 एकड़ जमीन की नीलामी करने का फैसला लिया है. यहां पिछले कुछ वर्षों में रणनीतिक रूप से स्थित विशाल भूखंडों की मांग बढ़ गई है. यहां कई कंपनियों ने अपना मुख्यालय स्थापित कर लिया हैं.

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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