Tirupati Laddu Case Supreme Court Verdict
Tirupati Laddu Case Supreme Court Verdict: तिरुपति बालाजी मंदिर के प्रसिद्ध लड्डू में कथित तौर पर जानवरों की चर्बी मिलाए जाने के विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई आंध्र प्रदेश से बाहर किसी दूसरे राज्य में ट्रांसफर करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है. चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने महाराष्ट्र के डेयरी कारोबारी माचिन्द्र शांताराम लंके की याचिका पर सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया. लंके इस मामले में आरोपी हैं और मलंगा मिल्क एंड एग्रो प्रोडक्ट प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं. उन्होंने निष्पक्ष सुनवाई का हवाला देते हुए मुकदमे को किसी पड़ोसी राज्य में स्थानांतरित करने की मांग की थी.
सुनवाई के दौरान शांताराम लंके की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने दलील दी कि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री लगातार इस मामले पर राजनीतिक बयान दे रहे हैं. इससे राज्य में निष्पक्ष सुनवाई का माहौल प्रभावित हो सकता है. उन्होंने कहा कि अभियोजन पक्ष का निष्पक्ष होना बेहद जरूरी है. मुकदमे को ऐसे पड़ोसी राज्य में ट्रांसफर किया जा सकता है, जहां यह मामला इतना भावनात्मक न हो. दवे ने भाषा की बाधा का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने बताया कि अधिकांश आरोपी उत्तर भारत के रहने वाले हैं, इसलिए दूसरे राज्य में सुनवाई होने से उन्हें सुविधा मिल सकती है.
वकील सिद्धार्थ दवे की दलीलों पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि कोर्ट ने अपने आदेश के जरिए सभी संबंधित लोगों को चुप करा दिया है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर आगे कुछ होता है तो याचिकाकर्ता दोबारा सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकते हैं.
दवे ने कोर्ट से अपील की कि नेताओं की ओर से दिए जा रहे बयानों पर ध्यान दिया जाए, क्योंकि इनका मुकदमे पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल ट्रांसफर की मांग स्वीकार नहीं की.
तिरुपति लड्डू विवाद सितंबर 2024 में उस समय सुर्खियों में आया था, जब लड्डू बनाने में इस्तेमाल घी में जानवरों की चर्बी मिलाए जाने के आरोप सामने आए थे. इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 4 अक्टूबर 2024 को पांच सदस्यीय स्वतंत्र विशेष जांच टीम (SIT) गठित की थी.
कोर्ट का उद्देश्य जांच को स्वतंत्र तरीके से आगे बढ़ाना और लोगों की धार्मिक भावनाओं को लेकर उठे विवाद को शांत करना था. इससे पहले अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि न्यायालय को राजनीतिक अखाड़े के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए.
इस मामले में हिंदू सेना के प्रमुख सुरजीत यादव समेत कई लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की थीं. याचिकाकर्ताओं ने आरोपों की निष्पक्ष जांच, फॉरेंसिक रिपोर्ट और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की थी. वहीं, तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के पूर्व अध्यक्ष और वाईएसआर कांग्रेस के राज्यसभा सांसद वाईवी सुब्बा रेड्डी ने सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में SIT गठित करने की मांग की थी. अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रायल ट्रांसफर की याचिका खारिज किए जाने के बाद इस मामले की सुनवाई आंध्र प्रदेश में ही जारी रहेगी.
भारत एक्सप्रेस
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